मध्य प्रदेश के अशोक नगर जिला अस्पताल में उस समय अफरा-तफरी का माहौल बन गया जब राज्य के मंत्री राकेश शुक्ला अचानक औचक निरीक्षण के लिए पहुंच गए। अस्पताल में पहले से ही अव्यवस्थाओं का आलम था, लेकिन जैसे ही मंत्री के आने की सूचना फैली, पूरे प्रशासनिक तंत्र में हड़कंप मच गया। अधिकारी और कर्मचारी तुरंत सतर्क हो गए और व्यवस्था सुधारने की कोशिशों में जुट गए। लंबे समय से चल रही लापरवाही और बदहाल स्थिति अब खुलने के डर से सभी परेशान दिखाई दिए।
सफाई छुपाने के लिए खुशबूदार स्प्रे का सहारा
मंत्री के आगमन से पहले ही अस्पताल स्टाफ ने स्थिति को सामान्य दिखाने की कोशिश शुरू कर दी। जिन रास्तों और वार्डों में मंत्री के जाने की संभावना थी, वहां तेजी से खुशबूदार स्प्रे का छिड़काव किया गया। स्ट्रेचर से लेकर गलियारों तक परफ्यूम और फ्रेशनर का इस्तेमाल किया गया ताकि बदबू और गंदगी का असर कम किया जा सके। स्टाफ की यह कोशिश इस बात को दर्शा रही थी कि वास्तविक स्थिति को छुपाने के लिए केवल दिखावे की सफाई की जा रही थी, न कि स्थायी सुधार की दिशा में कोई कदम उठाया जा रहा था।
मरीजों से बातचीत में सामने आई हकीकत
जब मंत्री राकेश शुक्ला ने वार्डों का दौरा किया और मरीजों से सीधे बातचीत की, तो अस्पताल की वास्तविक स्थिति सामने आने लगी। कई मरीजों ने बताया कि एक ही बेड पर दो-दो लोगों को रखा जा रहा है, जिससे असुविधा बढ़ रही है। तीमारदारों ने भी शिकायत की कि भीषण गर्मी में न तो पर्याप्त कूलर हैं और न ही पंखे ठीक से काम कर रहे हैं। इसके अलावा, सफाई व्यवस्था भी बेहद खराब है, जिसके कारण कई जगहों पर दुर्गंध फैल रही है। मरीजों की इन शिकायतों ने पूरे सिस्टम की पोल खोल दी।
मंत्री की सख्त चेतावनी और कार्रवाई का आश्वासन
स्थिति का जायजा लेने के बाद मंत्री राकेश शुक्ला ने जिम्मेदार अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि अस्पताल में साफ-सफाई और मूलभूत सुविधाओं को तुरंत दुरुस्त किया जाए। मंत्री ने यह भी कहा कि भविष्य में यदि इस तरह की लापरवाही की शिकायत मिली तो संबंधित अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। यह घटना 8 मई की बताई जा रही है, जिसका वीडियो अब सामने आने के बाद प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं।
