वैश्विक आर्थिक उथल-पुथल के बीच अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये में जारी गिरावट पर लगाम लगाने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। केंद्रीय बैंक द्वारा उठाए गए आक्रामक और रणनीतिक नीतिगत कदमों को बाजार के सेंटिमेंट (नजरिए) को पूरी तरह बदलने वाले 'मास्टरस्ट्रोक' के रूप में देखा जा रहा है। इन कदमों का सीधा मकसद रुपये की कमजोरी को लेकर बनी चिंताओं को दूर करना और देश में विदेशी पूंजी के प्रवाह (Foreign Capital Inflow) को रॉकेट की रफ्तार देना है।
हाल ही में रुपया डॉलर के मुकाबले ऐतिहासिक रूप से 97 के करीब पहुंच गया था, लेकिन सरकार और RBI की चौतरफा घेराबंदी के कारण पिछले कारोबारी सत्र (शुक्रवार) को यह 95.18 पर बंद हुआ। दिलचस्प बात यह है कि साल 2026 में अब तक डॉलर में 7 फीसदी से ज्यादा की कमजोरी देखी गई है, जिससे रुपये की रिकवरी की उम्मीदें और मजबूत हो गई हैं।
$75 अरब का मेगा निवेश: एक्सपर्ट्स को बड़ी उम्मीदें
बाजार के दिग्गज ब्रोकरेज और रिसर्च फर्म्स का मानना है कि RBI के नए नियमों के बाद भारत में 75 अरब डॉलर (approx. ₹6.2 लाख करोड़ से अधिक) तक का भारी-भरकम विदेशी निवेश आ सकता है। यह पूंजी रुपये को ढाल प्रदान करेगी।
SBI Research का दावा: एसबीआई रिसर्च के अनुसार, इन कदमों से कम से कम 40 अरब डॉलर का निवेश तुरंत भारत आ सकता है। अगर ऐसा होता है, तो रुपया मौजूदा स्तर से शानदार रिकवरी करते हुए 92 से 93 प्रति डॉलर के मजबूत स्तर पर लौट सकता है।
Kotak Securities का अनुमान: कोटक सिक्योरिटीज का अनुमान इससे भी कहीं अधिक उत्साहजनक है। उनका मानना है कि यह विदेशी निवेश 50 से 75 अरब डॉलर के बीच रह सकता है, जो भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए बूस्टर डोज साबित होगा।
रुपया बचाने के लिए RBI के '4 ब्रह्मास्त्र'
विदेशी निवेशकों को लुभाने और डॉलर की सप्लाई बढ़ाने के लिए केंद्रीय बैंक ने निम्नलिखित 4 सबसे महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं:
1. सरकारी बॉन्ड मार्केट के दरवाजे पूरी तरह खोले
RBI ने 'फुली एक्सेसिबल रूट' (FAR) का दायरा काफी बढ़ा दिया है। अब इसमें 15, 30 और 40 साल की लंबी अवधि के सरकारी बॉन्ड शामिल किए गए हैं। इसके अलावा, शॉर्ट-मैच्योरिटी कैप (कम अवधि की सीमा) को भी हटा दिया गया है। इससे विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) के लिए भारतीय बॉन्ड मार्केट में पैसा लगाना बेहद आसान हो जाएगा।
2. NRIs और OCIs के लिए रेड कार्पेट
अनिवासी भारतीयों (NRIs) और ओवरसीज सिटीजन्स ऑफ इंडिया (OCIs) को भारतीय शेयर बाजार (Equity Market) से जोड़ने के लिए नियमों को बेहद लचीला और उदार बनाया गया है। कोटक सिक्योरिटीज के मुताबिक, नियमों के सरलीकरण से भारतीय प्रवासियों से आने वाला निवेश रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच सकता है।
3. डॉलर जमा पर बंपर सब्सिडी
विदेशी मुद्रा अनिवासी (FCNR-B) जमा को आकर्षक बनाने के लिए RBI ने एक अनोखा कदम उठाया है। 3 से 5 साल के डिपॉजिट पर हेजिंग लागत का पूरा खर्च (2.5% सालाना) अब 30 सितंबर 2026 तक खुद RBI वहन करेगा।
इसका असर: इस सब्सिडी के चलते बैंक अब ग्राहकों को 5.5% से अधिक का शुद्ध ब्याज दे सकेंगे। यह ब्याज दर डॉलर जमाकर्ताओं के लिए इतनी आकर्षक है कि इससे देश में डॉलर की बाढ़ आ सकती है।
4. निर्यातकों पर कड़ा पहरा
विदेशी मुद्रा को देश के भीतर जल्दी लाने के लिए RBI ने नियमों को सख्त कर दिया है। निर्यातकों (Exporters) के लिए विदेशों से होने वाली कमाई को वापस भारत लाने की समयसीमा को 15 महीने से घटाकर सीधे 9 महीने कर दिया गया है। इससे बाजार में डॉलर की लिक्विडिटी तुरंत बढ़ेगी।
क्या रुपया 100 पार जाएगा? RBI ने दिया दो टूक जवाब
बाजार में चल रही इस चर्चा पर कि क्या रुपया टूटकर 100 के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर जाएगा, केंद्रीय बैंक ने स्थिति पूरी तरह साफ कर दी है। RBI ने स्पष्ट किया है कि भारत के आर्थिक बुनियादी ढांचे (Economic Fundamentals) बेहद मजबूत हैं और रुपये की मौजूदा चाल केवल तात्कालिक वैश्विक कारणों से है।
केंद्रीय बैंक के रुख से साफ है कि रुपये के 100 के स्तर पर जाने की तमाम आशंकाएं और कयास पूरी तरह से बेबुनियाद और काल्पनिक हैं। नए नीतिगत उपायों के लागू होने के बाद आने वाले महीनों में रुपये में गिरावट नहीं, बल्कि बड़ी मजबूती देखने को मिल सकती है।
