सरकारी स्कूलों में स्थानीय शुल्क बढ़ाए जाने के फैसले के विरोध में कांग्रेस ने राजधानी रायपुर में जोरदार प्रदर्शन किया। पार्टी कार्यकर्ताओं और नेताओं ने स्कूल शिक्षा विभाग कार्यालय का घेराव कर राज्य सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने जॉइंट डायरेक्टर को ज्ञापन सौंपते हुए बढ़ाई गई फीस को तत्काल वापस लेने की मांग की। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि यह फैसला आर्थिक रूप से कमजोर और मध्यमवर्गीय परिवारों पर अतिरिक्त बोझ डालने वाला है।
कांग्रेस जिलाध्यक्ष कुमार मेनन ने राज्य सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि प्रदेश की जनता पहले ही बढ़ती महंगाई से परेशान है, ऐसे समय में सरकारी स्कूलों की फीस बढ़ाना पूरी तरह जनविरोधी कदम है। उन्होंने कहा कि सरकार निजी स्कूलों की तर्ज पर सरकारी स्कूलों में भी आर्थिक दबाव बढ़ाने का प्रयास कर रही है। मेनन ने आरोप लगाया कि सरकार शिक्षा जैसी मूलभूत व्यवस्था को भी महंगा बनाकर गरीब परिवारों के बच्चों की पढ़ाई प्रभावित करना चाहती है।
हाई स्कूल और हायर सेकेंडरी शुल्क में बढ़ोतरी
लाखों अभिभावकों पर बढ़ेगा आर्थिक बोझ
प्रदेश में वर्तमान में करीब 56 हजार स्कूल संचालित हैं, जिनमें लगभग 56 लाख विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। इनमें 44 लाख से अधिक छात्र-छात्राएं सरकारी स्कूलों में पढ़ाई कर रहे हैं। ऐसे में फीस वृद्धि का सीधा असर लाखों अभिभावकों की जेब पर पड़ेगा। कांग्रेस ने दावा किया कि ग्रामीण और गरीब परिवारों के लिए यह अतिरिक्त शुल्क बड़ी परेशानी बन सकता है। कांग्रेस ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि शुल्क वृद्धि का आदेश जल्द वापस नहीं लिया गया तो पार्टी प्रदेशभर में उग्र आंदोलन करेगी। नेताओं ने कहा कि शिक्षा को बोझ बनाने वाली किसी भी नीति का कांग्रेस सड़क से सदन तक विरोध जारी रखेगी।
