मानसून की आमद के साथ ही क्षेत्र में खरीफ सीजन की सरगर्मियां तेज हो गई हैं, लेकिन इसके साथ ही अन्नदाताओं के सामने खाद का बड़ा संकट खड़ा हो गया है। यूरिया और डीएपी (DAP) खाद की भारी किल्लत के कारण किसानों में त्राहि-त्राहि मची हुई है। इस व्यवस्था से परेशान और आक्रोशित किसानों का गुस्सा आखिरकार ग्राम पैलीमेटा में फूट पड़ा। अपनी जायज मांगों को लेकर बड़ी संख्या में किसान सड़कों पर उतर आए, चक्काजाम किया और शासन-प्रशासन के खिलाफ जमकर विरोध प्रदर्शन किया।
केंद्रों के चक्कर काटने को मजबूर किसान
प्रदर्शनकारी किसानों का कहना है कि यह समय खेती-किसानी और बुवाई के लिहाज से सबसे महत्वपूर्ण है। अगर इस समय फसलों को सही मात्रा में खाद नहीं मिली, तो पूरी मेहनत बेकार हो जाएगी। किसानों ने वितरण केंद्रों पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि सोसायटियों और खाद केंद्रों में लगातार स्टॉक की कमी बनी हुई है। किसानों को सुबह से लाइन में लगना पड़ रहा है और शाम को खाली हाथ लौटना पड़ता है। बार-बार चक्कर काटने के कारण उनका समय और पैसा दोनों बर्बाद हो रहा है, जिससे कृषि कार्य पूरी तरह ठप होने की कगार पर है।
दिग्गज नेताओं के नेतृत्व में गूंजे नारे, प्रशासन को घेरा
व्यापक आंदोलन की बड़ी चेतावनी
चक्काजाम और प्रदर्शन के दौरान किसान नेताओं और जनप्रतिनिधियों ने प्रशासन को दो टूक चेतावनी दी है। किसानों का कहना है कि यदि अगले कुछ दिनों के भीतर क्षेत्र में यूरिया और डीएपी की आपूर्ति सामान्य नहीं की गई और वितरण व्यवस्था को पारदर्शी नहीं बनाया गया, तो यह आंदोलन केवल पैलीमेटा तक सीमित नहीं रहेगा। आने वाले दिनों में पूरे जिले में चक्काजाम और उग्र आंदोलन किया जाएगा। पैलीमेटा में हुआ यह उग्र प्रदर्शन इस बात का साफ संकेत है कि अगर ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले किसानों की अनदेखी हुई, तो प्रशासन को इसका भारी खामियाजा भुगतना पड़ेगा।