जिले के पोंडी में संचालित शराब भट्ठी को हटाने की मांग ने शुक्रवार को उग्र रूप ले लिया। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के कार्यकर्ताओं और बड़ी संख्या में स्कूली छात्रों ने रायपुर-जबलपुर नेशनल हाईवे-30 पर चक्काजाम कर जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि लंबे समय से शराब भट्ठी को आबादी और स्कूल क्षेत्र से हटाने की मांग की जा रही है, लेकिन प्रशासन द्वारा अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। इससे नाराज होकर छात्रों और स्थानीय लोगों ने सड़क पर उतरकर आंदोलन तेज कर दिया।
प्रदर्शन के चलते NH-30 के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। यात्री बसें, ट्रक, निजी वाहन और एंबुलेंस तक घंटों जाम में फंसी रहीं। सड़क पर बैठे प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए शराब दुकान को तत्काल हटाने की मांग दोहराई। जाम के कारण यात्रियों और राहगीरों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। कई लोग वैकल्पिक मार्ग तलाशते नजर आए, जबकि कुछ यात्री तपती गर्मी में घंटों फंसे रहे।
डिप्टी सीएम विजय शर्मा का काफिला भी रुका
चक्काजाम का असर इतना व्यापक रहा कि प्रदेश के उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा का काफिला भी इस मार्ग से आगे नहीं बढ़ सका। सुरक्षा और प्रशासनिक अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को संभालने की कोशिश की। बताया जा रहा है कि पुलिस और प्रशासन की टीम लगातार प्रदर्शनकारियों को समझाने में जुटी रही, लेकिन प्रदर्शनकारी अपनी मांग पर अड़े रहे। काफी देर तक वार्ता का दौर चलता रहा।
प्रदर्शन कर रहे छात्रों और ABVP कार्यकर्ताओं का आरोप है कि शराब भट्ठी के कारण आसपास का सामाजिक माहौल लगातार खराब हो रहा है। स्कूल आने-जाने वाले छात्र-छात्राओं पर इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। स्थानीय लोगों ने कहा कि शराब सेवन करने वाले लोगों के जमावड़े से क्षेत्र में असुरक्षा और अव्यवस्था का माहौल बनता है। यही वजह है कि ग्रामीण और छात्र संगठन लगातार शराब दुकान को दूसरी जगह स्थानांतरित करने की मांग कर रहे हैं।
प्रशासन ने कार्रवाई का दिया आश्वासन
मौके पर मौजूद प्रशासनिक अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों को उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया। अधिकारियों ने कहा कि मामले को उच्च स्तर पर भेजा जाएगा और स्थानीय लोगों की मांगों पर गंभीरता से विचार किया जाएगा। इसके बाद धीरे-धीरे प्रदर्शन शांत हुआ और यातायात बहाल कराया गया। हालांकि स्थानीय लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और बड़ा रूप दिया जाएगा।

