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A historic unbeaten 400-run innings in the Ranji Trophy (Image Source: Keertiman Media)
A historic unbeaten 400-run innings in the Ranji Trophy (Image Source: Keertiman Media)
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Chinmay Suthar: मुंबई से मिजोरम तक का सफर, मजबूरी का फैसला बना वरदान, चिन्मय सुथार ने रणजी ट्रॉफी में ठोके ऐतिहासिक 400 रन!

Chinmay Suthar: मुंबई में पर्याप्त मौके नहीं मिलने के बाद मिजोरम की ओर से खेलने वाले चिन्मय सुथार ने 400 रन की नाबाद पारी खेलकर घरेलू क्रिकेट में अपनी पहचान बनाई। उनकी बल्लेबाजी, आखिरी विकेट की साझेदारी और क्रिकेट सफर चर्चा का विषय बने।

अप्पू धीवर |  कीर्तिमान न्यूज
प्रकाशित: 20 Oct 2026, 11:43 AM · 5 मिनट पढ़ने का समय
मुंबई
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश
Chinmay Suthar: क्रिकेट के गलियारों में कब कौन सी तकदीर बदल जाए, कुछ कहा नहीं जा सकता। कई बार जिस फैसले को इंसान मजबूरी या करियर का सबसे बड़ा जोखिम मानकर उठाता है, वही आगे चलकर उसके जीवन का सबसे सुनहरा अध्याय बन जाता है। रणजी ट्रॉफी के इतिहास में नाबाद 400 रनों की महागाथा लिखने वाले चिन्मय सुथार की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। मुंबई के घरेलू क्रिकेट सिस्टम में खुद को साबित करने के लिए संघर्ष कर रहे चिन्मय को जब बड़े मंच पर पर्याप्त मौके नहीं मिले, तो उन्होंने राज्य बदलकर मिजोरम से खेलने का कड़ा फैसला किया। उनका यह निर्णय न सिर्फ उनके करियर के लिए वरदान साबित हुआ, बल्कि आज वह पूरी दुनिया में चर्चा का केंद्र बन गए हैं।

जब मजबूरी बनी इतिहास रचने का जरिया 

मूल रूप से मुंबई के रहने वाले 29 साल के चिन्मय सुथार अपनी शानदार फॉर्म और कलात्मक बल्लेबाजी के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने मुंबई के लिए सीमित ओवरों का क्रिकेट जरूर खेला, लेकिन उनकी मुख्य प्राथमिकता रेड-बॉल क्रिकेट यानी लंबे फॉर्मेट में अपनी अमिट छाप छोड़ना थी। मुंबई टीम में स्टार खिलाड़ियों की भारी भरकम मौजूदगी और कड़े कॉम्पिटिशन के चलते उन्हें रणजी ट्रॉफी में नियमित तौर पर प्लेइंग इलेवन में जगह नहीं मिल पा रही थी। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जब चिन्मय को लगा कि मुंबई में उनकी प्रतिभा के साथ न्याय नहीं हो रहा है और उन्हें लाल गेंद से खेलने के पर्याप्त मौके नहीं मिल रहे, तो उन्होंने अपने करियर को एक नई दिशा देने का जोखिम उठाया। उन्होंने पाला बदलते हुए मिजोरम की तरफ से मैदान पर उतरने का फैसला किया। एक स्थापित घरेलू सर्किट को छोड़कर नई और उभरती हुई टीम से जुड़ना उनके लिए आसान नहीं था, लेकिन अपने खेल के प्रति समर्पण ने उन्हें यह बड़ा कदम उठाने के लिए मजबूर कर दिया।

शतक की कसक और नागालैंड के खिलाफ ऐतिहासिक मैराथन पारी 

मिजोरम के लिए खेलते हुए चिन्मय ने अपनी काबिलियत का अहसास शुरुआती मुकाबलों में ही कराना शुरू कर दिया था। मणिपुर के खिलाफ अपने पहले ही रणजी मैच की दूसरी पारी में वह महज एक रन से शतक से चूक गए थे और 99 के निजी स्कोर पर आउट हो गए थे। उस एक रन के मलाल ने उन्हें अंदर से और मजबूत किया। इसके बाद नागालैंड के खिलाफ मुकाबले में उन्होंने जो किया, वह भारतीय घरेलू क्रिकेट के इतिहास के पन्नों में हमेशा के लिए दर्ज हो गया। चिन्मय ने इस मैच में सूझबूझ और गजब के संयम का परिचय देते हुए नाबाद 400 रनों की ऐतिहासिक मैराथन पारी खेली। इस दौरान उन्होंने 517 गेंदों का सामना किया और अपनी अद्भुत एकाग्रता का प्रदर्शन करते हुए 46 चौके और 7 गगनचुंबी छक्के जड़े। उनकी इस अविश्वसनीय पारी की बदौलत मिजोरम ने अपनी पहली पारी 9 विकेट के नुकसान पर 581 रन बनाकर घोषित की।

चिन्मय सुथार
आखिरी विकेट की साझेदारी ने पलट दिया पासा 

पारी के दौरान एक वक्त ऐसा आया जब मिजोरम के लगातार विकेट गिर चुके थे और चिन्मय 231 रन बनाकर क्रीज पर डटे हुए थे। स्कोरबोर्ड पर आखिरी बल्लेबाज के रूप में नंबर-11 के खिलाड़ी लालरेम्पुइया छकछुआक बल्लेबाजी के लिए उतरे। यहाँ से चिन्मय ने पूरी जिम्मेदारी अपने कंधों पर ली। दोनों बल्लेबाजों के बीच गजब का तालमेल देखने को मिला और उन्होंने दसवें विकेट के लिए नाबाद 189 रनों की रिकॉर्ड साझेदारी कर डाली। इस साझेदारी में अकेले चिन्मय के बल्ले से 169 रन निकले। उन्होंने निजी रिकॉर्ड्स की परवाह किए बिना टीम के स्कोर को मजबूत करने पर ध्यान दिया और अंततः 400 का जादुई आंकड़ा पार कर इतिहास रच दिया।

दिग्गजों की फेहरिस्त में नाम और स्वर्णिम रिकॉर्ड 

रणजी ट्रॉफी के इतिहास में एक पारी में 400 या उससे ज्यादा रन बनाने वाले चिन्मय सुथार केवल दूसरे बल्लेबाज बन गए हैं। इस मामले में सर्वकालिक रिकॉर्ड आज भी महान बल्लेबाज बीबी निंबालकर के नाम दर्ज है, जिन्होंने 1948-49 सीजन में महाराष्ट्र की तरफ से खेलते हुए काठियावाड़ के खिलाफ नाबाद 443 रन बनाए थे। हालांकि, चिन्मय ने आधुनिक दौर के आक्रामक बल्लेबाज पृथ्वी शॉ के 379 रनों के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ते हुए एक नया आयाम जरूर स्थापित कर दिया है।

टी20 क्रिकेट में भी रहा है जलवा 

चिन्मय सिर्फ लंबे फॉर्मेट के ही खिलाड़ी नहीं हैं, बल्कि शॉर्टेस्ट फॉर्मेट में भी उनका बल्ला आग उगलता रहा है। मुंबई टी20 लीग में मराठा रॉयल्स की ओर से खेलने वाले चिन्मय ने अपनी उपयोगिता को बार-बार साबित किया है। वह 2025 की मुंबई टी20 लीग में ऑरेंज कैप जीतने वाले बल्लेबाज रहे थे। इसके बाद 2026 के सीजन में भी उनका बल्ला जमकर बोला और वह टूर्नामेंट में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज बने। इस दौरान उन्होंने सेमीफाइनल में 49 गेंदों पर 62 रन और फाइनल मुकाबले में 52 गेंदों पर 61 रनों की मैच जिताऊ पारियां खेलीं।

पिता के संघर्ष और मार्गदर्शन का रहा बड़ा हाथ 

इस शानदार सफलता के पीछे परिवार का अटूट समर्थन भी रहा है। चिन्मय के पिता राजेश सुथार खुद मुंबई के लिए फर्स्ट क्लास क्रिकेट खेल चुके हैं। उन्होंने अपने करियर में 7 फर्स्ट क्लास मैच खेले थे और अपने उसी तजुर्बे से वह लगातार बेटे का मार्गदर्शन करते आए हैं। इतिहास रचने के बाद चिन्मय ने सबसे पहले अपने पिता को फोन किया। उन्होंने साझा किया कि जब दौर कठिन था और उन्हें खेलने के मौके नहीं मिल रहे थे, तब उनके पिता ही थे जिन्होंने उनके हौसले को टूटने नहीं दिया और लगातार आगे बढ़ते रहने की प्रेरणा दी। आज पिता का वह संघर्ष और बेटे की जिद रंग लाई है, जिससे पूरा मिजोरम और मुंबई का क्रिकेट जगत गौरवान्वित महसूस कर रहा है।
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