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दतिया उपचुनाव मतदान तैयारी
दतिया उपचुनाव मतदान तैयारी
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दतिया उप-चुनाव : थमा प्रचार का शोर, 30 जुलाई को 2.20 लाख से ज्यादा वोटर चुनेंगे अपना नया विधायक

दतिया विधानसभा उपचुनाव में प्रचार का शोर थम गया है। 30 जुलाई को 2.20 लाख से अधिक मतदाता वोट डालेंगे। प्रशासन ने 291 बूथों पर सुरक्षा और मतदान की पूरी तैयारी कर ली है।

अप्पू धीवर |  कीर्तिमान न्यूज
प्रकाशित: 29 Jul 2026, 10:31 AM · अपडेट: 30 Oct 2026, 03:50 PM
दतिया
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश
दतिया विधानसभा उप-चुनाव को लेकर जारी सरगर्मी अब अपने अंतिम दौर में पहुँच गई है। मंगलवार शाम 6 बजते ही प्रचार का शोर पूरी तरह थम गया और प्रत्याशी अब केवल घर-घर जाकर जनसंपर्क कर रहे हैं। प्रशासन ने मतदान कराने की तैयारियाँ मुकम्मल कर ली हैं। आगामी 30 जुलाई को सुबह 7 बजे से शाम 6 बजे तक वोट डाले जाएँगे। इस उप-चुनाव में जिले के 2.20 लाख से अधिक मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग कर प्रत्याशियों की किस्मत का फैसला करेंगे।

320 मतदान दल मैदान में, निष्पक्षता का रखा पूरा ध्यान

चुनाव को पूरी तरह पारदर्शी और शांतिपूर्ण माहौल में संपन्न कराने के लिए निर्वाचन आयोग ने पुख्ता इंतजाम किए हैं।

  • 291 पोलिंग बूथ: जिले में कुल 291 मतदान केंद्र बनाए गए हैं।

  • 1280 मतदानकर्मी: सुरक्षा और मतदान प्रक्रिया संभालने के लिए 320 टीमें गठित की गई हैं, जिनमें कुल 1,280 कर्मचारियों को तैनात किया गया है।

  • गृह क्षेत्र से दूर तैनाती: निष्पक्षता बनाए रखने के लिए किसी भी अधिकारी या कर्मचारी की ड्यूटी उसके खुद के विधानसभा क्षेत्र में नहीं लगाई गई है।

सुरक्षा के कड़े इंतजाम: चप्पे-चप्पे पर नजर, हर हलचल पर पहरा

प्रशासन ने संवेदनशील क्षेत्रों पर विशेष ध्यान केंद्रित किया है। जिला निर्वाचन अधिकारी के मुताबिक, कुल 291 पोलिंग बूथों में से 233 को 'क्रिटिकल' और 28 को 'वल्नरेबल' श्रेणी में रखा गया है।

सुरक्षा और निगरानी का पूरा खाका:

  • केंद्रीय सुरक्षा बल: हर मतदान केंद्र पर कम से कम 4 सीआरपीएफ जवानों के साथ एमपी पुलिस और एसएएफ के जवान तैनात रहेंगे।

  • माइक्रो ऑब्जर्वर: संवेदनशील बूथों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए 215 माइक्रो ऑब्जर्वर तैनात किए गए हैं।

  • लाइव वेबकास्टिंग: सभी पोलिंग बूथों और जिले की 12 मुख्य सीमाओं/नाकों पर सीसीटीवी कैमरों से 24 घंटे लाइव वेबकास्टिंग के जरिए निगरानी होगी।

  • जीपीएस और रिजर्व EVM: सेक्टर अधिकारियों के वाहनों में जीपीएस लगाए गए हैं, ताकि उनकी लोकेशन ट्रैक हो सके। किसी भी बूथ पर ईवीएम में तकनीकी खराबी आने पर तुरंत बदलने के लिए रिजर्व ईवीएम की व्यवस्था भी रखी गई है।

प्रशासनिक स्तर पर तैयारियाँ पूरी हैं और अब सबकी निगाहें 30 जुलाई को होने वाले मतदान पर टिकी हैं।

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