ग्राम पंचायत कुसमी के 52 परिवारों ने अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) एवं दण्डाधिकारी बागबाहरा को आवेदन सौंपकर ग्राम पंचायत द्वारा जारी अतिक्रमण हटाने संबंधी नोटिस पर रोक लगाने की मांग की है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि गांव में कुल 111 लोगों द्वारा शासकीय भूमि पर अतिक्रमण किया गया है, लेकिन कार्रवाई केवल 52 परिवारों के खिलाफ की जा रही है।
आवेदन में बताया गया है कि ग्राम कुसमी की शासकीय घास मद की भूमि पर वे पिछले कई वर्षों से मकान एवं बाड़ी बनाकर निवास कर रहे हैं। उनका कहना है कि वर्ष 1998 में ग्राम पंचायत द्वारा उन्हें भूमि उपयोग संबंधी अधिकार प्रदान किए गए थे तथा बाद में शासन की विभिन्न योजनाओं के तहत प्रधानमंत्री आवास एवं शौचालय का निर्माण भी कराया गया। वर्तमान में वे अपने परिवार के साथ उक्त मकानों में निवास कर रहे हैं।
अतिक्रमण हटाने के निर्देश
आवेदकों ने बताया कि अतिक्रमण संबंधी मामला पहले से ही तहसीलदार कोमाखान न्यायालय में विचाराधीन है। इसके बावजूद ग्राम पंचायत द्वारा 15 जून 2026 को पुनः नोटिस जारी कर तीन दिनों के भीतर अतिक्रमण हटाने का निर्देश दिया गया है। उनका आरोप है कि पटवारी द्वारा प्रस्तुत सूची में 111 अतिक्रमणकारियों का उल्लेख होने के बावजूद कार्रवाई केवल चुनिंदा लोगों पर की जा रही है।
नोटिस पर रोक लगाने के मांग
ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने पूर्व में भी जनदर्शन के माध्यम से कलेक्टर महासमुंद को शिकायत सौंपकर पूरे गांव में हुए अतिक्रमण की निष्पक्ष जांच की मांग की थी। उनका आरोप है कि ग्राम पंचायत चुनाव की गुटबाजी और द्वेषपूर्ण भावना के कारण चुनिंदा परिवारों को निशाना बनाया जा रहा है। आवेदन में ग्रामीणों ने कहा है कि यदि उनके मकान और शौचालय हटाए जाते हैं तो वे बेघर हो जाएंगे तथा उन्हें अपूरणीय क्षति होगी। इसलिए उन्होंने एसडीएम से ग्राम पंचायत द्वारा जारी नोटिस पर रोक लगाने तथा मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
कोई नहीं होगा बेघर
सुनवाई के दौरान ग्रामीणों ने एसडीएम के समक्ष मौखिक रूप से यह भी शिकायत की कि अतिक्रमण नहीं हटाए जाने को लेकर कुछ लोगों द्वारा दुकानों में सामान देने से मना करने, ट्रैक्टरों को रोकने तथा बच्चों को आने-जाने से रोकने जैसी बातें कही जा रही हैं। इस पर एसडीएम ने ग्रामीणों से कहा कि यदि कोई व्यक्ति इस प्रकार की हरकत कर रहा है तो उसके नाम सहित लिखित आवेदन प्रस्तुत करें, ताकि जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जा सके। साथ ही उन्होंने ग्रामीणों को आश्वस्त करते हुए कहा कि वे परेशान न हों और किसी को भी बेघर नहीं किया जाएगा।