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PM आवास योजना में फर्जीवाड़े के विरोध सौंपते हुए ग्रामीण
PM आवास योजना में फर्जीवाड़े के विरोध सौंपते हुए ग्रामीण
महासमुंद

आवास योजना :  जमीन पर नहीं बना मकान सरकारी पोर्टल पर बताया पूर्ण  ग्रामीणों ने खोली पोल   

बागबाहरा के अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायत खट्टी में प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के क्रियान्वयन में व्यापक स्तर पर वित्तीय गड़बड़ी और गंभीर नियमितता का सनसनीखेज मामला प्रकाश में आया है। ग्रामीणों का आरोप है कि ग्राम पंचायत द्वारा जिन हितग्राहियों के आवास निर्माण का कार्य धरातल पर अभी प्रारंभ भी नहीं कराया गया है

कीर्तिमान डेस्क
कीर्तिमान डेस्क
01 Jul 2026, 10:32 AM
महासमुंद

जनपद पंचायत बागबाहरा के अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायत खट्टी में प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के क्रियान्वयन में व्यापक स्तर पर वित्तीय गड़बड़ी और गंभीर नियमितता का सनसनीखेज मामला प्रकाश में आया है। ग्रामीणों का आरोप है कि ग्राम पंचायत द्वारा जिन हितग्राहियों के आवास निर्माण का कार्य धरातल पर अभी प्रारंभ भी नहीं कराया गया है, उन्हें शासकीय पोर्टल पर 'कम्प्लीट' (पूर्ण) दर्शा दिया गया है। इस महाफर्जीवाड़े को अंजाम देने के लिए बकायदा फर्जी जियो टैगिंग का सहारा लिया गया और बिना किसी वास्तविक निर्माण के ही सरकारी खजाने से राशि का आहरण कर लिया गया। इस गंभीर विषय को लेकर आज ग्रामीणों ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर जनदर्शन में कलेक्टर के नाम एक लिखित ज्ञापन सौंपा और निष्पक्ष जांच की गुहार लगाई है।  

सरकारी रिकॉर्ड में पूरा हुआ निर्माण 

ग्रामीणों ने दस्तावेजी साक्ष्यों के साथ बताया कि ग्राम पंचायत खट्टी द्वारा स्वीकृत आवासों के रिकॉर्ड और वास्तविक जमीनी स्थिति में भारी विसंगति है। भ्रष्टाचार के इस खेल का एक बड़ा उदाहरण ग्राम सोनभाठा निवासी हितग्राही हेमिन बाई पति रामजी के प्रकरण में देखने को मिला है। ग्रामीणों का साफ कहना है कि हेमिन बाई के आवास का निर्माण कार्य धरातल पर शुरू तक नहीं हुआ है, लेकिन सरकारी फाइलों और शासकीय पोर्टल पर इसे पूरी तरह से निर्मित (कम्प्लीट) दिखाकर पूरी राशि का आहरण कर लिया गया।

ग्रामीणों ने कलेक्टर से की निष्पक्ष जांच 

ग्रामीणों ने शिकायत में उल्लेख किया है कि यह केवल एक मकान का मामला नहीं है, बल्कि क्षेत्र के कई अन्य हितग्राहियों के मामलों में भी इसी प्रकार फर्जी जियो टैगिंग कर बिना निर्माण क्षतिपूर्ति वसूलने तथा संबंधित लोगों के विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई करने की मांग की गई है। वहीं कलेक्टर को दिए गए ज्ञापन में ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि विवाद के कारण गांव का माहौल प्रभावित हो रहा है और प्रशासन को तत्काल हस्तक्षेप करना चाहिए। ग्रामीणों ने प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई करने, शासकीय भूमि को अतिक्रमण मुक्त बनाए रखने तथा भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने की मांग की है।

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