ब्रिटेन की राजनीति में सोमवार (22 जून) को बड़ा घटनाक्रम सामने आया, जब प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने अपने पद से इस्तीफा देने का ऐलान कर दिया। हालांकि, नए प्रधानमंत्री के चुने जाने तक वह कार्यवाहक प्रधानमंत्री के रूप में अपनी जिम्मेदारियां निभाते रहेंगे। उनके इस्तीफे के साथ ही लेबर पार्टी में नए नेतृत्व की प्रक्रिया शुरू हो गई है।स्टार्मर के इस्तीफे को लेकर पिछले कई दिनों से अटकलें लगाई जा रही थीं। पार्टी के भीतर बढ़ते असंतोष और लगातार बढ़ते दबाव के बीच आखिरकार उन्होंने पद छोड़ने का फैसला लिया। माना जा रहा है कि इस कदम से लेबर पार्टी में नेतृत्व परिवर्तन का रास्ता साफ हो गया है।
नेतृत्व क्षमता पर सवाल
सिर्फ दो साल पहले ही कीर स्टार्मर ने लेबर पार्टी को ऐतिहासिक जीत दिलाते हुए भारी बहुमत के साथ सत्ता में वापसी कराई थी। उनकी जीत को ब्रिटिश राजनीति में लेबर की बड़ी वापसी माना गया था, लेकिन सत्ता संभालने के बाद उनकी सरकार कई विवादों और नीतिगत फैसलों को लेकर लगातार आलोचनाओं में घिरती रही। कई बार नीतियों में बदलाव (यू-टर्न) और विवादित नियुक्तियों ने उनकी नेतृत्व क्षमता पर सवाल खड़े किए।
विवादित निर्णयों
बुजुर्गों के लिए विंटर फ्यूल भुगतान से जुड़ा फैसला और पीटर मैंडेलसन को वॉशिंगटन में ब्रिटेन का राजदूत नियुक्त करना सरकार के सबसे विवादित निर्णयों में शामिल रहा। इन मुद्दों के कारण पार्टी के भीतर असंतोष बढ़ा और जनमत सर्वेक्षणों में भी लेबर पार्टी तथा स्टार्मर की लोकप्रियता में गिरावट दर्ज की गई। कई सांसदों का मानना था कि नेतृत्व में बदलाव नहीं होने पर अगले आम चुनाव में पार्टी को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।
प्रधानमंत्री दावेदार
स्टार्मर के इस्तीफे के बाद नए प्रधानमंत्री की दौड़ में एंडी बर्नहम सबसे मजबूत दावेदार माने जा रहे हैं। हाल ही में उन्होंने मेकरफील्ड उपचुनाव में जीत दर्ज कर अपनी दावेदारी मजबूत की है। वहीं पूर्व स्वास्थ्य मंत्री वेस स्ट्रीटिंग का नाम भी संभावित उम्मीदवारों में शामिल है, हालांकि उनके समर्थन को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। पार्टी के नियमों के अनुसार नेतृत्व की चुनौती पेश करने के लिए लेबर सांसदों के कम से कम 20 प्रतिशत समर्थन की आवश्यकता होती है।अब सभी की नजरें लेबर पार्टी की नेतृत्व चुनाव प्रक्रिया पर टिकी हैं। नया नेता चुने जाने के बाद वही ब्रिटेन का अगला प्रधानमंत्री बनेगा, जबकि तब तक कीर स्टार्मर कार्यवाहक प्रधानमंत्री के रूप में पद पर बने रहेंगे।