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महासमुंद में आयोजित खाद विक्रेता संघ की बैठक
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खाद संकट की आहट : व्यापारियों ने 1 जून से बिक्री बंद करने का किया ऐलान

महासमुंद ब्लॉक के खाद व्यापारियों ने शासन की निर्धारित दर पर खाद नहीं मिलने से नाराज होकर 1 जून 2026 से खाद बिक्री बंद करने का ऐलान किया है। व्यापारियों ने निर्णय लिया है कि 30 मई तक मौजूदा स्टॉक किसानों को बेचा जाएगा, लेकिन नई खाद की खरीदी नहीं होगी। उन्होंने आरोप लगाया कि कंपनियां और कुछ होलसेल व्यापारी तय दरों का पालन नहीं कर रहे, जिससे रिटेल व्यापारियों पर आर्थिक दबाव बढ़ रहा है। जल्द समाधान नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी भी दी गई है।

कीर्तिमान ब्यूरो
कीर्तिमान ब्यूरो
12 May 2026, 12:15 PM
📍 महासमुंद

खरीफ सीजन से ठीक पहले महासमुंद जिले में खाद संकट को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। शासन द्वारा निर्धारित दर पर खाद उपलब्ध नहीं होने से नाराज महासमुंद ब्लॉक के फुटकर खाद व्यापारियों ने 1 जून 2026 से खाद बिक्री पूरी तरह बंद करने का ऐलान कर दिया है। व्यापारियों का कहना है कि कंपनियां और कुछ होलसेल विक्रेता तय कीमतों का पालन नहीं कर रहे हैं, जिससे खुदरा व्यापारियों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।

महासमुंद शहर के रसोई रेस्टोरेंट में रविवार को आयोजित महासमुंद ब्लॉक खाद विक्रेता संघ और खाद होलसेल व्यापारियों की बैठक में यह निर्णय सर्वसम्मति से लिया गया। बैठक में बड़ी संख्या में फुटकर खाद विक्रेता मौजूद रहे। व्यापारियों ने साफ कहा कि जब तक उन्हें शासन की निर्धारित दर पर खाद उपलब्ध नहीं कराया जाएगा, तब तक वे नई खाद की खरीदी नहीं करेंगे।

30 मई तक बिकेगा मौजूदा स्टॉक

बैठक में तय किया गया कि वर्तमान में दुकानों में उपलब्ध खाद का स्टॉक 30 मई 2026 तक किसानों को विक्रय किया जाएगा। इसके बाद 1 जून से खाद विक्रय पूरी तरह बंद कर दिया जाएगा।

इसके साथ ही व्यापारियों ने यह भी निर्णय लिया कि जो होलसेल व्यापारी संघ के फैसले का समर्थन नहीं करेंगे, उनसे कोई भी फुटकर व्यापारी खाद की खरीदी नहीं करेगा। इस फैसले को व्यापारियों की एकजुटता का बड़ा संकेत माना जा रहा है।

निर्धारित रेट से ज्यादा में मिल रही खाद

बैठक में व्यापारियों ने आरोप लगाया कि बाजार में खाद निर्धारित दर से अधिक कीमत पर उपलब्ध कराई जा रही है। इससे फुटकर व्यापारियों की लागत बढ़ रही है, जबकि किसानों को शासन की दर पर खाद बेचने का दबाव बनाया जाता है।  व्यापारियों का कहना है कि इस स्थिति में उन्हें प्रति बोरी नुकसान उठाना पड़ रहा है। लगातार बढ़ते आर्थिक दबाव के कारण छोटे व्यापारियों के लिए कारोबार चलाना मुश्किल होता जा रहा है। एक व्यापारी ने बैठक में कहा कि यदि शासन और कंपनियों ने समय रहते व्यवस्था नहीं सुधारी तो आने वाले दिनों में खाद संकट और गहरा सकता है।

आंदोलन की चेतावनी

व्यापारियों ने साफ कहा कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो आंदोलन को और बड़ा रूप दिया जाएगा। संघ के पदाधिकारियों ने संकेत दिए कि जरूरत पड़ने पर जिला स्तर से लेकर राज्य स्तर तक विरोध प्रदर्शन किया जा सकता है। बैठक में खाद होलसेलर कृषि सेवा केंद्र रायपुर के संचालक राजीव बग्गा, पायल फर्टिलाइजर रायपुर के संचालक अशोक असरानी तथा सुहाने एग्रोटेक रायपुर के प्रतिनिधि अजित सिंह उपस्थित रहे। महासमुंद ब्लॉक खाद विक्रेता संघ के अध्यक्ष जागेश्वर जुगनू चंद्राकर और सचिव ईश्वर पटेल ने सभी व्यापारियों से एकजुट रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि संगठन व्यापारियों के हितों की रक्षा के लिए हर स्तर पर संघर्ष करेगा।

किसानों की बढ़ सकती है चिंता

खाद व्यापारियों के इस फैसले का असर सीधे किसानों पर पड़ सकता है। खरीफ सीजन शुरू होने से पहले किसान खाद की व्यवस्था में जुटे हैं। ऐसे समय में यदि खाद बिक्री बंद होती है तो जिले में खाद की किल्लत पैदा होने की आशंका बढ़ जाएगी। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर खाद उपलब्ध नहीं होने पर बोआई और उत्पादन दोनों प्रभावित हो सकते हैं। ऐसे में प्रशासन और संबंधित कंपनियों के सामने जल्द समाधान निकालने की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।

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