CBSE Three Language Policy: सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) को कक्षा 6 में पढ़ रहे मौजूदा छात्रों को भी तीन-भाषा प्रणाली से राहत देने पर विचार करने को कहा है। अदालत ने कहा कि जिस तरह कक्षा 7, 8 और 9 के वर्तमान छात्रों को छूट दी गई है, उसी तरह कक्षा 6 के छात्रों के मामले में भी समान दृष्टिकोण अपनाया जा सकता है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ, जिसमें न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना शामिल थे, ने केंद्र और CBSE की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता तथा अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी से इस मुद्दे पर विचार करने को कहा।
नीति मामला CBSE की उस नीति से जुड़ा है, जिसके तहत राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 और राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा (NCF) 2023 के अनुरूप छात्रों के लिए तीन भाषाओं का अध्ययन जरूरी किया गया है। इस व्यवस्था में कम से कम दो भाषाएं भारतीय मूल की होनी आवश्यक हैं। इससे पहले 17 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने CBSE से कहा था कि वह वर्ष 2027 से शुरू होने वाले नए शैक्षणिक सत्र में कक्षा 6 के छात्रों पर इस नीति को लागू करने पर विचार करे।
कक्षा 7-9 को राहत, कक्षा 6 पर फैसला बाकी
CBSE के अनुसार, वर्तमान में कक्षा 7, 8 और 9 में पढ़ रहे छात्रों को कक्षा 10 में पहुंचने के बाद तीसरी भाषा की बोर्ड परीक्षा नहीं देनी होगी। हालांकि, कक्षा 6 के मौजूदा छात्रों को लेकर अभी अंतिम फैसला नहीं लिया गया है। सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने संकेत दिया कि वह कक्षा 6 के वर्तमान बैच को इस नीति से छूट देने के पक्ष में नहीं है। सरकार का कहना है कि छात्रों को इसी शैक्षणिक सत्र से नए भाषा ढांचे के अनुसार पढ़ाई शुरू करनी चाहिए।99 प्रतिशत स्कूलों ने अपनाई नीति: केंद्र
केंद्र सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि CBSE से जुड़े करीब 99 प्रतिशत स्कूलों ने तीन-भाषा नीति को लागू कर लिया है और उनके पास इसके लिए जरूरी संसाधन उपलब्ध हैं। वहीं लगभग 1.2 प्रतिशत स्कूलों को ही कार्यान्वयन में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची ने सुझाव दिया कि कक्षा 6 के छात्रों के लिए इस व्यवस्था को कुछ समय के लिए टाला जा सकता है, ताकि CBSE को जरूरी तैयारी और बुनियादी ढांचा विकसित करने का अतिरिक्त समय मिल सके। अब इस मामले में केंद्र सरकार और CBSE को कक्षा 6 के छात्रों के लिए भी छूट देने के सुझाव पर विचार करना होगा। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद इस मुद्दे पर आगे की कार्रवाई का इंतजार है।
