एशिया की भू-राजनीति (Geopolitics) में एक बहुत बड़ा उलटफेर होने जा रहा है, जिसने बीजिंग के गलियारों में खलबली मचा दी है। चीन को अपनी सख्त नीतियों से कड़ा जवाब देने वालीं और उसकी सबसे बड़ी राजनीतिक 'दुश्मन' मानी जाने वालीं जापान की प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची 1 जुलाई को अपने पहले आधिकारिक भारत दौरे पर आ रही हैं।
इस ऐतिहासिक यात्रा की सबसे खास बात यह है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पीएम ताकाइची के बीच सालाना भारत-जापान शिखर सम्मेलन (India-Japan Summit) देश की राजधानी दिल्ली में न होकर, रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण राज्य असम में आयोजित किया जा रहा है।
मिशन इंडिया पर 50 दिग्गजों की फौज
निक्केई एशिया की रिपोर्ट के मुताबिक, पीएम ताकाइची अकेले नहीं आ रही हैं, बल्कि उनके साथ जापान के 50 शीर्ष बिजनेस लीडर्स का एक हाई-प्रोफाइल डेलिगेशन (शिष्टमंडल) भी भारत आ रहा है। इस डेलिगेशन में ये बड़े नाम शामिल हैं:
तोशिहिरो सुजुकी (प्रेसिडेंट, सुजुकी मोटर)
टोयोटा त्सुशो (टोयोटा मोटर की ट्रेडिंग शाखा) के शीर्ष एग्जीक्यूटिव्स
मशहूर जापानी ट्रेडिंग कंपनी इटोचू (Itochu) के कॉर्पोरेट लीडर्स
असर: इस भारी-भरकम डेलिगेशन का मुख्य उद्देश्य असम और पूर्वोत्तर भारत में जापानी निवेश को बढ़ाना और भारत की 'एक्ट ईस्ट' नीति के तहत औद्योगिक सहयोग (Industrial Cooperation) के नए रास्ते खोलना है।
नौसेना को मिलेगी अजेय ताकत
इस दौरे का सबसे बड़ा और गेम-चेंजर मोड़ रक्षा सौदों को लेकर होने वाला है। चीन की आक्रामकता को कुचलने के लिए जापानी पीएम भारत को अपने बेड़े का सबसे खतरनाक 'मोगामी क्लास स्टील्थ फ्रिगेट' (Mogami-class warship) ऑफर करने जा रही हैं।
क्या है इस डील में खास?
टेक्नोलॉजी ट्रांसफर: जापान चाहता है कि भारत सरकार के 'मेक इन इंडिया' (Make in India) अभियान के तहत इस आधुनिक युद्धपोत का निर्माण भारतीय शिपयार्ड में ही हो।
ब्रह्मोस का धमाका: जापान इस युद्धपोत के डिजाइन में बदलाव करने को तैयार है, ताकि इस पर भारत की सबसे खतरनाक ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल को तैनात किया जा सके।
अगर यह डील फाइनल होती है, तो हिंद महासागर में चीनी नौसेना का रास्ता हमेशा के लिए बंद हो जाएगा।
चीन की 'आंख की किरकिरी' क्यों हैं सनाए ताकाइची?
सनाए ताकाइची को जापान की राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति में 'आयरन लेडी' (सख्त रुख वाली नेता) माना जाता है।
सैन्य क्षमता का विस्तार: पद संभालने के बाद से ही उन्होंने जापान की डिफेंस कैपेबिलिटी को बढ़ाना अपनी टॉप प्रायोरिटी बनाया है।
चीन को सीधा खतरा घोषित करना: ताकाइची सरकार ने आधिकारिक तौर पर चीन को जापान के लिए 'सबसे बड़ा रणनीतिक खतरा' घोषित किया है।
कूटनीतिक तनाव: ताइवान और दक्षिण चीन सागर के मुद्दों पर ताकाइची के कड़े बयानों के कारण बीजिंग उनके नाम से ही चिढ़ता है। वह भली-भांति जानती हैं कि चीनी विस्तारवाद को रोकने का इकलौता रास्ता मजबूत भारत-जापान साझेदारी है।
तीसरी बार आमने-सामने होंगे मोदी-ताकाइची
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने हाल ही में पुष्टि की थी कि 1 जुलाई को होने वाली इस समिट-लेवल बातचीत के लिए राज्य में तैयारियां जोरों पर हैं।
हालांकि बतौर प्रधानमंत्री ताकाइची का यह पहला भारत दौरा है, लेकिन पीएम मोदी के साथ उनकी केमिस्ट्री पहले से ही बेहद मजबूत है। दोनों नेता इससे पहले दक्षिण अफ्रीका में G20 शिखर सम्मेलन और हाल ही में फ्रांस में आयोजित G7 शिखर सम्मेलन के दौरान द्विपक्षीय मुलाकातें कर चुके हैं।
भारत-जापान रणनीतिक साझेदारी
| क्षेत्र | मुख्य सहयोग |
| सैन्य मोर्चा | साझा सैन्य अभ्यास (वीर गार्जियन, जिमेक्स) और इंटेलिजेंस शेयरिंग (खुफिया जानकारी साझा करना)। |
| तकनीक | सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन, 5G/6G टेक्नोलॉजी और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर। |
| रणनीतिक मंच | दोनों देश 'क्वाड' (QUAD) के मजबूत स्तंभ हैं, जिसका मकसद इंडो-पैसिफिक को स्वतंत्र रखना है। |