राजधानी रायपुर में नशे के काले कारोबार और संगठित अपराध के खिलाफ पुलिस ने अब तक की सबसे बड़ी और ऐतिहासिक वित्तीय चोट की है। रायपुर पुलिस कमिश्नरेट के इतिहास में NDPS एक्ट के तहत पहली बार इतनी बड़ी वित्तीय कार्रवाई को अंजाम देते हुए कुख्यात गांजा तस्कर और हिस्ट्रीशीटर रवि साहू की करीब 7 करोड़ 66 लाख रुपए की चल-अचल संपत्तियों को पूरी तरह सीज (फ्रीज) कर दिया गया है।
मुंबई स्थित सक्षम प्राधिकारी (Competent Authority) ने पुलिस की इस जब्ती रिपोर्ट पर मुहर लगाते हुए संपत्तियों को फ्रीज करने के आदेश को अंतिम रूप से कन्फर्म कर दिया है। यह पूरी कार्रवाई NDPS एक्ट की धारा 68F और SAFEMA (स्मगलर्स एंड फॉरेन एक्सचेंज मैनिपुलेटर्स एक्ट) के तहत की गई है। सक्षम प्राधिकारी (मुंबई) की हरी झंडी मिलने के बाद अब आरोपी या उसका परिवार इन संपत्तियों की खरीद-बिक्री, लीज या किसी भी तरह का हस्तांतरण (Transfer) नहीं कर सकेगा।
रायपुर पुलिस के मुताबिक, नशे की काली कमाई से खड़ी की गई इस साम्राज्य को ढहाने के लिए एक लंबी वित्तीय जांच (Financial Investigation) चलाई गई थी।
परिवार के नाम पर फैला रखा था 'बेनामी' साम्राज्य
जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि रवि साहू ने पुलिस की नजरों से बचने के लिए गांजे की तस्करी से कमाए करोड़ों रुपए अपनी पत्नी, मां और बेटे के नाम पर निवेश किए थे। पुलिस ने जांच के बाद जिन 16 प्रमुख संपत्तियों को कुर्क किया है, उनमें शामिल हैं:
रायपुर और अभनपुर क्षेत्र में स्थित कीमती कृषि भूमि।
शहर के रिहायशी इलाकों में बने आलीशान मकान और कमर्शियल भवन।
भविष्य के निवेश के लिए खरीदे गए महंगे प्लॉट्स।
तस्करी और परिवहन के काम में इस्तेमाल होने वाले कमर्शियल वाहन।
जब कोर्ट ने आरोपी पक्ष से इन संपत्तियों की आय के वैध स्रोत (Legal Income Source) मांगे, तो ऑनलाइन सुनवाई के दौरान आरोपी का परिवार कोई भी संतोषजनक जवाब या दस्तावेज पेश नहीं कर सका।
55 मामले दर्ज, पहले ही हो चुकी है 10 साल की जेल
आरोपी रवि साहू (निवासी: गांधीनगर, कालीबाड़ी, रायपुर) कोई छोटा-मोटा अपराधी नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ के कई जिलों में गांजा तस्करी का नेटवर्क चलाने वाला मास्टरमाइंड है।
| रवि साहू का क्राइम प्रोफाइल | विवरण |
| कुल दर्ज मामले | छत्तीसगढ़ के अलग-अलग थानों में 55 आपराधिक मुकदमें दर्ज। |
| मौजूदा सजा | 17 किलो 882 ग्राम गांजा तस्करी के मामले में विशेष NDPS कोर्ट द्वारा 10 साल के सश्रम कारावास की सजा। |
| आर्थिक दंड | कोर्ट द्वारा 1 लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया जा चुका है। |
नशा कारोबारियों की रीढ़ तोड़ना हमारा मकसद
इस बड़ी कामयाबी और कड़े एक्शन पर डीसीपी सेंट्रल उमेश गुप्ता ने साफ संदेश देते हुए कहा:
"रायपुर पुलिस कमिश्नरेट के भीतर NDPS एक्ट के तहत यह अब तक की पहली और सबसे बड़ी वित्तीय चोट है। नशे के सौदागरों के खिलाफ सिर्फ जेल भेजने की कार्रवाई काफी नहीं है, बल्कि उनकी अवैध रूप से कमाई गई आर्थिक रीढ़ को तोड़ना बेहद जरूरी है। अपराधियों और ड्रग पैडलर्स के खिलाफ यह सख्त अभियान आगे भी इसी आक्रामकता के साथ जारी रहेगा।"
रायपुर पुलिस की इस कार्रवाई से छत्तीसगढ़ के नशा माफियाओं और अवैध कारोबारियों में हड़कंप मच गया है।
