जांजगीर-चांपा जिले के बिर्रा थाना क्षेत्र के करही गांव में हुए चर्चित गोलीकांड और 19 वर्षीय युवक आयुष कश्यप की हत्या मामले का आखिरकार पुलिस ने 29 दिन बाद खुलासा कर दिया है। इस हाईप्रोफाइल हत्याकांड ने पूरे इलाके में दहशत फैला दी थी। पुलिस जांच में सामने आया है कि यह हत्या अचानक नहीं, बल्कि सुनियोजित साजिश का हिस्सा थी। हत्या के पीछे रेत खनन और परिवहन कारोबार में बढ़ती प्रतिस्पर्धा मुख्य वजह बनी। पुलिस के मुताबिक, बदमाशों का असली निशाना आयुष कश्यप ही था। आरोपियों ने घर में घुसकर गोलीबारी कर परिवार में डर और दहशत फैलाने की भी कोशिश की थी।
मामले में तीन आरोपियों अमित टंडन, भूषण बघेल और हेमंत बघेल को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है, जबकि मुख्य साजिशकर्ता को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है।
जांच में पता चला है कि मुख्य साजिशकर्ता और मृतक आयुष कश्यप दोनों रेत खनन और परिवहन व्यवसाय से जुड़े हुए थे। आयुष ने हाल के दिनों में हाइवा और जेसीबी मशीनें खरीदकर अपना कारोबार तेजी से बढ़ाया था, जिससे प्रतिस्पर्धियों को आर्थिक नुकसान होने लगा था। इसी वजह से आयुष को रास्ते से हटाने की साजिश रची गई।
पुलिस के अनुसार, हत्या के लिए सुपारी दी गई थी। आरोपियों को शुरुआत में 50-50 हजार रुपये देने और भविष्य में कारोबार में लाभ मिलने पर अतिरिक्त रकम देने का वादा किया गया था। हत्या में इस्तेमाल पिस्टल भी मुख्य साजिशकर्ता ने ही उपलब्ध कराई थी।
ऐसे हुई थी वारदात
23 और 24 अप्रैल की दरम्यानी रात बदमाशों ने सम्मेलाल कश्यप के घर में घुसकर ताबड़तोड़ फायरिंग की थी। इस हमले में बड़े बेटे आयुष कश्यप की मौके पर मौत हो गई थी, जबकि छोटा बेटा आशुतोष घायल हो गया था। घटना के बाद पूरे गांव में भय का माहौल बन गया था। वारदात के दौरान तीन राउंड फायरिंग घर के अंदर की गई थी, जबकि बाहर निकलते समय भी आरोपियों ने गोली चलाई। पुलिस के मुताबिक, बदमाशों ने आयुष के पिता को यह भी कहा था कि “तुम्हारे बेटे को मारने आए हैं”, ताकि परिवार और गांव में दहशत फैल सके।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने चार विशेष टीमें गठित की थीं। करीब 35 अधिकारी और कर्मचारी लगातार जांच में जुटे रहे। जांच के दौरान 200 से ज्यादा CCTV फुटेज खंगाले गए और सैकड़ों लोगों से पूछताछ की गई। पुलिस टीम ने छत्तीसगढ़ सहित सात राज्यों में दबिश दी। जांच के दौरान पुलिस को ‘आई गैंग’ नामक ग्रुप से जुड़े युवकों की जानकारी मिली।
इनमें कुछ युवकों की गतिविधियां संदिग्ध पाई गईं। पुलिस को पता चला कि घटना के बाद दो युवक गुजरात भाग गए थे। इसके बाद पुलिस ने उन्हें हिरासत में लेकर पूछताछ की, जहां से पूरी साजिश का खुलासा हुआ।
आरोपियों के अलग-अलग मकसद आए सामने
पुलिस जांच में गिरफ्तार आरोपियों के अलग-अलग कारण सामने आए हैं। आरोपी अमित टंडन किराना दुकान चलाता था और भारी कर्ज में डूबा हुआ था। आर्थिक लालच में उसने हत्या की साजिश में हिस्सा लिया। दूसरा आरोपी भूषण बघेल पहले भी सम्मेलाल कश्यप को मारने की सुपारी लेने की बात कबूल कर चुका है। पुलिस के मुताबिक, उसके परिवार पर सम्मेलाल का 4 से 5 लाख रुपये उधार था और वह रकम लौटाना नहीं चाहता था। साथ ही वह कश्यप परिवार की आर्थिक प्रगति से जलता था। तीसरा आरोपी हेमंत बघेल छड़-सीमेंट का कारोबार करता है। आयुष के उसी व्यवसाय में उतरने से उसे नुकसान हो रहा था, जिसके चलते वह हत्या की साजिश में शामिल हुआ।
परिवार ने जताया असंतोष
हालांकि पुलिस ने मामले का खुलासा कर दिया है, लेकिन मृतक आयुष कश्यप के पिता सम्मेलाल कश्यप अभी भी संतुष्ट नहीं हैं। उनका आरोप है कि इस हत्या के पीछे रेत खनन से जुड़े बड़े कारोबारी हैं, जिन्होंने छोटे लोगों को मोहरा बनाकर उनके बेटे की हत्या करवाई है। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष और गहराई से जांच कराने की मांग की है। पुलिस ने हत्या में इस्तेमाल पिस्टल, मैगजीन, खाली मैगजीन और वारदात में प्रयुक्त बाइक जब्त कर ली है। वहीं CCTV कैमरे तोड़ने वाले तीन अन्य आरोपियों की तलाश जारी है।
पुलिस की एक टीम जम्मू भी रवाना की गई है। मुख्य साजिशकर्ता अभी पुलिस हिरासत में है और उससे लगातार पूछताछ की जा रही है। ऐसे में आने वाले दिनों में इस सनसनीखेज हत्याकांड से जुड़े और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।
