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मोबाइल, लैपटॉप और लंबे स्क्रीन टाइम की वजह से ड्राई आई सिंड्रोम
मोबाइल, लैपटॉप और लंबे स्क्रीन टाइम की वजह से ड्राई आई सिंड्रोम
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मोबाइल-लैपटॉप :  बढ़ाई आंखों की परेशानी, तेजी से फैल रहा ड्राई आई सिंड्रोम

मोबाइल, लैपटॉप और लंबे स्क्रीन टाइम की वजह से ‘ड्राई आई सिंड्रोम’ के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। आंखों में जलन, खुजली, भारीपन और धुंधलापन इसके प्रमुख लक्षण हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक समय पर सावधानी और स्क्रीन टाइम नियंत्रित करके आंखों को इस समस्या से बचाया जा सकता है।

कीर्तिमान नेटवर्क
15 May 2026, 11:49 AM
📍 नई दिल्ली
आज की डिजिटल दुनिया में सुबह उठते ही मोबाइल स्क्रीन और रात को सोने से पहले लैपटॉप या टीवी देखना लोगों की दिनचर्या का हिस्सा बन चुका है। ऑफिस का काम हो, ऑनलाइन पढ़ाई, सोशल मीडिया, गेमिंग या मनोरंजन—हर चीज स्क्रीन पर निर्भर हो गई है। लेकिन इस बदलती लाइफस्टाइल का सबसे बड़ा असर अब आंखों पर दिखाई देने लगा है। आंखों में जलन, भारीपन, खुजली, लालिमा, धुंधलापन या लगातार थकान महसूस होना अब आम शिकायत बनती जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि ये सिर्फ सामान्य थकान नहीं, बल्कि ‘ड्राई आई सिंड्रोम’ के संकेत हो सकते हैं।
नेत्र रोग विशेषज्ञों के मुताबिक पिछले कुछ वर्षों में ड्राई आई के मरीज तेजी से बढ़े हैं। पहले यह समस्या बढ़ती उम्र या कुछ विशेष बीमारियों से जुड़ी मानी जाती थी, लेकिन अब कम उम्र के बच्चे, कॉलेज छात्र, आईटी प्रोफेशनल्स और लंबे समय तक स्क्रीन पर काम करने वाले युवा भी इसकी चपेट में आ रहे हैं। रिसर्च बताती है कि लगातार स्क्रीन देखने से आंखों की प्राकृतिक नमी प्रभावित होती है और धीरे-धीरे आंखों की सतह सूखने लगती है। यदि समय रहते ध्यान न दिया जाए, तो यह समस्या देखने की क्षमता और आंखों की गुणवत्ता दोनों को प्रभावित कर सकती है।

ड्राई आई सिंड्रोम क्या है 

ड्राई आई सिंड्रोम एक ऐसी स्थिति है, जिसमें आंखें पर्याप्त मात्रा में आंसू नहीं बना पातीं या आंसुओं की गुणवत्ता खराब होने के कारण वे जल्दी सूख जाते हैं। आमतौर पर लोग सोचते हैं कि आंसू सिर्फ भावनाओं से जुड़े होते हैं, लेकिन वास्तव में आंखों को स्वस्थ रखने में इनकी बेहद महत्वपूर्ण भूमिका होती है। आंखों की सतह पर मौजूद आंसुओं की परत तीन हिस्सों—तेल, पानी और श्लेष्मा—से मिलकर बनी होती है। ये तीनों परतें आंखों को नम बनाए रखने, धूल-कण हटाने, संक्रमण से बचाने और साफ दृष्टि बनाए रखने में मदद करती हैं। जब इन परतों में से किसी एक में भी गड़बड़ी आती है, तब आंखों की सतह अस्थिर हो जाती है और सूखापन शुरू हो जाता है।मायो क्लिनिक के अनुसार ड्राई आई की समस्या तब ज्यादा गंभीर हो जाती है, जब आंखों की सतह लगातार सूखी रहने लगती है और सूजन बढ़ने लगती है। इससे आंखों की कोशिकाएं प्रभावित हो सकती हैं और लंबे समय में कॉर्निया को भी नुकसान पहुंच सकता है।

डिजिटल लाइफस्टाइल सबसे बड़ी वजह

विशेषज्ञों का कहना है कि आधुनिक जीवनशैली ड्राई आई के मामलों में बढ़ोतरी का सबसे बड़ा कारण बन चुकी है। मोबाइल, लैपटॉप और टैबलेट पर घंटों बिताने से आंखों की प्राकृतिक प्रक्रिया प्रभावित होती है।सामान्य रूप से इंसान एक मिनट में लगभग 15 से 18 बार पलक झपकाता है। लेकिन स्क्रीन देखने के दौरान यह दर घटकर लगभग 5 से 6 बार प्रति मिनट तक पहुंच जाती है। जब पलकें कम झपकती हैं, तो आंखों की सतह पर मौजूद नमी तेजी से वाष्पित होने लगती है। परिणामस्वरूप आंखें सूखने लगती हैं। अमेरिकन एकेडमी ऑफ ऑप्थैल्मोलॉजी की रिपोर्ट के अनुसार लंबे समय तक स्क्रीन पर फोकस बनाए रखने से आंखों की मांसपेशियों पर भी दबाव बढ़ता है, जिससे आंखों में थकान और ड्राइनेस दोनों की समस्या पैदा होती है।

एयर कंडीशनर और प्रदूषण से  बढ़ा खतरा

सिर्फ स्क्रीन ही नहीं, बल्कि वातावरण भी आंखों की ड्राइनेस को बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभाता है। एयर कंडीशनर, कम नमी वाले कमरे, धूल, धुआं और प्रदूषण आंखों की नमी को तेजी से कम कर देते हैं। विशेषज्ञ बताते हैं कि एसी की सीधी हवा आंखों की सतह से नमी खींच लेती है। यही वजह है कि लंबे समय तक एयर कंडीशन्ड ऑफिस में काम करने वाले लोगों में ड्राई आई की शिकायत अधिक देखी जा रही है। इसके अलावा महानगरों और प्रदूषित इलाकों में रहने वाले लोगों में भी यह समस्या तेजी से बढ़ रही है। पश्चिमी देशों के साथ-साथ भारत में भी इस पर रिसर्च हुई है। पुणे में किए गए एक सर्वे में बड़ी संख्या में छात्रों, प्रोफेशनल्स और बुजुर्गों में ड्राई आई के लक्षण पाए गए। विशेषज्ञों ने इसका मुख्य कारण बढ़ता स्क्रीन टाइम और बदलती लाइफस्टाइल बताया। 

ड्राई आई के शुरुआती संकेत 

ड्राई आई की शुरुआत आमतौर पर हल्के लक्षणों से होती है। लोग इसे सामान्य थकान समझकर अनदेखा कर देते हैं, जबकि यही लक्षण आगे चलकर गंभीर परेशानी में बदल सकते हैं।

 सामान्य लक्षण

  •  आंखों में जलन या चुभन
  •  आंखों में खुजली
  •  भारीपन या थकान महसूस होना
  •  आंखों का लाल होना
  •  धुंधला दिखाई देना
  •  रोशनी से परेशानी होना
  •  आंखों में कुछ फंसा होने जैसा एहसास
  •  बार-बार पानी आना
  •  लंबे समय तक पढ़ने या स्क्रीन देखने में परेशानी
विशेषज्ञ बताते हैं कि कई बार आंखों से अधिक पानी आना भी ड्राई आई का संकेत हो सकता है। यह शरीर की रिफ्लेक्स प्रतिक्रिया होती है, लेकिन इससे आंखों को वास्तविक राहत नहीं मिलती। 

 किन लोगों में ज्यादा खतरा

डॉक्टरों के अनुसार कुछ लोग ड्राई आई के अधिक जोखिम में रहते हैं—
  •  आईटी और कॉर्पोरेट सेक्टर में काम करने वाले
  •  लंबे समय तक मोबाइल इस्तेमाल करने वाले युवा
  •  ऑनलाइन पढ़ाई करने वाले छात्र
  •  कॉन्टैक्ट लेंस उपयोगकर्ता
  •  50 वर्ष से अधिक उम्र के लोग
  •  महिलाएं, खासकर हार्मोनल बदलाव के दौरान
  •  प्रदूषण वाले क्षेत्रों में रहने वाले लोग
  •  लंबे समय तक एसी वातावरण में रहने वाले कर्मचारी

 ड्राई आई से नजर भी कमजोर हो सकती है

विशेषज्ञों का कहना है कि शुरुआती स्तर पर ड्राई आई सिर्फ असुविधा पैदा करती है, लेकिन लंबे समय तक इलाज न होने पर यह आंखों की सतह को नुकसान पहुंचा सकती है। लगातार सूखापन कॉर्निया पर असर डाल सकता है, जिससे धुंधलापन, संक्रमण और देखने में परेशानी बढ़ सकती है। हालांकि ड्राई आई सीधे स्थायी अंधापन का कारण नहीं बनती, लेकिन गंभीर मामलों में यह आंखों की गुणवत्ता और दैनिक जीवन को काफी प्रभावित कर सकती है।

 आंखों को सुरक्षित रखने के लिए क्या करें

1. अपनाएं 20-20-20 नियम

नेत्र विशेषज्ञ स्क्रीन पर काम करने वाले लोगों को 20-20-20 नियम अपनाने की सलाह देते हैं। यानी हर 20 मिनट बाद 20 फीट दूर किसी वस्तु को कम से कम 20 सेकंड तक देखें। इससे आंखों की मांसपेशियों को आराम मिलता है। 

2. पलक झपकाने की आदत बढ़ाएं

 स्क्रीन देखते समय लोग अनजाने में कम पलक झपकाते हैं। इसलिए बीच-बीच में जानबूझकर आंखें बंद करना और पलकें झपकाना फायदेमंद होता है।

3. स्क्रीन की ब्राइटनेस नियंत्रित रखें

बहुत ज्यादा तेज रोशनी या ग्लेयर आंखों पर अतिरिक्त दबाव डालता है। एंटी-ग्लेयर स्क्रीन और उचित लाइटिंग मददगार साबित हो सकती है।

4. एसी की सीधी हवा से बचें

यदि आप लंबे समय तक एयर कंडीशन्ड कमरे में रहते हैं, तो एसी की हवा सीधे चेहरे पर न आने दें। कमरे में नमी बनाए रखने के लिए ह्यूमिडिफायर उपयोगी हो सकता है।

5. पर्याप्त पानी पिएं

शरीर में पानी की कमी भी आंखों की ड्राइनेस बढ़ा सकती है। इसलिए दिनभर पर्याप्त मात्रा में पानी पीना जरूरी है।

6. डॉक्टर की सलाह से आई ड्रॉप्स इस्तेमाल करें

हल्के मामलों में आर्टिफिशियल टीयर्स या लुब्रिकेटिंग आई ड्रॉप्स फायदेमंद हो सकते हैं, लेकिन बिना विशेषज्ञ सलाह के लंबे समय तक कोई भी आई ड्रॉप इस्तेमाल नहीं करनी        चाहिए।

बच्चों में भी तेजी से बढ़ रही समस्या

कोविड महामारी के बाद ऑनलाइन पढ़ाई और मोबाइल उपयोग बढ़ने से बच्चों में भी आंखों की ड्राइनेस के मामले बढ़े हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि छोटे बच्चों की आंखें लंबे स्क्रीन एक्सपोजर के लिए बनी ही नहीं हैं। इसलिए बच्चों का स्क्रीन टाइम सीमित रखना बेहद जरूरी है।

तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें

यदि आंखों में लगातार दर्द, सूजन, तेज लालिमा, रोशनी से अत्यधिक परेशानी या अचानक नजर कम होने जैसे लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत नेत्र विशेषज्ञ से संपर्क करना चाहिए। बार-बार आंखें मलना या खुद से दवाएं लेना स्थिति को और खराब कर सकता है।

आंखों की सेहत अब लाइफस्टाइल से जुड़ा 

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में ड्राई आई सिंड्रोम दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती आंखों की समस्याओं में शामिल हो सकता है। डिजिटल लाइफस्टाइल, बढ़ता प्रदूषण और लंबे स्क्रीन टाइम ने आंखों की प्राकृतिक सुरक्षा प्रणाली पर दबाव बढ़ा दिया है। ऐसे में जरूरी है कि लोग इसे सामान्य थकान समझकर नजरअंदाज न करें। समय रहते सही आदतें अपनाना, स्क्रीन टाइम नियंत्रित करना और आंखों को पर्याप्त आराम देना ही इस समस्या से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका माना जा रहा है।
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