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प्रेमानंद महाराज : समय की नहीं, मन की कमी है-नामजप से बदल सकता है जीवन

वृंदावन के संत प्रेमानंद महाराज ने सत्संग में कहा कि नामजप और भक्ति के लिए समय की कमी नहीं, बल्कि मन और प्राथमिकताओं की समस्या होती है। उन्होंने बताया कि लोग मनोरंजन और मोबाइल के लिए समय निकाल लेते हैं, लेकिन भक्ति को टालते हैं। उनके अनुसार, यदि दिनचर्या में नियमित रूप से नामजप किया जाए तो मन को शांति मिलती है, नकारात्मक विचार कम होते हैं और जीवन में सकारात्मकता, संतुलन तथा आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है।

कीर्तिमान डेस्क
प्रकाशित: 28 Apr 2026, 01:04 PM · अपडेट: 14 Sep 2026, 10:24 PM
वृंदावन
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश
वृंदावन में प्रसिद्ध संत प्रेमानंद महाराज ने भक्ति और नामजप को लेकर लोगों की सोच पर तीखी लेकिन सार्थक टिप्पणी की है । उन्होंने कहा कि “हम लोग बेईमान हैं, क्योंकि भजन के लिए समय होने के बावजूद हम बहाने बनाते हैं।” उनके इस  कथन से श्रद्धालुओं और आध्यात्मिक जगत में गहन चर्चा को जन्म दिया है ।
सत्संग के दौरान एक भक्त ने सवाल उठाया कि पारिवारिक जिम्मेदारियों और व्यस्त जीवन के बीच नामजप कैसे संभव है । इस पर महाराज जी ने सीधे शब्दों में कहा, “राधा-राधा कहने में आखिर परेशानी क्या है ? समस्या समय की नहीं, मन की है ।” उन्होंने कहा कि आज का व्यक्ति खाली समय में मोबाइल और मनोरंजन में व्यस्त रहता है, लेकिन भक्ति के लिए समय निकालने से बचता है ।

व्यस्थता में भजन

प्रेमानंद महाराज ने जीवन का एक सरल गणित समझाते हुए बताया कि एक व्यक्ति अधिकतम 12 घंटे काम करता है, लगभग 6 घंटे सोता है, 2 घंटे भोजन में और 1 घंटा मनोरंजन में व्यतीत करता है। इसके बावजूद दिन में करीब 3 घंटे ऐसे बचते हैं, जिन्हें भक्ति और नामजप के लिए समर्पित किया जा सकता है। उन्होंने कहा, “अगर इन तीन घंटों में सच्चे मन से भजन कर लिया जाए, तो त्रिलोक के स्वामी को प्रसन्न किया जा सकता है।” उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि “जिसने किया, उसी ने पाया। 
बिना साधना के कोई भी आध्यात्मिक उन्नति संभव नहीं है ।” गृहस्थ जीवन को भक्ति में बाधा बनने वाली सोच को उन्होंने पूरी तरह गलत बताया और इसे केवल मन का बहाना कहा।

नाम जपने के महत्त्व 

नामजप की महत्ता पर जोर देते हुए महाराज ने कहा कि जैसे दवा के बिना रोग ठीक नहीं होता, उसी प्रकार ईश्वर के नाम के बिना जीवन की परेशानियां दूर नहीं हो सकतीं। उनके अनुसार ईश्वर का नाम ही वह शक्ति है, जो मनुष्य के जीवन में संतुलन, शांति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता  है। अपने संदेश के माध्यम से उन्होंने यह स्पष्ट किया कि समस्या समय की कमी नहीं, बल्कि प्राथमिकताओं का विषय है । यदि व्यक्ति सच्चे मन से प्रयास करे, तो वह अपनी दिनचर्या में भक्ति को सहज रूप से शामिल कर सकता है।

नाम जपने के फायदे 

प्रेमानंद महाराज के अनुसार नामजप (भगवान का नाम स्मरण) केवल धार्मिक क्रिया नहीं, बल्कि जीवन को बदलने वाली साधना है। उन्होंने इसके कई गहरे और व्यावहारिक लाभ बताए गए हैं:
  • मन को शांति और स्थिरता  महाराज जी कहते हैं कि नामजप से मन भटकना नहीं है। चिंता, तनाव और अशांति धीरे-धीरे कम होता है , मन शांत और संतुलित हो जाता है।
  • जीवन की परेशानियों में कमी उनका स्पष्ट कहना है कि जैसे दवा बिना रोग ठीक नहीं होता, वैसे ही भगवान के नाम के बिना जीवन की समस्याएं दूर नहीं होतीं। नामजप आंतरिक शक्ति देता है, जिससे व्यक्ति कठिन परिस्थितियों का सामना कर पाता है।
  • सकारात्मक ऊर्जा और सोच विकसित  नियमित नामजप से नकारात्मक विचार कम होते हैं और व्यक्ति के अंदर सकारात्मकता, धैर्य और सहनशीलता बढ़ती है।
  • भगवान से सीधा संबंध  महाराज जी के अनुसार नाम ही भगवान का स्वरूप है। जब व्यक्ति नाम जपता है, तो वह सीधे ईश्वर से जुड़ता है और उनकी कृपा प्राप्त करता है।
  • अहंकार और विकार का नाश  काम, क्रोध, लोभ जैसे विकार धीरे-धीरे कमजोर पड़ते हैं । नामजप व्यक्ति को विनम्र और सरल बनाता है ।
  • गृहस्थ जीवन में भी संतुलन  उन्होंने बताया कि नामजप केवल साधु-संतों के लिए नहीं, बल्कि गृहस्थों के लिए भी जरूरी है। इससे परिवार, काम और मानसिक स्थिति के बीच संतुलन बना रहता है।
  • आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग “जिसने किया, उसने पाया” इस कथन के जरिए महाराज जी बताते हैं कि नियमित नामजप से आत्मिक विकास होता है और व्यक्ति धीरे-धीरे ईश्वर के करीब पहुंचता है। प्रेमानंद महाराज के अनुसार नामजप जीवन की हर समस्या का सरल और प्रभावी समाधान है। यह मन, व्यवहार और भाग्य—तीनों को सकारात्मक दिशा में बदलने की शक्ति रखता है।
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