Dantewada News: बंगाल मॉनिटर लिजार्ड, जिसे स्थानीय भाषा में गोह कहा जाता है, के शिकार का मामला सामने आया है। आरोप है कि तीन युवकों ने जंगल में गोह को पकड़ने के बाद उसके साथ क्रूरता की और फिर उसे पकाकर खा लिया। युवकों ने पूरी घटना का वीडियो भी बनाया, जिसे सोशल मीडिया पर पोस्ट कर दिया गया। वीडियो वायरल होने के बाद हरकत में आए वन विभाग ने तीनों युवकों को पकड़ लिया है। यह घटना जिले के श्यामगिरी क्षेत्र की बताई जा रही है। शिकार किए गए मॉनिटर लिजार्ड की उम्र करीब तीन से चार महीने होने का अनुमान है। वन विभाग ने आरोपियों से पूछताछ शुरू कर दी है और उनके खिलाफ वन्यजीव संरक्षण कानून के तहत कार्रवाई की जा रही है।
इंस्टाग्राम पर पोस्ट किया गया था वीडियो
जानकारी के मुताबिक, यह वीडियो इंस्टाग्राम पर ‘हुंगा ओयाम’ नाम की आईडी से पोस्ट किया गया था। वीडियो में दो युवक जंगल में मॉनिटर लिजार्ड को पकड़ते दिखाई दे रहे हैं। इनमें से एक युवक कैमरे के सामने उसे शराब के साथ चखना बनाने की बात भी कहता सुनाई देता है। वीडियो के आगे के हिस्से में पकड़े गए वन्यजीव के साथ क्रूरता किए जाने के दृश्य हैं। आरोप है कि युवकों ने धारदार हथियार से उसके पैर काट दिए और बाद में उसे पकाकर खा लिया। घटना की रील सोशल मीडिया पर फैलने के बाद मामला वन विभाग के अधिकारियों तक पहुंचा।
वन विभाग ने श्यामगिरी में चलाया तलाशी अभियान
वीडियो की जानकारी मिलने के बाद प्रधान मुख्य वन संरक्षक के निर्देश पर वन विभाग की टीम ने कार्रवाई शुरू की। बचेली वन परिक्षेत्र की टीम ने श्यामगिरी इलाके में वीडियो में दिखाई दे रहे युवकों की तलाश की और तीन संदिग्धों को पकड़ लिया। बताया जा रहा है कि तीनों युवक बोर उत्खनन करने वाली एक गाड़ी में काम करते हैं। वन विभाग की टीम उन्हें पूछताछ के लिए अपने साथ लेकर गई है। मामले में वीडियो, घटनास्थल और शिकार से जुड़े अन्य साक्ष्यों की भी जांच की जा रही है।इससे जुड़ी खबरे...Balrampur Crime News: ज्वेलरी दुकान से लाखों की चोरी, 14 किलो चांदी के साथ 7 आरोपी गिरफ्तार
वन्यजीव संरक्षण कानून के तहत होगी कार्रवाई
वन विभाग के अधिकारी ने मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि फिलहाल तीनों युवकों से पूछताछ की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद घटना में उनकी भूमिका और अन्य तथ्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। बंगाल मॉनिटर लिजार्ड एक संरक्षित वन्यजीव है। इसका शिकार करना, पकड़ना या इसके अंगों का अवैध इस्तेमाल करना दंडनीय अपराध है। वन विभाग के अनुसार, दोष सिद्ध होने पर आरोपियों को वन्यजीव संरक्षण कानून के तहत कारावास और जुर्माने की सजा हो सकती है।