देश के एक बहुत बड़े हिस्से से मानसून के बादल अचानक गायब हो गए हैं। इस समय भारत के लगभग 70% क्षेत्र में सूखे जैसे हालात बनने लगे हैं। राजस्थान, दिल्ली, पश्चिमी मध्य प्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र में अगले 5 दिन तक पानी बरसने की उम्मीद बहुत कम है। बारिश अचानक रुकने से उत्तर भारत के राज्यों में गर्मी और उमस बहुत तेजी से बढ़ गई है। यही वजह है कि राजस्थान के श्रीगंगानगर में पारा 42 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है।
पहाड़ों पर लैंडस्लाइड से मची भारी तबाही
हालांकि देश के कुछ हिस्सों में शनिवार को बहुत भारी बारिश दर्ज की गई है। इस मानसूनी आफत से उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं। दोनों ही पहाड़ी राज्यों में लगातार हो रहे भूस्खलन के कारण कुल 440 सड़कें बंद हो गई हैं। इससे वहां का पूरा यातायात नेटवर्क ठप हो गया है। इसके विपरीत पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार और मेघालय में भी मूसलाधार बारिश का दौर जारी है। पहाड़ों पर हो रही इस भारी बारिश के कारण मैदानी इलाकों में गंगा नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ने लगा है।

आखिर क्यों कमजोर पड़ी मानसूनी हवाओं की रफ्तार
मौसम विभाग के अनुसार इस बदलाव के पीछे मुख्य कारण मानसून ट्रफ का उत्तर की ओर खिसकना है। इसके अलावा 9 जुलाई के बाद बंगाल की खाड़ी में कोई नया मजबूत कम दबाव का क्षेत्र नहीं बना है। इसके कारण मानसूनी हवाओं को आगे बढ़ने के लिए जरूरी नमी नहीं मिल सकी। नतीजतन मध्य, पश्चिम और दक्षिण भारत के बड़े हिस्से में बादल छाने की गतिविधियां पूरी तरह थम गई हैं। इस देश में मानसून की स्थिति को लेकर मौसम वैज्ञानिक लगातार उपग्रह की तस्वीरों से नजर रख रहे हैं।