अमन की इस गुहार में कौन-कौन शामिल?
खत में उठीं मांगें
वीजा और हवाई सफर: आम नागरिकों के लिए वीजा सेवाएं फिर से बहाल हों और दोनों देशों के बीच सीधी हवाई उड़ानें शुरू की जाएं ताकि लोगों का मिलना-जुलना आसान हो।
राजनयिक रिश्ते: नई दिल्ली और इस्लामाबाद में उच्चायुक्तों (High Commissioners) की दोबारा नियुक्ति की जाए।
व्यापार और आवाजाही: अटारी-वाघा बॉर्डर को व्यापार और आम लोगों के आने-जाने के लिए पूरी तरह से खोल दिया जाए।
टूटते संपर्क को जोड़ना: श्रीनगर-मुजफ्फराबाद बस सेवा जैसी पुरानी और लोकप्रिय पहलों को फिर से हरी झंडी दिखाई जाए।
आखिर क्यों पड़ी इस खत की जरूरत? चिट्ठी में एक बहुत ही अहम आंकड़े की तरफ ध्यान दिलाया गया है। भारत और पाकिस्तान मिलकर दुनिया की आबादी का लगभग पांचवां हिस्सा बनाते हैं, जिसमें युवाओं की एक बहुत बड़ी फौज है। चिट्ठी में कहा गया है कि हमारे नौजवान एक ऐसे भविष्य के हकदार हैं जहां तरक्की, शांति, सहयोग और आपसी भरोसा हो। उन्हें नफरत, टकराव और अविश्वास की विरासत नहीं सौंपी जानी चाहिए।
इन दिग्गजों ने किए हस्ताक्षर साइन करने वालों ने स्पष्ट किया है कि यह कदम किसी राजनीतिक दल या एजेंडे का हिस्सा नहीं है, बल्कि दक्षिण एशिया में स्थायी शांति की एक साझा पुकार है।
भारत की तरफ से: जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला, महबूबा मुफ्ती, मीरवाइज उमर फारूक, दिग्गज नेता मणिशंकर अय्यर और सांसद मनोज झा जैसे बड़े नाम इस मुहिम से जुड़े हैं।
पाकिस्तान की तरफ से: पूर्व विदेश मंत्री खुर्शीद महमूद कसूरी और पूर्व दिग्गज राजनयिक अशरफ जहांगीर काजी समेत कई मशहूर और असरदार चेहरों ने इस पर दस्तखत किए हैं।
अब देखना यह दिलचस्प होगा कि ऐसे समय में जब दोनों देशों के बीच कूटनीतिक रिश्ते लंबे वक्त से ठंडे बस्ते में हैं, अवाम के नुमाइंदों की यह चिट्ठी दोनों देशों की सियासत में क्या असर छोड़ती है।