पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजे सामने आने के बाद राज्य की राजनीति में लगातार हलचल बनी हुई है। चुनाव परिणामों के साथ ही आरोप-प्रत्यारोप और राजनीतिक बयानबाजी का दौर तेज हो गया है। कई इलाकों में हिंसा और तनाव की खबरें भी सामने आई हैं। इसी बीच प्रसिद्ध कवि और वक्ता कुमार विश्वास ने पश्चिम बंगाल की राजनीति और वहां के माहौल को लेकर बड़ा खुलासा किया है। उन्होंने दावा किया कि कोलकाता में उनकी रामकथा तक आयोजित नहीं होने दी गई थी।
कुमार विश्वास ने कहा कि पश्चिम बंगाल में ऐसा माहौल बना दिया गया था, जहां सांस्कृतिक और धार्मिक कार्यक्रमों को भी राजनीतिक नजरिए से देखा जा रहा था। उन्होंने बताया कि उनकी रामकथा के आयोजन के लिए महीनों पहले तैयारी शुरू कर दी गई थी। ऑडिटोरियम की बुकिंग छह महीने पहले ही कर ली गई थी, लेकिन बाद में उसे अचानक रद्द कर दिया गया। इसके बाद आयोजन के लिए गार्डन और बैंक्वेट हॉल बुक किए गए, मगर उनकी बुकिंग भी कुछ ही घंटों में कैंसिल कर दी गई।
टिकट बिक्री और अंतिम समय में रद्दीकरण
उन्होंने बताया कि कार्यक्रम के टिकट चार महीने पहले ही बिक चुके थे और अखबारों में विज्ञापन भी प्रकाशित हो चुके थे। इसके बावजूद आयोजन नहीं हो पाया। कुमार विश्वास के अनुसार, इस पूरे मामले के पीछे राजनीतिक दबाव था, जिसके कारण आयोजकों को कार्यक्रम रद्द करना पड़ा। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक माहौल और गर्म हो गया है।
अन्य कार्यक्रमों के रद्द होने का मामला
कुमार विश्वास ने यह भी बताया कि उन्हें 1 और 2 मार्च को कोलकाता में महाराजा अग्रसेन धाम और इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (ICAI) जैसे संस्थानों के तीन बड़े कार्यक्रमों में हिस्सा लेना था। हालांकि, ये सभी कार्यक्रम भी बाद में रद्द कर दिए गए। उस समय लोगों में काफी नाराजगी देखने को मिली थी, लेकिन आयोजनों के रद्द होने की असली वजह सामने नहीं आई थी। अब कुमार विश्वास ने पहली बार इस पर खुलकर अपनी बात रखी है।
चुनाव बाद बढ़ता राजनीतिक टकराव
पश्चिम बंगाल में चुनावों के बाद भाजपा और तृणमूल कांग्रेस के बीच लगातार टकराव देखने को मिल रहा है। राजनीतिक बयानबाजी और हिंसा की घटनाओं ने राज्य के माहौल को पहले ही तनावपूर्ण बना दिया है। ऐसे समय में कुमार विश्वास का यह बयान सांस्कृतिक स्वतंत्रता और राजनीतिक हस्तक्षेप जैसे मुद्दों को फिर से चर्चा में ले आया है।
भविष्य को लेकर उम्मीद
कुमार विश्वास पहले भी बंगाल में रामकथा और सांस्कृतिक आयोजनों के कारण चर्चा में रहे हैं। उनके कई कार्यक्रम और बयान सोशल मीडिया पर वायरल हुए थे। अब उन्होंने उम्मीद जताई है कि भविष्य में वे पश्चिम बंगाल में बिना किसी परेशानी के अपने कार्यक्रम आयोजित कर सकेंगे। उनका मानना है कि बदलते राजनीतिक माहौल में सांस्कृतिक आयोजनों को अधिक स्वतंत्रता मिलेगी।
