जिले के ग्रामीण अंचलों में सक्रिय मवेशी तस्करों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई सामने आई है। पाली थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम भदरापारा के जंगलों में पुलिस और ग्रामीणों की संयुक्त सतर्कता से गोवंश तस्करी के एक बड़े मामले का पर्दाफाश हुआ है।
जंगल के भीतर पेड़ों से रस्सियों के सहारे बांधकर रखे गए 28 कीमती बैलों को तस्करों के चंगुल से मुक्त कराया गया। बताया जा रहा है कि इन मवेशियों को कई घंटों तक बिना चारा और पानी के भीषण गर्मी में रखा गया था। प्रारंभिक आशंका है कि इन्हें अवैध रूप से दूसरे राज्यों के कत्लखानों तक पहुंचाने की तैयारी चल रही थी। पाली थाना में दर्ज अपराध क्रमांक 14/2026 के अनुसार पाली टावर मोहल्ला निवासी विजय नेताम (23 वर्ष), जो सेवा तहसील प्रचारक के रूप में कार्यरत हैं, को 14 मई 2026 को ग्राम बतरा के आश्रित ग्राम भदरापारा के ग्रामीणों से संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी मिली।
ग्रामीणों ने बताया कि जंगल के भीतर कुछ बाहरी लोग बड़ी संख्या में मवेशियों को इकट्ठा कर छिपाकर रखे हुए हैं। सूचना मिलते ही विजय नेताम ने अन्य ग्रामीणों और सहयोगियों के साथ मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया।
ग्रामीणों को देखकर भागे तस्कर, पांच आरोपी पकड़े गए
जंगल में ग्रामीणों की भारी भीड़ पहुंचते ही वहां मौजूद कई संदिग्ध तस्कर मौके से फरार हो गए। हालांकि मुख्य आरोपी रहमद खान समेत चार अन्य लोगों को ग्रामीणों की मदद से पकड़ लिया गया।प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक जंगल का दृश्य बेहद दर्दनाक था। तस्करों ने 28 बैलों को अलग-अलग पेड़ों से कसकर बांध रखा था। गर्मी और प्यास से बेहाल मवेशी तड़प रहे थे। मौके पर न तो चारे की कोई व्यवस्था थी और न ही पानी की। ग्रामीणों ने तुरंत मवेशियों को राहत पहुंचाई और पुलिस को सूचना दी। पुलिस के अनुसार बरामद किए गए सभी बैलों की अनुमानित कीमत करीब 84 हजार रुपये आंकी गई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए पाली पुलिस ने शिकायतकर्ता विजय नेताम की लिखित रिपोर्ट पर तत्काल कार्रवाई करते हुए आरोपियों के खिलाफ छत्तीसगढ़ कृषक पशु परिरक्षण अधिनियम 2004 की धारा 4, 6 और 10 के साथ-साथ पशु क्रूरता निवारण अधिनियम के तहत अपराध दर्ज किया है। पुलिस ने कुछ आरोपियों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है, जबकि फरार तस्करों की तलाश जारी है।अंतरराज्यीय गिरोह से जुड़े हो सकते हैं तार
पूरे मामले में पुलिस को बड़े नेटवर्क की आशंका है। ग्रामीणों से पूछताछ के दौरान मुख्य आरोपी का नाम रहमद खान सामने आया। पुलिस को संदेह है कि यह गिरोह ग्रामीण इलाकों से किसानों के मवेशियों को सस्ते दामों में खरीदकर या चोरी कर जंगलों के रास्ते दूसरे राज्यों तक पहुंचाने का काम करता है। जांच एजेंसियां अब इस बात की पड़ताल कर रही हैं कि कहीं इस गिरोह के तार अंतरराज्यीय मवेशी तस्करी नेटवर्क से तो नहीं जुड़े हैं।
घटना के बाद एक और गंभीर पहलू सामने आया है। मवेशी तस्करी का खुलासा करने वाले स्थानीय युवाओं और ग्रामीणों को सोशल मीडिया पर निशाना बनाया जा रहा है। आरोप है कि मुख्य आरोपी के परिजन और समर्थक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर ग्रामीणों को गाली-गलौच कर रहे हैं और खुली धमकियां दे रहे हैं। इससे क्षेत्र के लोगों में भय और असुरक्षा का माहौल बन गया है।

