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कोल लेवी घोटाला
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रायपुर

कोल लेवी घोटाला : ACB-EOW ने कोर्ट में पेश की एक और सप्लीमेंट्री चार्जशीट, मुख्य आरोपी के ड्राइवर पर कसा शिकंजा

छत्तीसगढ़ के ₹570 करोड़ से अधिक के कोयला लेवी घोटाले में Anti Corruption Bureau Chhattisgarh और Economic Offences Wing Chhattisgarh ने मुख्य आरोपी Suryakant Tiwari के ड्राइवर नारायण साहू के खिलाफ पूरक आरोप पत्र दाखिल किया है।

कीर्तिमान न्यूज
21 May 2026, 06:59 AM
📍 रायपुर

छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित 570 करोड़ रुपये से अधिक के कोयला लेवी (कोल स्कैम) मामले में भ्रष्टाचार निवारण ब्यूरो (ACB) और आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) ने अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। जांच एजेंसी ने इस मामले के मुख्य सरगना और कारोबारी सूर्यकांत तिवारी के ड्राइवर नारायण साहू के खिलाफ विशेष अदालत में पूरक आरोप पत्र (Supplementary Charge Sheet) दाखिल किया है।

इस नए अपडेट के साथ ही जांच एजेंसी अब तक इस महाघोटाले में एक मूल चालान और 5 पूरक चालान अदालत के सामने पेश कर चुकी है। आरोपी नारायण साहू फिलहाल रायपुर की सेंट्रल जेल में न्यायिक रिमांड पर है।

सिंडिकेट का 'एक्टिव' मेंबर था ड्राइवर

ACB-EOW की तफ्तीश में नारायण साहू को लेकर कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। जांच एजेंसी के मुताबिक:

  • कैश कलेक्शन का जिम्मा: नारायण साहू सिर्फ एक ड्राइवर नहीं था, बल्कि वह इस अवैध कोल लेवी वसूली सिंडिकेट का एक बेहद सक्रिय सदस्य था। वह मुख्य आरोपी सूर्यकांत तिवारी के सीधे निर्देश पर कोयला कारोबारियों और ट्रांसपोर्टरों से डरा-धमकाकर अवैध कैश वसूल करता था।

  • भाई के पास पहुंचती थी रकम: वसूली गई भारी-भरकम रकम को कलेक्ट करने के बाद नारायण उसे सूर्यकांत तिवारी के भाई रजनीकांत तिवारी के पास सुरक्षित जमा करा देता था।

  • अधिकारियों तक डिलीवरी: जांच में सबसे बड़ा खुलासा यह हुआ है कि इसी अवैध वसूली की रकम से करीब 7.5 करोड़ रुपये कैश राज्य सेवा की निलंबित अधिकारी सौम्या चौरसिया और निलंबित IAS समीर विश्नोई सहित सिंडिकेट से जुड़े कई रसूखदारों तक पहुंचाए गए थे। इस कैश डिलीवरी नेटवर्क को संभालने में नारायण की मुख्य भूमिका थी।

कोर्ट में सौंपे गए नए सबूत

ACB-EOW ने अदालत को बताया कि इस पूरक आरोप पत्र के साथ कई नए और पुख्ता डिजिटल व दस्तावेजी साक्ष्य (Additional Evidence) भी सौंपे गए हैं, जो आरोपियों के खिलाफ शिकंजे को और मजबूत करेंगे।

जांच एजेंसी का बयान: "मामले की परतें लगातार खुल रही हैं। पूर्व में पेश किए गए अभियोग पत्रों के अलावा नए सबूत कोर्ट को दिए गए हैं। इस सिंडिकेट में शामिल कई अन्य रसूखदारों और संभावित आरोपियों की भूमिका की स्क्रूटनी अभी जारी है, जल्द ही कुछ और बड़े खुलासे हो सकते हैं।"

क्या है यह ₹570 करोड़ से ज्यादा का 'कोल स्कैम'?

प्रवर्तन निदेशालय (ED) की शुरुआती जांच के अनुसार, छत्तीसगढ़ में पिछली सरकार के कार्यकाल के दौरान कोयले के परिवहन में एक समानांतर सरकार चलाई जा रही थी।

  • अवैध वसूली का मॉडल: नियमों को ताक पर रखकर ऑनलाइन परमिट की व्यवस्था को जानबूझकर ऑफलाइन कर दिया गया।

  • प्रति टन वसूली: खदानों से निकलने वाले प्रति टन कोयले पर 25 रुपये की अवैध 'लेवी' (वसूली) तय की गई थी। इसके बिना कोयले का परिवहन नामुमकिन था। इस तरह देखते ही देखते 570 करोड़ रुपये से अधिक का अवैध सिंडिकेट खड़ा कर दिया गया।

2 पूर्व मंत्रियों और विधायकों समेत 36 पर FIR

ED की शिकायत और प्राथमिक रिपोर्ट के आधार पर छत्तीसगढ़ ACB/EOW ने इस मामले में दो पूर्व मंत्रियों, कई तत्कालीन विधायकों और ब्यूरोक्रेट्स सहित कुल 36 लोगों के खिलाफ नामजद FIR दर्ज की थी।

अब तक की बड़ी गिरफ्तारियां: इस घोटाले के तार सीधे तौर पर सत्ता के शीर्ष गलियारों से जुड़े थे। मामले में अब तक निम्नलिखित रसूखदारों को सलाखों के पीछे भेजा जा चुका है।

मामले में लगातार आ रहे नए अपडेट्स और सप्लीमेंट्री चार्जशीट से साफ है कि आने वाले दिनों में कोर्ट में इस घोटाले से जुड़े कई और रसूखदारों की मुश्किलें बढ़ने वाली हैं।

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