जंग : जगदलपुर के इंदिरा वार्ड में चुनावी संग्राम, कांग्रेस का गढ़ बचाने की चुनौती
जगदलपुर नगर निगम के इंदिरा वार्ड में पार्षद पद के लिए उपचुनाव के तहत मतदान जारी है। कुल 1,542 मतदाता अपने नए पार्षद का चुनाव कर रहे हैं। भाजपा, कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के बीच त्रिकोणीय मुकाबला है। करीब 30 वर्षों से कांग्रेस का गढ़ रहे इस वार्ड में कांग्रेस सीट बचाने की कोशिश कर रही है, जबकि भाजपा इसे जीतकर राजनीतिक बढ़त हासिल करना चाहती है।
जगदलपुर नगर निगम के इंदिरा वार्ड में पार्षद पद के लिए हो रहे उपचुनाव के तहत सोमवार को मतदान शांतिपूर्ण ढंग से जारी है। वार्ड के कुल 1,542 मतदाता अपने नए जनप्रतिनिधि के चयन के लिए मतदान कर रहे हैं। निर्वाचन आयोग द्वारा मतदान की व्यवस्था दो मतदान केंद्रों में की गई है, जहां सुबह 8 बजे से शाम 5 बजे तक वोट डाले जाएंगे। मतदान केंद्रों पर सुरक्षा और आवश्यक व्यवस्थाओं के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं।
इस उपचुनाव में भाजपा, कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के प्रत्याशियों के बीच सीधा मुकाबला देखने को मिल रहा है। चुनावी मैदान में भाजपा ने मनोहर दत्त तिवारी को उम्मीदवार बनाया है, जबकि कांग्रेस ने रामकृष्ण तिवारी पर भरोसा जताया है। वहीं आम आदमी पार्टी की ओर से रुबीना कुरैशी चुनावी मुकाबले को रोचक बनाने में जुटी हुई हैं। तीनों दलों ने प्रचार अभियान के दौरान मतदाताओं तक पहुंचने के लिए पूरी ताकत झोंक दी थी।
घर-घर पहुंचकर मांगा गया समर्थन
उपचुनाव को लेकर पिछले कई दिनों से वार्ड में चुनावी माहौल गर्म रहा। भाजपा, कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के नेताओं एवं कार्यकर्ताओं ने घर-घर जाकर जनसंपर्क किया और मतदाताओं से अपने पक्ष में मतदान करने की अपील की। स्थानीय मुद्दों, विकास कार्यों और जनसुविधाओं को चुनावी बहस का प्रमुख विषय बनाया गया। इंदिरा वार्ड को लंबे समय से कांग्रेस का अभेद्य गढ़ माना जाता रहा है। पिछले लगभग तीन दशकों से इस वार्ड में कांग्रेस का दबदबा कायम है। यह सीट कांग्रेस के वरिष्ठ पार्षद अब्दुल रशीद के निधन के बाद रिक्त हुई थी, जिसके चलते उपचुनाव कराया जा रहा है। अब्दुल रशीद लगातार चार बार इस वार्ड से पार्षद निर्वाचित हुए थे और इससे पहले उनकी माता भी दो बार वार्ड का प्रतिनिधित्व कर चुकी थीं।
भाजपा के लिए प्रतिष्ठा
इस चुनाव को केवल एक वार्ड का चुनाव नहीं बल्कि राजनीतिक प्रतिष्ठा की लड़ाई के रूप में भी देखा जा रहा है। कांग्रेस जहां अपने परंपरागत वोट बैंक और मजबूत पकड़ को बनाए रखने की कोशिश कर रही है, वहीं भाजपा इस बार कांग्रेस के गढ़ में सेंध लगाकर बड़ी राजनीतिक जीत दर्ज करने की रणनीति पर काम कर रही है। नगर निगम में भाजपा की सत्ता होने और क्षेत्रीय विधायक भी भाजपा के होने के कारण यह सीट पार्टी की साख से भी जुड़ी मानी जा रही है।
आम आदमी पार्टी भी बिगाड़ सकती है समीकरण
आम आदमी पार्टी भले ही इस वार्ड में पहली बार बड़े स्तर पर चुनावी चुनौती पेश कर रही हो, लेकिन पार्टी के उम्मीदवार की मौजूदगी मुकाबले को त्रिकोणीय बना रही है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आप के वोटों का असर जीत-हार के अंतर को प्रभावित कर सकता है। मतदान प्रक्रिया पूरी होने के बाद मतगणना 4 जून को होगी। इसी दिन यह स्पष्ट हो जाएगा कि कांग्रेस अपना परंपरागत गढ़ बचाने में सफल रहती है या भाजपा ऐतिहासिक जीत दर्ज कर वार्ड की राजनीतिक तस्वीर बदल देती है। आम आदमी पार्टी का प्रदर्शन भी सभी दलों के लिए महत्वपूर्ण संकेत देने वाला माना जा रहा है।
क्या है इस उपचुनाव में दांव पर?
• कांग्रेस के सामने 30 वर्षों से कायम अपने मजबूत गढ़ को बचाने की चुनौती।
• भाजपा के लिए कांग्रेस के पारंपरिक वोट बैंक में सेंध लगाकर बड़ी राजनीतिक सफलता हासिल करने का अवसर।
• आम आदमी पार्टी के लिए स्थानीय राजनीति में अपनी उपस्थिति मजबूत करने की परीक्षा।
• भाजपा विधायक और नगर निगम में भाजपा की सरकार होने के कारण यह चुनाव पार्टी की प्रतिष्ठा से भी जुड़ा हुआ है।
• 4 जून को आने वाला परिणाम जगदलपुर की स्थानीय राजनीति के भविष्य की दिशा तय करने वाला माना जा रहा है।