छत्तीसगढ़ में माध्यमिक शिक्षा मंडल द्वारा आयोजित 12वीं बोर्ड की परीक्षा शुरू होने से पहले ही राज्य की शिक्षा व्यवस्था को हिला देने वाला एक बड़ा मामला सामने आया है। परीक्षा शुरू होने से पहले ही छात्रों के मोबाइल पर हिंदी का हस्तलिखित (Handwritten) प्रश्नपत्र व्हाट्सएप के जरिए धड़ल्ले से तैर रहा था। जैसे ही यह बात उजागर हुई, पूरे शिक्षा जगत और प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया।
इस संवेदनशील मामले पर त्वरित एक्शन लेते हुए रायपुर पुलिस ने एक बड़े रैकेट का पर्दाफाश किया है और एक शारीरिक शिक्षा (PTI) शिक्षक सहित तीन आरोपियों को सलाखों के पीछे भेज दिया है।
कमिश्नर के निर्देशन में बनी स्पेशल टीम
पेपर लीक की प्रामाणिक जानकारी मिलने के बाद 17 मार्च 2026 को रायपुर के थाना सिटी कोतवाली में अपराध क्रमांक 130/26 दर्ज किया गया। मामले की गंभीरता और छात्रों के भविष्य को देखते हुए पुलिस कमिश्नर संजीव शुक्ला ने तुरंत मोर्चा संभाला। उनके साथ पुलिस उपायुक्त (मध्य जोन) उमेश प्रसाद गुप्ता, अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त तारकेश्वर पटेल और सहायक पुलिस आयुक्त दीपक मिश्रा के कड़े निर्देशन में एक विशेष जांच टीम (SIT) का गठन किया गया।
पुलिस टीम ने व्हाट्सएप पर वायरल हो रहे उस हस्तलिखित पर्चे के डिजिटल फुटप्रिंट्स का पीछा करना शुरू किया। जांच टीम ने छत्तीसगढ़ के अलग-अलग शहरों और सुदूर गांवों में पहुंचकर संदिग्धों और छात्रों से कड़ी पूछताछ की, जिसके बाद इस गिरोह के तार एक-दूसरे से जुड़ते चले गए।
सौदा और ऑनलाइन ट्रांजैक्शन से खुला राज
पुलिस जांच में सबसे पहला और बड़ा सुराग वेणु कुमार जंघेल के रूप में मिला। पूछताछ में सामने आया कि वेणु ने 12वीं के एक छात्र को परीक्षा से पहले ही व्हाट्सएप पर हिंदी का हूबहू हस्तलिखित पेपर भेज दिया था। इस अवैध सौदे के बदले आरोपी ने छात्र से ₹3,000 की रकम ऑनलाइन ट्रांसफर करवाई थी। पुलिस ने आरोपी के बैंक खाते की बारीकी से जांच कर इस डिजिटल लेन-देन की पुष्टि कर ली, जो कि कोर्ट में एक पुख्ता सबूत बनेगा।
सरकारी धाराओं का शिकंजा: पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ छत्तीसगढ़ सार्वजनिक परीक्षा अधिनियम 2008 की धारा 4, 5, 10 के साथ-साथ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 112 और 316 के तहत मुकदमा दर्ज किया है।
मास्टरमाइंड निकला खुद शिक्षक
जब मुख्य आरोपी वेणु कुमार से पुलिसिया अंदाज में कड़ाई से पूछताछ की गई, तो उसने पूरे नेटवर्क का उगल दिया। उसकी निशानदेही पर पुलिस ने विकास सेन और अंततः इस पूरे खेल के मास्टरमाइंड जवाहर लाल कुर्रे को हिरासत में लिया।
चौंकाने वाला खुलासा यह हुआ कि जवाहर लाल कुर्रे खुद एक सरकारी जिम्मेदार पद पर है। वह हायर सेकेंडरी स्कूल ग्राम बोरतरा (जिला बेमेतरा) में पीटीआई (PTI) शिक्षक के पद पर पदस्थ है। उसी ने परीक्षा की गोपनीयता भंग करते हुए यह हस्तलिखित प्रश्नपत्र वेणु जंघेल और विकास सेन को लीक किया था, जिसे आगे छात्रों को पैसों के लिए बेचा गया। आरोपी शिक्षक ने पुलिस के सामने अपना जुर्म कबूल कर लिया है।
गिरफ्तार आरोपियों की कुंडली:
| आरोपी का नाम | उम्र / पिता का नाम | स्थायी व वर्तमान पता |
| 1. वेणु कुमार जंघेल | 19 वर्ष / हरीश चंद्र जंघेल | ग्राम बोरतरा (साजा, बेमेतरा); हाल मुकाम: लक्ष्मी चौक, गोकुल नगर, गुढ़ियारी (रायपुर) |
| 2. जवाहर लाल कुर्रे (PTI) | 40 वर्ष / स्व. उदयराम कुर्रे | ग्राम बीजा, ब्लॉक साजा (जिला बेमेतरा) |
| 3. विकास सेन | 22 वर्ष / संतोष सेन | ग्राम बोरतरा, ब्लॉक साजा (जिला बेमेतरा) |
किस स्तर से बाहर आया पेपर?
हालांकि पुलिस ने पेपर बेचने वाले गिरोह को तो दबोच लिया है, लेकिन रायपुर पुलिस अभी इस मामले को यहीं बंद नहीं कर रही है। पुलिस अब इस बात की गहराई से तफ्तीश कर रही है कि आखिर सीलबंद प्रश्नपत्र सबसे पहले किस स्तर (स्ट्रॉन्ग रूम, परीक्षा केंद्र या प्रिटिंग प्रेस) से बाहर आया और इसमें शिक्षा विभाग के किसी अन्य अधिकारी या कर्मचारी की मिलीभगत है या नहीं।
बहरहाल, इस पेपर लीक कांड ने एक बार फिर यह कड़वी सच्चाई सामने ला दी है कि चंद पैसों के लालच में कुछ सफेदपोश लोग लाखों छात्रों के भविष्य और उनकी सालभर की मेहनत से खिलवाड़ करने से बाज नहीं आ रहे हैं। लेकिन रायपुर पुलिस की इस त्वरित और सख्त कार्रवाई ने साफ संदेश दे दिया है कि शिक्षा व्यवस्था में सेंध लगाने वालों और युवाओं के भविष्य से सौदा करने वालों की सही जगह सिर्फ और सिर्फ जेल है।
