क्या आप सोच सकते हैं डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गेनाइजेशन ( डीआरडीओ) के जीवन में लड़ाकू विमानों के अलावा गीत संगीत के लिए भी जगह होती है? जी हां। राजिम में हुए एलुमिनी मीट में ऐसा ही कुछ नजारा देखने को मिला। दरअसल, प्रेम रतन मैरिज पैलेस में हरिहर उच्चतर माध्यमिक विद्यालय ( अब सेजेस) के 1996 के छात्रों का मिलन कार्यक्रम आयोजित किया गया था। जिसे गुरु शिष्य मिलन नाम दिया गया। इस कार्यक्रम में पूर्व छात्र परिवार समेत पहुंचे थे।
सांस्कृतिक कार्यक्रम की शृंखला में पूर्व छात्रों के अलावा पत्नी व उनके बच्चों ने भी प्रस्तुतियां दी। इसी कड़ी में प्रकाश यदु जो डीईआरडीओ में वरिष्ठ वैज्ञानिक हैं, उन्होंने पत्नी नम्रता यदु संग ऐसा गीत गाया कि मौजूद सभी हैरत में पड़ गए। उन्होंने गाया तुमसे मिलके, ऐसा लगा तुमसे मिलके। अरमां हुए पूरे दिल के। बता दें कि प्रकाश यदु राजिम के रहने वाले हैं और वे साइकिल से हरिहर स्कूल पढ़ने आया करते थे। उनकी दो बेटियां हैं। बड़ी बिटिया ने भी नृत्य की प्रस्तुति दी जबकि पत्नी नम्रता ने सोलो सॉन्ग तूने ओ रंगीले कैसा जादू किया गाकर वाहवाही लूटी।
दोस्ती की अनोखी परिभाषा ने जीता दिल
रायपुर में पदस्थ छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड ( सीएसपीडीसीएल) के एग्जिक्यूटिव इंजीनियर शिव गुप्ता ने दोस्ती को नए अंदाज में पेश किया। उन्होंने कहा कि दोस्ती का अर्थ हर व्यक्ति अपने अनुभव और भावनाओं के अनुसार अलग-अलग तरीके से समझाता है। मेरे हिसाब से दोस्ती का मतलब खुद “दोस्ती” शब्द में ही छुपा है। अगर इस शब्द को अलग करें, तो इसमें “दो” और “हस्ती” दिखाई देती है। यानी दो हस्तियों का ऐसा मिलन,जहां दोनों अपनी-अपनी सीमाएं, अहं और भेद भूलकर एक हो जाते हैं। वही संबंध दोस्ती कहलाता है। उन्होंने कहा कि हमारे जीवन में कई रिश्ते होते हैं। कुछ खून के रिश्ते होते हैं, कुछ परिवार, गांव, समाज, धर्म या विवाह जैसे सामाजिक बंधनों से जुड़े होते हैं। लेकिन दोस्ती एक ऐसा रिश्ता है, जो इन सभी सीमाओं से परे होता है। यह न रूप देखता है, न रंग, न जाति, न धर्म, न अमीरी-गरीबी और न ही किसी तरह का भेदभाव। दोस्ती सिर्फ दिलों का संबंध होती है।
यह ऐसा बंधन है, जो एक बार सच्चाई से जुड़ जाए तो जीवन की अंतिम सांस तक साथ निभाता है। कभी-कभी तो ऐसा महसूस होता है कि कुछ दोस्तियों का रिश्ता इस जन्म से भी आगे का होता है, जैसे कोई अधूरा अपनापन पहले से जुड़ा हो। मेरे अनुसार, दोस्ती वही है जहां दो हस्तियां अपने “मैं” को मिटाकर “हम” बन जाती हैं। जहां अपनापन, विश्वास, त्याग और साथ निभाने की भावना हो, वही सच्ची दोस्ती है। और उस रिश्ते को पूरी ईमानदारी से निभाना ही असली दोस्ती कहलाती है।
जब ताबीर बने पोपटलाल
कार्यक्रम में उस वक्त हास्य रंग घुल गया जब एंकरिंग कर रहे विवेक झाबक ने पत्रकार ताबीर हुसैन को पोपटलाल से संबोधित किया। सभी साथी परिवार समेत थे जबकि ताबीर ने मंच पर अकेले ही परिचय दिया। एंकरिंग कर रहे गजेंद्र साहू ने उनके परिचय में बताया कि ताबीर ने बुढ़िया का बाल बेचते हुए अपनी पढ़ाई की और आज रायपुर में एक नामी अखबार में सीनियर रिपोर्टर हैं। उनका संघर्ष आज की पीढ़ी के लिए सीख लेने वाला है। वे पत्रकार के अलावा अभिनेता भी हैं।
उन्होंने छत्तीसगढ़ी फिल्म टीना टप्पर में अहम भूमिका निभाई। इसी साल अगस्त में उनकी एक और फिल्म आएं बाएं साएं आने वाली है जिसका निर्देशन प्रणव झा ने किया है। ताबीर ने मंच पर संक्षिप्त लेकिन हास्य रंग से लबरेज परिचय दिया। उन्होंने कहा कि मैं आपको तब तक इसी तरह अकेले दिखूंगा जब तक राहुल बाबा प्रधानमंत्री नहीं बन जाते। उनकी इस बात से कार्यक्रम हॉल ठहाकों से गुंज उठा।
