पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के बाद राज्य की राजनीति नए दौर में पहुंच गई है। चुनाव नतीजों के साथ सिर्फ सरकार ही नहीं बदली, बल्कि राजनीतिक दिशा में भी बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। करीब 15 वर्षों तक सत्ता में रही तृणमूल कांग्रेस की सरकार की जगह अब भाजपा ने सरकार बनाई है।
9 मई को शुभेंदु अधिकारी ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। इसके साथ ही पश्चिम बंगाल में भाजपा की पहली सरकार ने कामकाज संभाल लिया। सरकार बनने के बाद प्रशासन, कानून व्यवस्था और जनकल्याण से जुड़े कई फैसलों पर तेजी से काम शुरू किया गया।
शुरुआती दिनों में लिए कई अहम फैसले
नई सरकार ने पहले दो सप्ताह के भीतर कई नीतिगत बदलाव शुरू किए हैं। सरकार का कहना है कि इन फैसलों का उद्देश्य चुनावी संकल्पों को पूरा करना और शासन व्यवस्था में सुधार लाना है। साथ ही पिछली सरकार की कई नीतियों की समीक्षा भी की जा रही है।
बदल गया राजनीतिक माहौल
पिछले डेढ़ दशक तक पश्चिम बंगाल की राजनीति का केंद्र ममता बनर्जी रहीं। राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था से लेकर सरकारी योजनाओं और स्थानीय राजनीति तक उनका प्रभाव दिखाई देता था। सत्ता परिवर्तन के बाद अब राज्य में भाजपा के नेतृत्व में नया राजनीतिक समीकरण बनता नजर आ रहा है।यूसीसी लागू करने की दिशा में पहल
नई सरकार ने चुनाव के दौरान किए गए प्रमुख वादों पर काम शुरू कर दिया है। इसी क्रम में पश्चिम बंगाल में समान नागरिक संहिता यानी यूसीसी लागू करने की दिशा में विधायी प्रक्रिया शुरू की गई है। सरकार का कहना है कि इस व्यवस्था के तहत विवाह, तलाक, गोद लेने और उत्तराधिकार जैसे नागरिक मामलों में सभी समुदायों के लिए समान कानून लागू करने का लक्ष्य है। हालांकि इस विषय पर आगे की प्रक्रिया विधानसभा और कानूनी प्रक्रिया के अनुसार आगे बढ़ेगी।
आगे क्या होगा
सरकार के शुरुआती फैसलों पर अब राजनीतिक दलों और आम लोगों की नजर बनी हुई है। आने वाले समय में यह साफ होगा कि नई नीतियों का राज्य की राजनीति, प्रशासन और जनता पर कितना असर पड़ता है।