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इंजीनियरिंग शिक्षा के सुधार के लिए बढ़ा कदम
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AICTE का बड़ा एक्शन : ताला लगने की कगार पर देश के 58 इंजीनियरिंग कॉलेज, जानें आपके राज्य का हाल

अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (AICTE) ने शैक्षणिक सत्र 2025-26 के लिए देशभर के 58 इंजीनियरिंग और तकनीकी कॉलेजों को चरणबद्ध तरीके से बंद करने की मंजूरी दी है। सीटें खाली रहने, योग्य फैकल्टी की कमी और कमजोर इंफ्रास्ट्रक्चर को इसके प्रमुख कारण बताया गया है। हालांकि, पहले से पढ़ रहे छात्रों की पढ़ाई और डिग्री पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा।

कीर्तिमान न्यूज
06 Jul 2026, 02:00 PM
नई दिल्ली
देश में इंजीनियरिंग की पढ़ाई का क्रेज और कॉलेजों की साख अब एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रही है। कभी गली-कूचों में खुलने वाले तकनीकी संस्थान अब अपनी पहचान और वजूद बचाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। यही वजह है कि देश के दर्जनों इंजीनियरिंग कॉलेज अब हमेशा के लिए बंद होने की कगार पर पहुंच गए हैं। 
अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (AICTE) ने शैक्षणिक सत्र 2025-26 के लिए देशभर के 58 इंजीनियरिंग और तकनीकी कॉलेजों को चरणबद्ध तरीके से बंद (Progressive Closure) करने की हरी झंडी दे दी है। आखिर ऐसा क्या हुआ कि देश में तकनीकी शिक्षा के इन मंदिरों पर ताले लटकने लगे हैं? आइए समझते हैं पूरी इनसाइड स्टोरी।

क्यों बंद हो रहे हैं कॉलेज? ये हैं 3 सबसे बड़े कारण

AICTE की रिपोर्ट और विशेषज्ञों के मुताबिक, इन संस्थानों के बंद होने के पीछे कोई एक वजह नहीं है, बल्कि यह लंबे समय से चली आ रही लापरवाही का नतीजा है:

  • छात्रों का मोहभंग: पिछले कुछ सालों से इन कॉलेजों में सीटों का खाली रहना सबसे बड़ी सिरदर्दी बन गया था।

  • योग्य प्रोफेसरों का टोटा: कॉलेजों के पास छात्रों को पढ़ाने के लिए मानकों के अनुरूप क्वालिफाइड फैकल्टी ही नहीं थी।

  • बुनियादी ढांचे की कमी: लैब, आधुनिक तकनीक और जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर के नाम पर कई संस्थान सिर्फ कागजों पर चल रहे थे।

मौजूदा छात्रों को बड़ी राहत: जिन छात्रों ने इन कॉलेजों में पहले से एडमिशन ले रखा है, उन्हें घबराने की जरूरत नहीं है। AICTE ने साफ किया है कि यह एक 'प्रोग्रेसिव क्लोजर' है। इसका मतलब है कि पुराने छात्र इसी संस्थान से अपनी पढ़ाई पूरी करके डिग्री ले सकेंगे, लेकिन इस साल से इन कॉलेजों में फर्स्ट ईयर (प्रथम वर्ष) के नए दाखिले पूरी तरह रोक दिए गए हैं।

यूपी और महाराष्ट्र में सबसे बड़ा झटका: देखें राज्यों की लिस्ट

कॉलेजों पर ताला लगने का सबसे ज्यादा असर उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र में देखने को मिला है। आइए नजर डालते हैं कि किस राज्य में कितने कॉलेज बंद हुए:

राज्यबंद होने वाले कॉलेजों की संख्या
उत्तर प्रदेश12
महाराष्ट्र12
मध्य प्रदेश08
तेलंगाना, पंजाब04 - 04
आंध्र प्रदेश, राजस्थान03 - 03
गुजरात, कर्नाटक, तमिलनाडु02 - 02
हरियाणा, ओडिशा, उत्तराखंड, प. बंगाल01 - 01

सरकारी से ज्यादा निजी संस्थानों पर गिरी गाज

इस पूरी कार्रवाई में सबसे खास बात यह है कि बंद होने वाले इन 58 संस्थानों में से केवल 3 कॉलेज सरकारी सहायता प्राप्त (Government-Aided) हैं। बाकी के सभी 55 संस्थान प्राइवेट हैं। इतना ही नहीं, कॉलेजों के अलावा देशभर के विभिन्न तकनीकी संस्थानों में चल रहे 950 से ज्यादा ऐसे कोर्स भी बंद कर दिए गए हैं, जिनमें छात्रों की रुचि खत्म हो चुकी थी या जो बाजार की मांग के मुताबिक प्रासंगिक नहीं रह गए थे। शिक्षा जगत के जानकारों का मानना है कि आज का छात्र अब सिर्फ 'डिग्री' के पीछे नहीं भागता। 

उद्देश्य तकनीकी शिक्षा को सुधारना 

आज के युवाओं को बेहतर प्लेसमेंट, आधुनिक लैब्स और बेहतरीन फैकल्टी चाहिए। जिन कॉलेजों ने वक्त के साथ खुद को नहीं बदला और सिर्फ मुनाफे के लिए दुकान चलाई, उनका बंद होना तय था। AICTE के इस कड़े कदम का सीधा उद्देश्य तकनीकी शिक्षा के स्तर को सुधारना है, ताकि देश के छात्रों को केवल उन्हीं संस्थानों में पढ़ने का मौका मिले जो वास्तव में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने में सक्षम हैं।
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