दुर्ग पुलिस ने साइबर अपराध के खिलाफ एक बड़ी सफलता हासिल करते हुए म्यूल बैंक खातों के जरिए ठगी की रकम को इधर-उधर खपाने वाले संगठित नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। मोहन नगर और नेवई थाना पुलिस की संयुक्त व अलग-अलग कार्रवाइयों में कुल 18 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।
जांच में खुलासा हुआ कि आरोपी अपने बैंक खाते, एटीएम कार्ड, पासबुक और मोबाइल सिम साइबर ठगों को उपलब्ध कराते थे। इसके बदले उन्हें तय कमीशन दिया जाता था। इन खातों का इस्तेमाल ठगी की रकम को एक खाते से दूसरे खाते में ट्रांसफर कर उसे ट्रेस होने से बचाने के लिए किया जाता था।
पुलिस के अनुसार, गृह मंत्रालय के समन्वय पोर्टल और साइबर शिकायतों के विश्लेषण के दौरान कई संदिग्ध बैंक खातों की पहचान हुई। जांच में पता चला कि वर्ष 2024 से 2026 के बीच इन खातों का उपयोग ठगी की रकम जमा करने, ट्रांसफर करने और निकालने में लगातार किया गया।
नेवई थाना क्षेत्र में 3 खाताधारक गिरफ्तार
मोहन नगर में 15 आरोपियों की गिरफ्तारी
मोहन नगर थाना पुलिस ने कोटक महिंद्रा बैंक के कई खातों की जांच के दौरान साइबर ठगी से जुड़े बड़े ट्रांजेक्शन का खुलासा किया। जांच में पाया गया कि कई खाताधारक जानबूझकर अपने खातों का उपयोग अवैध लेन-देन के लिए कर रहे थे।
इस मामले में अपराध क्रमांक 329/2026 दर्ज किया गया है। आरोपियों के खिलाफ बीएनएस की धारा 318(4) और 317(2) के तहत कार्रवाई की गई है। पुलिस ने 15 लोगों को गिरफ्तार किया है।
गिरफ्तार आरोपियों में पीयूष डडसेना, साहिल खान, खुशी झा, मोहम्मद फरान, अभिजीत कुमार, आदित्य रजक, आशीष चंद्राकर, निखिल साहू, रितेश मसीह, मोहम्मद सोहेल, निकिता चौहान, शुभा सेंगर, शिवम पांडेय, रितेश देवांगन और रणधीर झा शामिल हैं।
क्या होता है म्यूल अकाउंट?
आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियों की संभावना
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह जांच अभी जारी है और आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं। पुलिस ने साफ किया है कि साइबर ठगी और उसके सहयोगियों के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा।
