झलप में कपड़ा व्यवसायी के घर में घुसकर उनके बेटे पर जानलेवा हमला करने वाले आरोपी रामेश्वर सोनवानी की जेल की सजा को सत्र न्यायालय ने कम कर दिया है। सत्र न्यायाधीश अनिता डहरिया की अदालत ने आरोपी की दोषसिद्धि को सही माना, लेकिन उसकी कम उम्र और पूर्व में कोई आपराधिक रिकॉर्ड न होने के कारण सजा को घटाकर उसके द्वारा जेल में बिताई गई 15 महीने की अवधि में बदल दिया है। विचारण न्यायालय (जेएमएफसी) ने पूर्व में आरोपी को 3 वर्ष के कठोर कारावास और ₹4,000 अर्थदंड की सजा सुनाई थी, जिसके खिलाफ आरोपी ने सत्र न्यायालय में अपील दायर की थी।
सुबह-सुबह छत के रास्ते घुसा था आरोपी
अभियोजन के अनुसार, घटना 15 जनवरी 2025 की सुबह की है। झलप निवासी अमित क्लॉथ स्टोर्स के संचालक महावीर गोयल हमेशा की तरह सुबह 5 बजे मुख्य दरवाजे पर ताला लगाकर मॉर्निंग वॉक पर गए थे। घर में उनका बेटा सौरभ गोयल और पत्नी संजू गोयल सो रहे थे। इसी बीच लामीडीह निवासी आरोपी रामेश्वर सोनवानी (24 वर्ष) चोरी की नीयत से छत के सहारे घर के हॉल में घुस गया।
पकड़ा गया तो कटर से किए ताबड़तोड़ वार
हॉल में सो रहे सौरभ गोयल की जब आंख खुली, तो उसने आरोपी को देखा। सौरभ के चिल्लाने पर उसकी मां भी कमरे से बाहर आ गई और 'चोर-चोर' की आवाज लगाते हुए बाहर भागी। इसी बीच जांबाज सौरभ ने भाग रहे चोर को दबोच लिया। खुद को फंसता देख आरोपी ने अपने पास रखे रेडियम कटर से सौरभ के दोनों हाथों पर लगातार कई वार कर दिए और लहूलुहान कर वहां से भाग निकला। हमले में सौरभ के दाएं हाथ में 22 टांके और बाएं हाथ में 25 टांके आए थे।
4 साल पहले दुकान में करता था काम
पटेवा पुलिस ने जब मामले की जांच शुरू की और आरोपी रामेश्वर को गिरफ्तार किया, तो चौंकाने वाला खुलासा हुआ। आरोपी रामेश्वर 4-5 साल पहले गोयल परिवार की ही कपड़ा दुकान में काम करता था। नायब तहसीलदार तृप्ति चन्द्राकर की मौजूदगी में हुई शिनाख्त परेड में पीड़ित सौरभ ने आरोपी को तुरंत पहचान लिया। पुलिस ने आरोपी के पास से घटना के समय पहनी गई जैकेट और मौका-ए-वारदात से कटर भी बरामद किया था।
कोर्ट का आदेश: सजा कम की, अर्थदंड भी घटाया
सत्र न्यायालय ने अपने फैसले में कहा कि आरोपी का कृत्य अवैध प्रवेश और आपराधिक नीयत को साबित करता है। हालांकि, आरोपी 23 जनवरी 2025 से लगातार जेल में बंद है और लगभग 15 महीने की सजा काट चुका है। अपराध की प्रकृति और परिस्थितियों को देखते हुए कोर्ट ने जेल की सजा को अब तक काटी गई अवधि (15 माह) तक सीमित कर दिया और चारों धाराओं के तहत लगाए गए कुल ₹4,000 के जुर्माने को घटाकर ₹1,000 (₹250-₹250) कर दिया है। जुर्माना राशि जमा करने के बाद आरोपी को जेल से रिहा कर दिया जाएगा।
