दोनों पक्षों से संयम बरतने की अपील
आपसी संवाद ज़रूरी: स्कूलों में ड्रेस कोड, पर्दा या हिजाब जैसे मुद्दों को अदालत का दरवाजा खटखटाने के बजाय स्कूल प्रशासन, अभिभावक और शासन को आपस में बैठकर सुलझाना चाहिए।
संकीर्ण राजनीति पर रोक: ऐसे मामलों को तूल देने से सामाजिक ताना-बाना प्रभावित होता है और संकीर्ण राजनीति करने वालों को मौका मिल जाता है।
फैसले से असहमत, यह मौलिक अधिकारों का हनन: ओवैसी
दूसरी ओर, हैदराबाद के दारुस्सलाम स्थित पार्टी मुख्यालय से बोलते हुए AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले के प्रति अपनी तीखी असहमति जताई। स्कूल में हिजाब पहनकर जाने वाली छात्रा से जुड़े इस मामले पर ओवैसी ने सीधे तौर पर कानूनी और धार्मिक तर्क पेश किए:
संवैधानिक उल्लंघन: ओवैसी का तर्क है कि यह फैसला भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19 (अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता) और अनुच्छेद 25 (धर्म का आचरण और प्रचार करने का अधिकार) का सीधा उल्लंघन करता है।
धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप: उन्होंने कड़े शब्दों में कहा कि इस्लाम में क्या अनिवार्य है और क्या नहीं, यह तय करने का अधिकार दूसरों के पास नहीं है। उन्होंने इस फैसले को धार्मिक स्वतंत्रता पर चोट करार दिया।
बयानबाजी तेज, बताया धार्मिक पहचान का मुद्दा
इस पूरे घटनाक्रम के बाद राज्य में राजनीतिक बयानबाजी और तेज हो गई है, जहाँ एक पक्ष इसे कानूनी व्यवस्था और स्कूल अनुशासन से जोड़कर देख रहा है, वहीं दूसरा पक्ष इसे नागरिक अधिकारों और धार्मिक पहचान का मुद्दा बता रहा है।
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