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School children protesting to demand a teacher
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School Students Protest: पढ़ाई बचाने सड़क पर उतरी जेन अल्फा, चक्काजाम के बाद मानी गई मांग

School Students Protest: महासमुंद के करनापाली प्राथमिक स्कूल में शिक्षकों की कमी से नाराज विद्यार्थियों और अभिभावकों ने लंबर-बड़ेसाजापाली मार्ग पर चक्काजाम किया। प्रदर्शन के बाद प्रशासन ने दूसरे विद्यालय में भेजी गई शिक्षिका को वापस स्कूल में पदस्थ कर दिया।

अप्पू धीवर |  कीर्तिमान न्यूज
प्रकाशित: 26 Aug 2026, 08:21 AM · अपडेट: 04 Oct 2026, 06:46 AM
महासमुंद
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश
School Students Protest: महासमुंद जिले के बसना विकासखंड स्थित ग्राम करनापाली से एक ऐसी खबर सामने आई है, जिसने शिक्षा विभाग की नींद उड़ा दी। जिस सरकारी स्कूल का लोहा पूरा इलाका मानता है, वहां जब शिक्षकों का अकाल पड़ा तो बच्चों का सब्र जवाब दे गया। सोमवार को अपनी पढ़ाई चौपट होते देख नन्हें-मुन्हें स्कूली छात्र सड़कों पर उतर आए और लंबर-बड़ेसाजापाली मुख्य मार्ग पर पंचायत भवन के सामने चक्काजाम कर दिया। 

93 बच्चों का भविष्य दांव पर

देशभर में युवाओं के ‘जेन जी’ आंदोलनों की चर्चा के बीच, प्राथमिक स्कूल के इन ‘जेन अल्फा’ (मासूम बच्चों) का यह प्रदर्शन प्रशासनिक ढर्रे पर एक करारा तमाचा माना जा रहा है। करनापाली के इस विद्यालय में बालवाड़ी से लेकर 5वीं तक कुल 6 कक्षाओं में 93 बच्चे पढ़ते हैं। यह कोई आम सरकारी स्कूल नहीं है—यहां के बच्चे हर साल जवाहर नवोदय विद्यालय, सैनिक स्कूल और एकलव्य आवासीय विद्यालयों की प्रवेश परीक्षाओं में परचम लहराते हैं। 

टॉपर देने वाले स्कूल की दुर्दशा 

जिला स्तर की मेरिट सूची हो या 15 अगस्त और 26 जनवरी की राज्यस्तरीय प्रतियोगिताएं, यहां के छात्र हमेशा अव्वल आते रहे हैं। यही वजह है कि आसपास के गांवों के अभिभावक अपने बच्चों का दाखिला इसी स्कूल में कराना पसंद करते हैं। लेकिन हाल ही में एक शिक्षक के तबादले और एक शिक्षिका को दूसरे स्कूल में अटैच (व्यवस्था में) भेज देने से पढ़ाई पूरी तरह ठप हो गई। मजबूरी में अभिभावकों और बच्चों को यह कठोर कदम उठाना पड़ा।

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Keertiman

बच्चों ने किया चक्काजाम 
कलम छोड़ हाथों में बैनर: 'हमें शिक्षक दो' के लगे नारे

सड़क पर बैठे मासूमों के हाथों में किताबें होने के बजाय मांग की तख्तियां थीं। बच्चे एक ही सुर में चिल्ला रहे थे—"हमें शिक्षक चाहिए, हमारी मांग पूरी करो!" ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि बच्चों का यह प्रदर्शन किसी राजनीति का हिस्सा नहीं है, बल्कि अपनी पढ़ाई को लेकर पैदा हुई जायज चिंता का नतीजा है। जिन बच्चों को क्लास में होना चाहिए था, उन्हें चक्काजाम करने के लिए मजबूर होना पड़ा, जो राज्य की प्राथमिक शिक्षा व्यवस्था की पोल खोलता है। 

चक्काजाम की खबर फैलते ही हरकत में प्रशासन 

ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि बच्चों का यह प्रदर्शन किसी राजनीति का हिस्सा नहीं है, बल्कि अपनी पढ़ाई को लेकर पैदा हुई जायज चिंता का नतीजा है। जिन बच्चों को क्लास में होना चाहिए था, उन्हें चक्काजाम करने के लिए मजबूर होना पड़ा, जो राज्य की प्राथमिक शिक्षा व्यवस्था की पोल खोलता है। आंदोलन और चक्काजाम की खबर फैलते ही भंवरपुर चौकी से पुलिस बल मौके पर पहुंचा। इसके कुछ ही देर बाद तहसीलदार और विकासखंड शिक्षा अधिकारी (BEO) भी स्थिति संभालने पहुंचे। 

बच्चों का आक्रोश देख लिया तुरंत फैसला 

अधिकारियों ने जब बच्चों और ग्रामीणों से सीधी बात की, तो उन्हें जमीनी हकीकत का अहसास हुआ। बच्चों का आक्रोश और पढ़ाई का नुकसान देखते हुए प्रशासन ने तुरंत फैसला लिया और दूसरी जगह भेजी गई शिक्षिका को वापस करनापाली स्कूल में पदस्थ कर दिया। शिक्षिका की वापसी से चक्काजाम तो खत्म हो गया और बच्चों को तात्कालिक राहत मिली, लेकिन ग्रामीणों का गुस्सा शांत नहीं हुआ है। 

कागजी योजनाओं से नहीं सुधरेगा शिक्षा का स्तर 

ग्रामीणों का कहना है कि स्कूल में पहले 3 शिक्षक हुआ करते थे। इतने बेहतरीन परिणाम देने वाले संस्थान में शिक्षकों के पद खाली रखना किसी भी तरह से तर्कसंगत नहीं है। करनापाली के इन छोटे-छोटे बच्चों की यह आवाज पूरे शिक्षा विभाग के लिए एक सीधी चेतावनी है कि सिर्फ कागजी योजनाओं से शिक्षा का स्तर नहीं सुधरेगा, उसके लिए क्लासरूम में शिक्षकों का होना बेहद जरूरी है।
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