गरियाबंद जिले में मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ एक अहम मामले में अदालत ने कड़ा रुख अपनाते हुए दो आरोपियों को लंबी सजा सुनाई है। यह फैसला न केवल स्थानीय स्तर पर बल्कि पूरे क्षेत्र में नशीले पदार्थों के खिलाफ चल रही कार्रवाई के संदर्भ में एक महत्वपूर्ण संदेश माना जा रहा है।
30 मई 2024 को देवभोग थाना क्षेत्र में नियमित गश्त के दौरान पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली कि ओडिशा की ओर से गांजा तस्करी की जा रही है। सूचना को गंभीरता से लेते हुए पुलिस ने तत्काल नाकेबंदी कर दी और आने-जाने वाले वाहनों की सघन जांच शुरू की।
इसी दौरान ओडिशा के जुनागढ़ की दिशा से आ रही एक लाल रंग की मोटरसाइकिल को संदेह के आधार पर रोका गया। तलाशी लेने पर बाइक में रखी एक सफेद बोरी से करीब 22 किलोग्राम गांजा बरामद हुआ। मौके पर ही पुलिस ने दोनों संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ की।
कौन थे आरोपी
पूछताछ में आरोपियों ने अपनी पहचान आसुतोष मेहेर और क्षिरोद मेहेर के रूप में बताई। दोनों ओडिशा के निवासी बताए गए। उनके पास गांजा ले जाने से संबंधित कोई वैध दस्तावेज या अनुमति नहीं थी, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि वे अवैध तस्करी में संलिप्त थे।
जांच और सबूत
पुलिस ने जब्त किए गए गांजे के नमूने को विधिवत सील कर फॉरेंसिक जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा। जांच रिपोर्ट में पुष्टि हुई कि बरामद पदार्थ गांजा ही था। इसके बाद पुलिस ने एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज कर चार्जशीट अदालत में पेश की।
अभियोजन पक्ष की ओर से विशेष लोक अभियोजक स्वाति शर्मा ने अदालत में ठोस साक्ष्य और गवाह पेश किए। पुलिस की कार्रवाई, जब्ती पंचनामा, फॉरेंसिक रिपोर्ट और अन्य दस्तावेजों को अदालत ने पर्याप्त और विश्वसनीय माना।
अदालत का फैसला
मामले की सुनवाई के बाद विशेष एनडीपीएस न्यायाधीश शैलेश शर्मा ने दोनों आरोपियों को दोषी करार दिया। अदालत ने उन्हें 20-20 साल की सश्रम कैद और 2-2 लाख रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई।
साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया कि यदि आरोपी जुर्माना अदा नहीं करते हैं, तो उन्हें अतिरिक्त 6-6 महीने की सजा भुगतनी होगी।
महत्वपूर्ण फैसले
यह फैसला क्षेत्र में मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ एक कड़ा संदेश देता है। अदालत ने यह स्पष्ट किया कि युवाओं और समाज को नशे की गिरफ्त से बचाने के लिए ऐसे अपराधों पर सख्त कार्रवाई जरूरी है। पुलिस और अभियोजन की सतर्कता तथा प्रभावी कार्रवाई के कारण यह मामला मजबूत बना और दोषियों को कड़ी सजा मिल सकी। इससे भविष्य में ऐसे अपराधों पर अंकुश लगाने में भी मदद मिलने की उम्मीद है।
