आम आदमी की रसोई पर महंगाई की मार एक बार फिर पड़ी है। घरेलू गैस एलपीजी (LPG) सिलेंडर की कीमतों में ₹29 की भारी बढ़ोतरी कर दी गई है। यह बढ़ी हुई कीमतें आज से ही देश भर में लागू हो गई हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पिछले तीन महीनों के भीतर यह दूसरी बार है जब आम जनता को गैस के दामों में बढ़ोतरी का सामना करना पड़ा है। लगातार बढ़ते दामों से त्योहारों और शादियों के इस सीजन में मध्यमवर्गीय परिवारों का मासिक बजट पूरी तरह से डगमगा गया है।
आपके शहर में क्या हैं नए दाम?
एक रिपोर्ट के अनुसार, 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर के दामों में ₹29 का इजाफा हुआ है। इस बढ़ोतरी के बाद देश के प्रमुख शहरों में कीमतें कुछ इस तरह हो गई हैं:
| शहर | पुरानी कीमत (₹) | नई कीमत (₹) |
| दिल्ली | ₹913.00 | ₹942.00 |
| मुंबई | ₹912.50 | ₹941.50 |
| कोलकाता | ₹939.00 | ₹968.00 |
| चेन्नई | — | ₹957.00 |
| भोपाल (मप्र) | ₹918.50 | ₹947.50 |
| रायपुर (छत्तीसगढ़) | — | ₹1013.00 |
बड़ी बात: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में तो घरेलू एलपीजी की कीमतों ने ₹1000 के मनोवैज्ञानिक आंकड़े को पार कर लिया है, जिससे यहाँ प्रति सिलेंडर दाम ₹1,013 हो गए हैं। वहीं मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में भी अब जनता को एक सिलेंडर के लिए ₹947.50 चुकाने होंगे।
तीन महीने में दूसरी बार बढ़ीं कीमतें: जानिए वजह?
यह पहली बार नहीं है जब उपभोक्ताओं को इस तरह का झटका लगा है। इससे पहले 7 मार्च को भी प्रति सिलेंडर ₹60 की बढ़ोतरी की गई थी।
क्यों बढ़ रहे हैं दाम?
अंतरराष्ट्रीय संकट: मार्च में हुई बढ़ोतरी के पीछे मुख्य वजह पश्चिमी एशिया (मिडिल ईस्ट) में उपजा तनाव था, जिसने वैश्विक स्तर पर ईंधन की सप्लाई चेन को प्रभावित किया था।
ऑयल कंपनियों का तर्क: ऑयल इंडस्ट्री के सूत्रों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और गैस की कीमतों में उतार-चढ़ाव की वजह से जो नुकसान हो रहा था, इस मूल्य वृद्धि से उसकी केवल 'आंशिक भरपाई' (Partial Recovery) ही हो पाई है। यानी आने वाले समय में राहत के आसार फिलहाल कम ही हैं।
आम आदमी पर कितना असर
रसोई गैस एक ऐसी अनिवार्य जरूरत है जिससे कोई समझौता नहीं किया जा सकता। ₹29 की यह बढ़ोतरी भले ही आंकड़ों में छोटी लगे, लेकिन मार्च में हुई ₹60 की बढ़ोतरी को मिलाकर देखा जाए तो महज कुछ ही दिनों में सिलेंडर ₹89 तक महंगा हो चुका है।
लगातार होती इस बढ़ोतरी से न केवल घरों का बजट बिगड़ेगा, बल्कि इसका सीधा असर होटल, रेस्तरां और टिफिन सर्विसेज पर भी पड़ सकता है, जिससे बाहर खाना खाना भी महंगा होने की आशंका है। आम नागरिकों का कहना है कि एक तरफ कमाई सीमित है और दूसरी तरफ घरेलू खर्च लगातार बढ़ रहे हैं, जिससे जीवनयापन करना मुश्किल होता जा रहा है।
