छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से सटे आरंग इलाके में मानवता को शर्मसार करने वाले एक मामले में अदालत ने त्वरित और ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। विशेष पॉक्सो कोर्ट ने महज 4 साल की मासूम चचेरी बहन को अपनी हवस का शिकार बनाने वाले 23 वर्षीय कलयुगी भाई को दोषी करार देते हुए 20 साल की सश्रम कारावास की सजा सुनाई है।
यह फैसला अपर सत्र न्यायाधीश (चतुर्थ फास्ट ट्रैक विशेष न्यायाधीश, पॉक्सो) गिरीश कुमार मंडावी की अदालत द्वारा सुनाया गया। कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि ऐसे जघन्य अपराध समाज के लिए कलंक हैं और अपराधियों में कानून का खौफ होना जरूरी है।
करौंदा खिलाने के बहाने ले गया था आरोपी
अभियोजन पक्ष द्वारा कोर्ट में दी गई जानकारी के अनुसार, यह दिल दहला देने वाली घटना 27 जुलाई 2025 की है। दोपहर करीब 1:30 बजे आरोपी अपनी ही 4 साल की मासूम चचेरी बहन को बहला-फुसलाकर और 'करौंदा' खिलाने के बहाने अपने साथ सुनसान जगह पर ले गया।
वह मासूम को घर के ही एक रसोईघर (खाना बनाने वाले कमरे) में ले गया, जहां उसने बच्ची की बेबसी का फायदा उठाते हुए उसके साथ दुष्कर्म जैसी हैवानियत को अंजाम दिया।
मासूम के रोने पर खुला खौफनाक राज
पुलिस की त्वरित कार्रवाई और पुख्ता सबूत
शिकायत मिलते ही आरंग थाना पुलिस ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए तुरंत धारा और पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। जांच के दौरान पुलिस ने:
पीड़िता और उसकी मां के विस्तृत बयान दर्ज किए।
घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए और बच्ची के पहने हुए कपड़े जब्त किए।
पीड़िता का तत्काल मेडिकल परीक्षण कराया गया, जिसमें दुष्कर्म की पुष्टि हुई।
कोर्ट ने साक्ष्यों के आधार पर सुनाया फैसला
मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में चली। अभियोजन पक्ष ने अदालत के सामने अकाट्य वैज्ञानिक साक्ष्य, मेडिकल रिपोर्ट और गवाहों के बयान पेश किए। बचाव पक्ष की तमाम दलीलों को खारिज करते हुए, माननीय न्यायाधीश गिरीश कुमार मंडावी की अदालत ने आरोपी को कृत्य का मुख्य दोषी पाया और उसे 20 साल की कैद के साथ-साथ आर्थिक दंड की भी सजा सुनाई।
इस फैसले के बाद पीड़िता के परिवार ने राहत की सांस ली है और क्षेत्र के लोगों ने न्यायपालिका के इस त्वरित निर्णय का स्वागत किया है।
