बिहार के भोजपुर जिले में हुए भरत तिवारी एनकाउंटर को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। घटना के बाद से सोशल मीडिया से लेकर सड़कों तक विरोध प्रदर्शन देखने को मिल रहे हैं। स्थानीय लोगों और परिजनों का आरोप है कि भरत तिवारी ने पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया था, इसके बावजूद उसका एनकाउंटर किया गया। इसी मुद्दे को लेकर अब मामला देश की सर्वोच्च अदालत तक पहुंच गया है।
भरत तिवारी एनकाउंटर की स्वतंत्र जांच की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गई है। याचिका में मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) से कराने की मांग की गई है। साथ ही अदालत से इस मामले पर जल्द सुनवाई करने का अनुरोध भी किया गया है।
निष्पक्षता पर सवाल
सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता विशाल तिवारी द्वारा दाखिल याचिका में कहा गया है कि यदि जांच उसी विभाग के अधिकारियों द्वारा की जाएगी, जिसके कर्मियों पर आरोप लगे हैं, तो निष्पक्षता पर सवाल खड़े होना स्वाभाविक है। इसी आधार पर पूरे मामले की जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी, विशेष रूप से CBI, को सौंपने की मांग की गई है।
याचिका में यह भी आग्रह किया गया है कि सर्वोच्च न्यायालय के किसी सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति गठित की जाए, जो पूरे मामले की निगरानी करते हुए जांच प्रक्रिया को पारदर्शी बनाए।
सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल
भरत तिवारी के कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो चुके हैं, जिनमें वह ग्रामीणों की विभिन्न मांगों को लेकर आंदोलन करते और प्रशासनिक अधिकारियों के खिलाफ मुखर दिखाई देता है। स्थानीय लोगों का दावा है कि इसी वजह से वह प्रशासन के निशाने पर था।
ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि कुछ दिन पहले एक प्रशासनिक अधिकारी के साथ हुए विवाद के बाद भरत तिवारी के खिलाफ कार्रवाई की गई। लोगों का कहना है कि 17 जून की सुबह करीब 8:45 बजे उसने अपना हथियार छोड़कर आत्मसमर्पण कर दिया था, लेकिन इसके बाद भी पुलिस ने उसे गोली मार दी।
घटना के अगले दिन, 18 जून को, परिजनों और ग्रामीणों ने भरत तिवारी के शव को सड़क पर रखकर प्रदर्शन किया और एनकाउंटर की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई। इस दौरान इलाके में कई घंटों तक आवागमन प्रभावित रहा।
एनकाउंटर के बाद मामले की जांच
एनकाउंटर के बाद कई राजनीतिक दलों के नेताओं ने भरत तिवारी के परिजनों से मुलाकात की है और मामले की निष्पक्ष जांच का भरोसा दिलाया है। वहीं राज्य सरकार पर भी लगातार दबाव बढ़ रहा है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए बिहार सरकार की ओर से जांच के आदेश दिए जा चुके हैं। उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भी पूरे घटनाक्रम की जांच कराने की बात कही है। हालांकि, अब सभी की नजरें सुप्रीम कोर्ट की आगामी सुनवाई और संभावित जांच प्रक्रिया पर टिकी हुई हैं।