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विदेश मंत्रालय का बड़ा बयान
विदेश मंत्रालय का बड़ा बयान
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विदेश मंत्रालय का बड़ा बयान : पासपोर्ट सिर्फ विदेश यात्रा का दस्तावेज, यह भारतीय नागरिकता का पक्का सबूत नहीं, जानिए फिर कौन सा सरकारी कागज साबित करेगा आपकी नागरिकता

विदेश मंत्रालय (MEA) ने साफ किया है कि पासपोर्ट केवल विदेश यात्रा का दस्तावेज है, यह भारतीय नागरिकता का कानूनी प्रमाण नहीं है. इस बयान से राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है. विपक्ष के सवालों के बीच कानूनी जानकारों के मुताबिक, केवल जन्म प्रमाण पत्र या नागरिकता प्रमाण पत्र ही नागरिकता का असली और पुख्ता कानूनी सबूत है.

विशेष संवाददाता
25 Jun 2026, 05:00 PM
दिल्ली
भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) के एक हालिया बयान ने देश में नागरिकता के दस्तावेजों को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है। पासपोर्ट सेवा दिवस के मौके पर आयोजित एक कार्यक्रम में विदेश मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी ने साफ किया कि पासपोर्ट केवल विदेश यात्रा के लिए एक जरूरी कागज है, इसे भारतीय नागरिकता का कानूनी प्रमाण नहीं माना जा सकता। इस बयान के सामने आते ही सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक हलचल तेज हो गई है कि अगर पूरी जांच और पुलिस वेरिफिकेशन के बाद बनने वाला पासपोर्ट भी नागरिकता का सबूत नहीं है, तो फिर असली प्रमाण क्या है।

जावेद अख्तर और विपक्ष ने खड़े किए सवाल, सरकार ने दिया कानूनों का हवाला

इस बयान पर मशहूर गीतकार जावेद अख्तर और शिवसेना नेता आदित्य ठाकरे सहित कई जानी-मानी हस्तियों ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। जावेद अख्तर ने सरकार की इस बात को अजीब बताते हुए पूछा कि क्या सरकार को खुद अपनी जांच प्रक्रिया पर भरोसा नहीं है। वहीं आदित्य ठाकरे ने सवाल उठाया कि इस रुख से विदेशों में भारतीय पासपोर्ट की साख कमजोर हो सकती है। इसके जवाब में सरकारी सूत्रों और कानूनी जानकारों ने साल 1967 के पासपोर्ट एक्ट और 1955 के नागरिकता कानून का हवाला दिया है। जानकारों के मुताबिक, तकनीकी और कानूनी रूप से पासपोर्ट कुछ विशेष परिस्थितियों में गैर-नागरिकों को भी जारी किया जा सकता है. बॉम्बे हाई कोर्ट ने भी 2013 के अपने एक फैसले में इस बात को सही माना था।

पासपोर्ट हमेशा सरकार की प्रॉपर्टी, जानिए फिर क्या है नागरिकता का असली प्रूफ

पूर्व राजनयिक निरुपमा मेनन राव ने दोनों कानूनों के बीच का अंतर समझाते हुए बताया कि पासपोर्ट का मुख्य काम सिर्फ विदेश यात्रा के दौरान धारक की पहचान और उसकी सुरक्षा सुनिश्चित करना है। पासपोर्ट हमेशा सरकार की संपत्ति होती है और इसे कभी भी वापस लिया जा सकता है, जबकि किसी की नागरिकता को इतनी आसानी से नहीं छीना जा सकता. सरकार के मुताबिक, जन्म प्रमाण पत्र (बर्थ सर्टिफिकेट) या कानूनी तौर पर मिला नागरिकता प्रमाण पत्र ही नागरिक होने का सबसे पुख्ता दस्तावेज है। देश में नागरिकता अधिनियम 1955 के तहत जन्म, वंश या रजिस्ट्रेशन जैसे पांच तरीकों से नागरिकता तय होती है। जिन लोगों ने बाद में भारत की नागरिकता ली है, उन्हें नागरिकता प्रमाण पत्र जारी किया जाता है, जबकि जन्म से यहां रह रहे अधिकांश भारतीयों के पास बर्थ सर्टिफिकेट ही मुख्य आधार होता है।
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