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चंद्रिमा भट्टाचार्य का इस्तीफा
चंद्रिमा भट्टाचार्य का इस्तीफा
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तृणमूल में बड़ी बगावत : ममता की सबसे भरोसेमंद चंद्रिमा भट्टाचार्य का इस्तीफा

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पार्टी TMC को बड़ा झटका लगा है। उनकी करीबी सहयोगी और वरिष्ठ नेता चंद्रिमा भट्टाचार्य ने पार्टी के सभी संगठनात्मक पदों से इस्तीफा दे दिया है। यह फैसला ऐसे समय आया है जब विधानसभा चुनाव में हार के बाद पार्टी पहले से ही अंदरूनी असंतोष और नेताओं के पलायन से जूझ रही है।

कीर्तिमान न्यूज
04 Jul 2026, 03:59 PM
कोलकाता
पश्चिम बंगाल की सियासत से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस (TMC) की सुप्रीमों ममता बनर्जी की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। विधानसभा चुनाव में मिली शिकस्त और पार्टी के भीतर सुलग रही बगावत की आग के बीच टीएमसी को अब तक का सबसे तगड़ा झटका लगा है। 
ममता बनर्जी की सबसे खास और भरोसेमंद सहयोगियों में शुमार चंद्रिमा भट्टाचार्य ने पार्टी के सभी संगठनात्मक पदों से अचानक इस्तीफा दे दिया है। चंद्रिमा का यह फैसला ऐसे समय पर आया है जब टीएमसी पहले से ही अपने वजूद को बचाने और बिखरते कुनबे को समेटने के लिए संघर्ष कर रही है। राजनीतिक गलियारों में चंद्रिमा भट्टाचार्य के इस कदम को लेकर तमाम तरह की अटकलें तेज हो गई हैं। 

तृणमूल में गहर होता जा रहा संकट 

गौरतलब है कि कुछ ही सप्ताह पहले ममता बनर्जी ने संगठन को नए सिरे से खड़ा करने की बड़ी जिम्मेदारी चंद्रिमा के कंधों पर सौंपी थी। पूर्व प्रदेश अध्यक्ष को हटाकर चंद्रिमा पर जो भरोसा जताया गया था, वह इतनी जल्दी टूट जाएगा, इसका अंदाजा शायद खुद टीएमसी लीडरशिप को भी नहीं था। अचानक लिए गए इस फैसले ने यह साफ कर दिया है कि तृणमूल कांग्रेस के भीतर चल रहा अंदरूनी संकट सतह से कहीं ज्यादा गहरा हो चुका है। 

संगठन में किए बड़े फेरबदल 

विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद से ही टीएमसी में 'ऑल इज नॉट वेल' वाली स्थिति बनी हुई है। हार के बाद से लगातार कई विधायक, जमीनी नेता और पदाधिकारी पार्टी का साथ छोड़ चुके हैं। डैमेज कंट्रोल के लिए ममता बनर्जी ने संगठन में बड़े फेरबदल भी किए और कई कमेटियों को दोबारा गठित किया, लेकिन इसके बावजूद नेताओं की नाराजगी और असंतोष दूर होने का नाम नहीं ले रहा है। चंद्रिमा का जाना इसी सिलसिले की अगली और सबसे बड़ी कड़ी माना जा रहा है।
राजनीतिक जानकारों का क्या कहना है? 
"चंद्रिमा भट्टाचार्य का जाना केवल एक पद का खाली होना नहीं है, बल्कि यह ममता बनर्जी के लिए बहुत बड़ा रणनीतिक झटका है। चंद्रिमा पार्टी के कोर ग्रुप का हिस्सा थीं और अहम फैसलों में उनकी राय मायने रखती थी। ऐसे संकट के समय उनका हटना विपक्ष को बैठे-बिठाए एक बड़ा मुद्दा दे गया है।"

चंद्रिमा ने साधी चुप्पी

हैरानी की बात यह है कि चंद्रिमा भट्टाचार्य ने अपने इस अचानक इस्तीफे के पीछे की वजहों का अभी तक खुलासा नहीं किया है। उन्होंने सार्वजनिक रूप से इस मामले पर पूरी तरह चुप्पी साध रखी है। दूसरी ओर, तृणमूल कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व की तरफ से भी अब तक इस पर कोई आधिकारिक बयान या प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। लेकिन पर्दे के पीछे की हकीकत यही है कि एक के बाद एक लग रहे इन झटकों ने ममता बनर्जी की राह बेहद मुश्किल कर दी है। अब देखना यह होगा कि बंगाल की राजनीति की यह 'फायरब्रांड' नेता अपने बिखरते हुए किले को बचाने के लिए अगला क्या कदम उठाती हैं।
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