सिस्टम की लापरवाही : खैरागढ़ गैस एजेंसी पर गंभीर आरोप, सैकड़ों परिवार बोले- OTP के बाद भी नहीं मिला सिलेंडर
खैरागढ़ जिले के साल्हेकला इंडियन गैस एजेंसी पर प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत फर्जी गैस डिलीवरी दिखाने के आरोप लगे हैं। उपभोक्ताओं का दावा है कि OTP लेने के बाद सिस्टम में सिलेंडर डिलीवर दिखा दिया जाता है, लेकिन गैस घर तक नहीं पहुंचती। रिकॉर्ड में सप्लाई पूरी होने से खातों में सब्सिडी भी जमा हो रही है। ग्रामीणों ने घरेलू सिलेंडरों को कमर्शियल उपयोग में खपाने की आशंका जताई है। मामले में 800 से अधिक परिवार प्रभावित होने का दावा किया जा रहा है, जबकि खैरागढ़ प्रशासन ने जांच के निर्देश दिए हैं।
छत्तीसगढ़ के खैरागढ़ जिले में प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत गैस वितरण में गड़बड़ी का मामला सामने आने के बाद हड़कंप मच गया है। बाजार आतरिया क्षेत्र स्थित साल्हेकला इंडियन गैस एजेंसी पर उपभोक्ताओं ने गंभीर आरोप लगाए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि एजेंसी कर्मचारी गैस डिलीवरी से पहले मोबाइल पर आए OTP की मांग करते हैं। उपभोक्ता OTP बता देते हैं, जिसके बाद सिस्टम में सिलेंडर “डिलीवर” दिखने लगता है, लेकिन कई दिनों तक गैस सिलेंडर घर तक नहीं पहुंचता।
ग्रामीण उपभोक्ताओं का दावा है कि सरकारी रिकॉर्ड में गैस सप्लाई पूरी दिखने के कारण उनके खातों में सब्सिडी की राशि भी जमा हो जाती है। इससे पोर्टल पर सबकुछ सामान्य नजर आता है, जबकि वास्तविकता में उपभोक्ता गैस सिलेंडर का इंतजार करते रह जाते हैं। कई परिवारों ने आरोप लगाया कि उनके खातों में दो-दो और तीन-तीन बार सब्सिडी आई, लेकिन सिलेंडर कभी नहीं मिला। इस मामले ने सरकारी वितरण प्रणाली की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
OTP सिस्टम पर उठे गंभीर सवाल
सरकार ने घरेलू गैस की कालाबाजारी रोकने और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए OTP आधारित डिलीवरी व्यवस्था लागू की थी। अब इसी व्यवस्था के जरिए कथित फर्जी डिलीवरी दिखाने का आरोप सामने आने से लोगों में नाराजगी बढ़ गई है। उपभोक्ताओं का कहना है कि OTP सत्यापन के बाद सिस्टम में तुरंत डिलीवरी अपडेट हो जाती है, जबकि असली सिलेंडर कई बार भेजा ही नहीं जाता। स्थानीय लोगों के मुताबिक जब भी वे एजेंसी में शिकायत करने पहुंचते हैं तो हर बार अलग-अलग कारण बताकर उन्हें टाल दिया जाता है। कभी वाहन रास्ते में होने की बात कही जाती है, तो कभी अगले दिन सप्लाई का भरोसा दिया जाता है। कई उपभोक्ताओं ने आरोप लगाया कि लगातार शिकायतों के बावजूद कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया जा रहा है। इससे ग्रामीणों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है।
घरेलू सिलेंडरों के व्यावसायिक इस्तेमाल की आशंका
मामले में एक और बड़ा आरोप सामने आया है। उपभोक्ताओं का कहना है कि उनके नाम पर बुक किए गए घरेलू सिलेंडरों को होटल, ढाबों और छोटे व्यवसायों में खपाया जा रहा है। आरोप है कि घरेलू गैस को कमर्शियल उपयोग में बेचकर ज्यादा मुनाफा कमाया जा रहा है। यदि यह आरोप सही साबित होते हैं तो यह उज्ज्वला योजना के गरीब हितग्राहियों के साथ बड़ा धोखा माना जाएगा। साल्हेकला गैस एजेंसी सीमावर्ती क्षेत्र में स्थित होने के कारण इसके उपभोक्ता सिर्फ खैरागढ़ ही नहीं, बल्कि बेमेतरा और दुर्ग जिले से भी जुड़े हुए हैं। स्थानीय लोगों का दावा है कि इस कथित गड़बड़ी से 800 से 900 परिवार प्रभावित हो सकते हैं। ग्रामीणों ने मांग की है कि डिलीवरी रिकॉर्ड, OTP एंट्री, वाहन मूवमेंट और वास्तविक वितरण की तकनीकी जांच कराई जाए, ताकि पूरे मामले की सच्चाई सामने आ सके।
प्रशासन ने दिए जांच के निर्देश
पूरा मामला सामने आने के बाद प्रशासन भी सक्रिय हो गया है। सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि बिना सिलेंडर पहुंचे डिलीवरी पूरी कैसे दिख गई और सब्सिडी किस आधार पर जारी हुई। फिलहाल जिम्मेदार अधिकारी कैमरे पर कुछ भी बोलने से बच रहे हैं, लेकिन खैरागढ़ एडीएम सुरेंद्र कुमार ठाकुर ने मामले की जांच के निर्देश दिए हैं। अब सभी की नजर प्रशासनिक जांच पर टिकी हुई है कि आखिर उज्ज्वला योजना में कथित फर्जीवाड़े का सच क्या है।