भारत के डिजिटल परिदृश्य (Digital Landscape) में एक ऐतिहासिक अध्याय जुड़ने जा रहा है। वैश्विक टेक दिग्गज मेटा (Meta) और भारत की सबसे मूल्यवान कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज (Reliance Industries) ने एक महा-साझेदारी की घोषणा की है। इसके तहत रिलायंस गुजरात के जामनगर में भारत का पहला विशेष रूप से निर्मित (Built-to-suit) 168 मेगावाट (MW) क्षमता का AI-इनेबल्ड डेटा सेंटर बनाएगा, जिसे पूरी तरह से मेटा द्वारा लीज (किराए) पर लिया जाएगा।
यह कदम भारत को वैश्विक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) क्रांति के केंद्र में लाकर खड़ा कर देगा।
100% रिन्यूएबल एनर्जी और समुद्री पानी से कूलिंग
यह डेटा सेंटर न केवल तकनीकी रूप से उन्नत होगा, बल्कि पर्यावरण अनुकूल (Eco-friendly) भी होगा।
पर्यावरण के अनुकूल: मेटा के अनुसार, इस डेटा सेंटर को पूरी तरह से नवीकरणीय ऊर्जा (Renewable Energy) से संचालित किया जाएगा।
समुद्री पानी का उपयोग: विशाल कंप्यूटिंग पावर के कारण पैदा होने वाली गर्मी को शांत करने के लिए डिसैलिनेटेड (लवणमुक्त किए गए) समुद्री पानी का उपयोग कूलिंग के लिए होगा।
पूरा खर्च मेटा का: इस साइट को चलाने के लिए आवश्यक ऊर्जा और पानी का पूरा खर्च कैलिफोर्निया स्थित मेटा खुद वहन करेगी।
मार्क जुकरबर्ग (CEO, मेटा) ने कहा: > "हमें भारत में अपना पहला AI-सक्षम डेटा सेंटर बनाने के लिए रिलायंस के साथ काम करने पर गर्व है। जामनगर की यह विश्व स्तरीय सुविधा हमें अपने AI बुनियादी ढांचे को वैश्विक स्तर पर बढ़ाने में मदद करेगी, साथ ही भारत की अर्थव्यवस्था में हमारे दीर्घकालिक निवेश को और मजबूत करेगी।"
वैश्विक AI क्रांति का नेतृत्व करेगा भारत
रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी ने इस साझेदारी को भारत के डिजिटल बुनियादी ढांचे के लिए एक 'परिवर्तनकारी क्षण' बताया है।
मुकेश अंबानी (चेयरमैन, रिलायंस) ने कहा: > "मेटा जैसे वैश्विक तकनीकी लीडर के लिए भारत का पहला अनुकूलित AI डेटा सेंटर बनाना यह दर्शाता है कि भारत वैश्विक AI क्रांति में सबसे आगे रहने के लिए तैयार है। रिलायंस में, हम विश्व स्तरीय डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं जो न केवल भारत के लिए, बल्कि पूरी दुनिया के लिए AI इनोवेशन की अगली पीढ़ी को ऊर्जा देगा।"
भारत बना बिग टेक का नया 'बैटलग्राउंड'
मेटा और रिलायंस की यह डील ऐसे समय में आई है जब दुनिया की तमाम दिग्गज टेक कंपनियां भारत में पैर जमाने के लिए अरबों डॉलर का निवेश कर रही हैं। भारत में डेटा सेंटर बाजार परामर्श फर्म IMARC ग्रुप के अनुसार साल 2034 तक लगभग दोगुना होकर 13.11 अरब डॉलर होने का अनुमान है।
आइए देखें कि इस रेस में अन्य दिग्गज कहाँ खड़े हैं:
| कंपनी | भारतीय पार्टनर / लोकेशन | क्षमता / निवेश | उद्देश्य |
| मेटा (Meta) | रिलायंस (जामनगर, गुजरात) | 168 MW | भारत और वैश्विक स्तर पर AI प्रोडक्ट्स को पावर देना |
| ओपनएआई (OpenAI) | टाटा ग्रुप (Tata Group) | 100 MW (1 GW तक स्केलेबल) | कम लेटेंसी (Latency) और डेटा संप्रभुता (Compliance) |
| गूगल (Google) | विशाखापट्टनम (आंध्र प्रदेश) | $15 बिलियन, 1-Gigawatt (GW) | मेगा AI हब की स्थापना |
| अमेज़न और माइक्रोसॉफ्ट | भारत (विभिन्न लोकेशंस) | $52 बिलियन (संयुक्त निवेश) | क्लाउड और AI इन्फ्रास्ट्रक्चर का विस्तार |
मेटा और रिलायंस का पुराना और गहरा नाता
यह पहली बार नहीं है जब दोनों दिग्गजों ने हाथ मिलाया है। इनके बीच साझेदारी का एक मजबूत इतिहास रहा है:
रिलायंस एंटरप्राइज इंटेलिजेंस लिमिटेड (REIL): पिछले साल ही दोनों कंपनियों ने एक संयुक्त उद्यम (Joint Venture) बनाया है, जिसका उद्देश्य मेटा के ओपन-सोर्स Llama AI मॉडल को भारतीय डेवलपर्स और उद्यमों तक पहुंचाना है। इस वेंचर में रिलायंस की 70% और मेटा की 30% हिस्सेदारी है, जिसमें कुल ₹855 करोड़ का निवेश किया गया है।
जियो प्लेटफॉर्म्स में निवेश: साल 2020 में, मेटा (तब फेसबुक) ने जियो प्लेटफॉर्म्स में 5.7 अरब डॉलर का भारी-भरकम निवेश कर 9.99% हिस्सेदारी खरीदी थी।
भारतीय यूज़र्स को क्या होगा फायदा?
इस डेटा सेंटर के भारत में स्थापित होने से फेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप (Meta Products) का इस्तेमाल करने वाले करोड़ों भारतीय यूजर्स को बेहतर स्पीड, बेहद कम लेटेंसी (लो-लेटेंसी) और एडवांस AI फीचर्स का अनुभव मिलेगा। साथ ही, भारत का डेटा देश की सीमाओं के भीतर सुरक्षित रहेगा, जो देश की डेटा सुरक्षा नीति के लिहाज से भी एक बड़ी जीत है।
