बड़ा एक्शन : दो भैंसों को बचाया, 2.60 लाख का मशरूका जब्त
गण्डई पुलिस ने पशु तस्करी और अवैध परिवहन के खिलाफ कार्रवाई करते हुए महाराष्ट्र ले जाई जा रही दो भैंसों को मुक्त कराया है। ग्राम बिरखा के पास घेराबंदी कर बिना नंबर के टाटा एस गोल्ड वाहन को पकड़ा गया, जिसमें भैंसों को अमानवीय परिस्थितियों में ले जाया जा रहा था।
जिले में पशु तस्करी और अवैध पशु परिवहन के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत गण्डई पुलिस को बड़ी सफलता हाथ लगी है। पुलिस ने महाराष्ट्र की ओर ले जाई जा रही दो भैंसों को मुक्त कराते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। कार्रवाई के दौरान पशुओं के परिवहन में इस्तेमाल किए जा रहे बिना नंबर के चार पहिया वाहन को भी जब्त किया गया। पुलिस की इस कार्रवाई को पशु तस्करी के विरुद्ध चलाए जा रहे अभियान की महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।
पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार 5 जून को गण्डई थाना क्षेत्र में जुर्म-जरायम की पतासाजी और संदिग्ध गतिविधियों की निगरानी के दौरान मुखबिर से सूचना प्राप्त हुई थी कि एक टाटा एस गोल्ड (छोटा हाथी) वाहन में दो कमजोर भैंसों को अमानवीय तरीके से बांधकर बिना चारा-पानी के महाराष्ट्र की ओर ले जाया जा रहा है। सूचना को गंभीरता से लेते हुए पुलिस टीम तत्काल सक्रिय हुई और ग्राम बिरखा के पास रणनीतिक तरीके से घेराबंदी कर संदिग्ध वाहन को रोक लिया।
वाहन जांच में सामने आई पशु क्रूरता
वाहन की तलाशी लेने पर पुलिस ने पाया कि दोनों भैंसों को अत्यंत खराब परिस्थितियों में रस्सियों से बांधकर ले जाया जा रहा था। पशुओं को न तो पर्याप्त जगह दी गई थी और न ही उनके लिए भोजन एवं पानी की व्यवस्था की गई थी। पुलिस अधिकारियों ने इसे पशु क्रूरता का गंभीर मामला मानते हुए तत्काल कार्रवाई की। पूछताछ के दौरान वाहन चालक की पहचान जितेन्द्र धृतलहरे (33 वर्ष) निवासी रावणपारा, गण्डई तथा उसके साथी पीर अली (32 वर्ष) निवासी वार्ड क्रमांक 09, गण्डई के रूप में हुई। दोनों आरोपियों से पशुओं के परिवहन संबंधी वैध दस्तावेजों की मांग की गई, लेकिन वे कोई संतोषजनक दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सके। इसके बाद दोनों को मौके पर ही हिरासत में लेकर गिरफ्तार कर लिया गया।
2.60 लाख रुपये का मशरूका जब्त
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से लगभग 60 हजार रुपये मूल्य की दो भैंसें तथा करीब 2 लाख रुपये मूल्य का बिना नंबर का टाटा एस गोल्ड वाहन जब्त किया। इस प्रकार कुल 2 लाख 60 हजार रुपये मूल्य का मशरूका बरामद किया गया है। मुक्त कराए गए पशुओं को सुरक्षित संरक्षण के लिए आवश्यक व्यवस्था की गई है।
इस मामले में आरोपियों के खिलाफ छत्तीसगढ़ कृषक पशु परिरक्षण अधिनियम 2004, पशु क्रूरता निवारण अधिनियम 1960 तथा मोटर व्हीकल एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत अपराध पंजीबद्ध किया गया है। पुलिस ने मामले की विस्तृत जांच शुरू कर दी है और यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि पशुओं को कहां से लाया गया था तथा उन्हें महाराष्ट्र में किस उद्देश्य से ले जाया जा रहा था।
न्यायिक रिमांड पर भेजे गए आरोपी
गिरफ्तारी के बाद दोनों आरोपियों को न्यायालय में प्रस्तुत किया गया। न्यायालय के आदेश पर उन्हें न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जिले में पशु तस्करी और अवैध परिवहन के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा तथा ऐसे मामलों में संलिप्त व्यक्तियों के विरुद्ध कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। पुलिस प्रशासन ने नागरिकों से भी अपील की है कि यदि कहीं पशुओं के अवैध परिवहन, तस्करी अथवा पशु क्रूरता से जुड़ी गतिविधियों की जानकारी मिले तो तत्काल पुलिस को सूचना दें। प्रशासन का कहना है कि पशुओं के संरक्षण और अवैध तस्करी पर रोक लगाने के लिए लगातार निगरानी और विशेष अभियान चलाए जा रहे हैं।