रायपुर जिले में कस्टम मिलिंग के तहत निर्धारित समय पर चावल जमा नहीं करने वाले राइस मिलरों पर प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है। मार्कफेड ने जिले के पांच राइस मिलरों की करीब ₹11.50 करोड़ की बैंक गारंटी जब्त कर ली है।
मार्कफेड के आदेश के बाद बैंकों ने मिलरों द्वारा जमा की गई गारंटी राशि को विभागीय खाते में ट्रांसफर करना शुरू कर दिया है। इस कार्रवाई के बाद मिलर समुदाय में हड़कंप की स्थिति बन गई है। अनुबंध के अनुसार जिले के सभी राइस मिलरों को 30 अप्रैल तक (कस्टम मिलिंग के तहत) उपार्जन केंद्रों से उठाए गए धान के बदले चावल जमा करना अनिवार्य था।
हालांकि निर्धारित समय सीमा बीत जाने के बावजूद किसी भी मिलर ने पूरी मात्रा में चावल जमा नहीं किया, जिसके बाद प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए कार्रवाई शुरू की।
32 मिलर अब भी डिफॉल्टर सूची में
सख्ती के बावजूद स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में नहीं आ सकी है। अभी भी जिले में 32 राइस मिलर ऐसे हैं जिन्होंने चावल जमा नहीं किया है। खाद्य विभाग और मार्कफेड की लगातार कार्रवाई और दबाव के बावजूद मिलर अपनी आपूर्ति पूरी नहीं कर पा रहे हैं, जिससे संकट और गहरा होता जा रहा है। कस्टम मिलिंग का यह चावल ही सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के तहत राशन दुकानों में भेजा जाता है।
चावल की आपूर्ति बाधित होने से नागरिक आपूर्ति निगम के गोदामों में स्टॉक कम होता जा रहा है, जिससे समय पर राशन दुकानों में चावल पहुंचने में देरी हो रही है और उपभोक्ताओं पर भी इसका असर पड़ने लगा है।
मिलर एसोसिएशन का विरोध
इस कार्रवाई के बाद मिलर एसोसिएशन ने सरकार के कदम का विरोध किया है। उनका कहना है कि परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए समय सीमा और प्रक्रिया में कुछ लचीलापन दिया जाना चाहिए था।
हालांकि प्रशासन का कहना है कि अनुबंध की शर्तों का पालन अनिवार्य है और लापरवाही पर कार्रवाई जारी रहेगी।
मार्कफेड और खाद्य विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि कस्टम मिलिंग में लापरवाही किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। आगे भी डिफॉल्टर मिलरों पर इसी तरह की सख्त कार्रवाई जारी रहने की संभावना है।
