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CHO workers protest (Image Source: AI Generated)
CHO workers protest (Image Source: AI Generated)
रायपुर संभाग

Chhattisgarh CHO Protest: प्रोत्साहन राशि और जांच के विरोध में CHO संवर्ग का अनिश्चितकालीन आंदोलन

Chhattisgarh CHO Protest: सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों (CHO) ने लंबित प्रोत्साहन राशि और जांच प्रक्रिया के विरोध में अनिश्चितकालीन ऑनलाइन रिपोर्टिंग बहिष्कार शुरू किया है। संघ ने NHM के 9 अक्टूबर के पत्र को निरस्त या संशोधित करने, बकाया राशि का भुगतान करने और निष्पक्ष जांच की मांग की है।

अप्पू धीवर |  कीर्तिमान न्यूज
प्रकाशित: 15 Oct 2026, 03:21 PM · 3 मिनट पढ़ने का समय
आरंग
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश
Chhattisgarh CHO Protest: छत्तीसगढ़ के आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में तैनात सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों (CHO) और राज्य स्वास्थ्य विभाग के बीच तनातनी अब खुले आंदोलन का रूप ले चुकी है। 'छत्तीसगढ़ प्रदेश सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी संघ' (CGCHOU) के आह्वान पर आज, 15 अक्टूबर से राज्यभर के CHO अधिकारियों ने सभी तरह की ऑनलाइन रिपोर्टिंग का अनिश्चितकालीन बहिष्कार शुरू कर दिया है। अचानक काम ठप होने से राज्य के ग्रामीण इलाकों में रोजाना की स्वास्थ्य सेवाओं और विभागीय आंकड़े जुटाने की व्यवस्था चरमरा सकती है।

आखिर क्या है विवाद की मुख्य वजह ? 

इस पूरे विवाद की जड़ राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के राज्य कार्यालय द्वारा 9 अक्टूबर को जारी किया गया एक पत्र है। संघ का आरोप है कि इंसेंटिव (प्रोत्साहन राशि) में गड़बड़ी की जांच के नाम पर महकमा सिर्फ CHO संवर्ग को ही निशाना बना रहा है। स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि आरोग्य केंद्रों में काम किसी एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि पूरी टीम का होता है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों को जमीनी स्तर पर लागू करने से लेकर ऑनलाइन रिपोर्टिंग तक में हर कर्मचारी की भूमिका होती है। ऐसे में किसी भी तरह की कमी या स्वास्थ्य सूचकांकों में गिरावट के लिए अकेले CHO को कटघरे में खड़ा करना पूरी तरह गैर-वाजिबी और एकतरफा कदम है।

8-9 महीनों से नहीं मिला इंसेंटिव, कर्मचारियों में रोष 

जांच के विवाद के साथ-साथ बकाए भुगतान को लेकर भी कर्मचारियों में गहरा असंतोष है। मैदानी स्तर पर दिन-रात सेवाएं दे रहे स्वास्थ्य अधिकारियों को बीते 8 से 9 महीनों से इंसेंटिव की राशि नहीं मिली है। कर्मियों का कहना है कि एक तरफ महीनों से उनका हक रोका गया है, तो दूसरी तरफ विभाग प्रोत्साहन राशि के नाम पर ही उन पर मनमाने आरोप मढ़ रहा है।

क्या हैं संघ की प्रमुख मांगें ? 

आंदोलन पर आमादा संघ ने प्रशासन के सामने तीन मुख्य शर्तें रखी हैं: 
  • 9 अक्टूबर के विवादित पत्र को तुरंत वापस लिया जाए या उसमें जरूरी संशोधन किए जाएं। 
  • पिछले 8-9 महीनों से रुकी हुई प्रोत्साहन राशि का अविलंब भुगतान हो। 
  • गड़बड़ियों की जांच प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी और न्यायसंगत बनाया जाए।
संघ के पदाधिकारियों के अनुसार, उन्होंने विभाग को अपनी मांगों पर विचार करने के लिए 10 दिनों का समय दिया था। साथ ही स्पष्ट कर दिया था कि यदि तय समय में मसला नहीं सुलझा, तो वे बेमियादी आंदोलन के लिए मजबूर होंगे। इसी रणनीति के तहत जिला स्तर पर कलेक्टर, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) और खंड चिकित्सा अधिकारी (BMHO) को पहले ही लिखित ज्ञापन सौंपा जा चुका था। सुनवाई न होने की स्थिति में आखिरकार आज से ऑनलाइन कामकाज पूरी तरह ठप कर दिया गया है। अब देखना यह होगा कि राज्य सरकार और स्वास्थ्य विभाग इस गतिरोध को खत्म करने के लिए क्या रुख अपनाते हैं, क्योंकि गतिरोध लंबा खिंचा तो इसका सीधा असर गांव-देहात के मरीजों पर पड़ेगा।
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