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कार्रवाई : इंदौर में नौकरी का झांसा देकर आदिवासी छात्राओं को बनाया बंधक, पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

इंदौर में नौकरी दिलाने का झांसा देकर आदिवासी छात्राओं को कथित तौर पर बंधक बनाने, पैसे वसूलने और मोबाइल छीनने का मामला सामने आया है। पीड़िताओं का आरोप है कि उन्हें कई दिनों तक कमरे में बंद रखा गया और अहमदाबाद भेजने की तैयारी थी। पुलिस कमिश्नर के हस्तक्षेप के बाद 27 घंटे की देरी से एफआईआर दर्ज हुई, जिसके बाद पुलिस मामले की जांच में जुट गई है।

कीर्तिमान डेस्क
प्रकाशित: 18 Jul 2026, 12:01 PM · अपडेट: 30 Oct 2026, 11:51 AM
इंदौर
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश

इंदौर से पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है। रतलाम की रहने वाली आदिवासी छात्राओं को नौकरी का झांसा देकर बंधक बनाने, धोखाधड़ी करने और उनके मोबाइल छीनने के आरोप में आखिरकार पुलिस ने मामला दर्ज किया है। पीड़िताओं का आरोप है कि रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए उन्हें काफी मशक्कत करनी पड़ी। पुलिस कमिश्नर और डीसीपी के हस्तक्षेप के बाद ही राजेंद्र नगर थाना पुलिस ने कार्रवाई की।

पीड़ित छात्राओं के मुताबिक, उन्हें इंदौर स्थित 'महादेव इंटरप्राइजेज' नाम की संस्था ने अच्छी नौकरी दिलाने का भरोसा दिया। इसके बदले उनसे हजारों रुपये वसूले गए। बाद में आरोपियों ने उनका भरोसा तोड़ते हुए उन्हें कथित रूप से बंधक बना लिया।

मोबाइल छीनकर कमरे में रखा बंद

शिकायत के अनुसार, 9 जुलाई को आरोपियों ने छात्राओं के मोबाइल फोन छीन लिए और 13 जुलाई तक उन्हें एक कमरे में बंद रखा। इस दौरान उनकी गतिविधियों पर लगातार नजर रखी गई। परिवार से बात भी आरोपियों की निगरानी में ही कराई जाती थी, जिससे छात्राएं अपनी असली स्थिति घरवालों को नहीं बता सकीं। पीड़िताओं का दावा है कि आरोपियों की योजना उन्हें गुजरात के अहमदाबाद भेजने की थी। इससे पहले ही चार युवतियां किसी तरह वहां से भाग निकलीं और अपने गांव पहुंच गईं। उनके घर पहुंचने के बाद पूरे मामले का खुलासा हुआ।

पुलिस पर लापरवाही के आरोप

पीड़ित छात्राओं का आरोप है कि जब वे शिकायत लेकर थाने पहुंचीं तो उनकी बात सुनने के बजाय उन्हें वहां से भगा दिया गया। करीब 27 घंटे तक इस गंभीर मामले में कोई कार्रवाई नहीं हुई। बाद में मामला पुलिस कमिश्नर और डीसीपी तक पहुंचा, जिसके बाद राजेंद्र नगर थाना पुलिस ने महादेव इंटरप्राइजेज की संचालिका उर्मिला गुर्जर समेत तीन लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया।

पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठे गंभीर सवाल

इस घटना ने इंदौर पुलिस की संवेदनशीलता और कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रदेश में महिलाओं और आदिवासियों की सुरक्षा के दावों के बीच पीड़िताओं को एफआईआर दर्ज कराने के लिए वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचना पड़ा, जो व्यवस्था पर सवाल उठाता है। अब पुलिस मामले की जांच में जुटी है और फरार आरोपियों की तलाश की जा रही है। वहीं यह सवाल भी उठ रहा है कि कार्रवाई में 27 घंटे की देरी क्यों हुई और शिकायत लेकर पहुंचीं युवतियों को थाने से लौटाने वाले पुलिसकर्मियों पर क्या कार्रवाई होगी। फिलहाल इन सवालों के जवाब का इंतजार है।

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