E20 पेट्रोल से खराब हुई कार : कंज्यूमर कोर्ट का फैसला, कंपनी को नई गाड़ी देने या ₹20.50 लाख लौटाने का आदेश
रायपुर जिला उपभोक्ता फोरम ने E20 पेट्रोल से कार खराब होने के मामले में ग्राहक के पक्ष में फैसला सुनाया है। मारुति को नई E20 सपोर्टेड कार देने या 20.50 लाख रुपये ब्याज सहित लौटाने का आदेश दिया गया है।
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कीर्तिमान न्यूज
16 Jul 2026, 09:56 AM
रायपुर
देशभर में इन दिनों E20 ईंधन (20% एथेनॉल मिक्स पेट्रोल) को लेकर बहस छिड़ी हुई है। इसी बीच छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से एक ऐसा अभूतपूर्व मामला सामने आया है, जिसने ऑटोमोबाइल कंपनियों की नींद उड़ा दी है।
E20 पेट्रोल के इस्तेमाल से गाड़ी खराब होने के एक मामले में जिला उपभोक्ता फोरम ने कार मालिक के पक्ष में बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने न सिर्फ कंपनी को नई कार देने का आदेश दिया, बल्कि भारी-भरकम जुर्माना भी ठोक दिया है।
कार में दिक्कतें शुरू
यह पूरा विवाद रायपुर के रहने वाले डॉक्टर प्रेमराज देब्ता से जुड़ा है। डॉ. देब्ता ने जून 2024 में मारुति सुजुकी की 'ग्रैंड विटारा हाइब्रिड' (जेटा प्लस SUV) खरीदी थी, जिसका निर्माण जनवरी 2023 में हुआ था। गाड़ी खरीदने के कुछ समय बाद जब उन्होंने इसमें सरकार के नए नियमों के तहत आने वाला E20 पेट्रोल डलवाया, तो कार में दिक्कतें शुरू हो गईं।
सर्विस सेंटर में खर्च फिर भी समस्या जस की तस
शिकायत के मुताबिक, E20 पेट्रोल डालते ही इंजन ने सही से काम करना बंद कर दिया। कार बार-बार मिसफायर करने लगी और उसका माइलेज भी बुरी तरह गिर गया। डॉ. देब्ता गाड़ी को लेकर कई बार आधिकारिक सर्विस सेंटर गए, जेब से मोटी रकम भी खर्च की, लेकिन समस्या जस की तस बनी रही। आखिरकार परेशान होकर उन्होंने रायपुर के जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग का दरवाजा खटखटाया।
E20 पेट्रोलकोर्ट का सख्त रुख: 45 दिन में दें नई गाड़ी
कंपनी को शिकायतकर्ता की पुरानी कार वापस लेनी होगी।
इसके बदले में ग्राहक को उसी मॉडल की एक बिल्कुल नई कार देनी होगी, जो पूरी तरह से E20 ईंधन को सपोर्ट करती हो।
कंपनी को यह पूरी प्रक्रिया आदेश जारी होने के 45 दिनों के भीतर पूरी करनी होगी।
सीधा संदेश: कोर्ट ने इस फैसले से ऑटो कंपनियों को सख्त संदेश दिया है कि ग्राहकों को केवल कागजी आश्वासन नहीं, बल्कि धरातल पर वही प्रोडक्ट मिलना चाहिए जिसका उनसे वादा किया गया था। उपभोक्ता आयोग ने अपने आदेश में एक वैकल्पिक रास्ता भी रखा है। अगर कंपनी तय 45 दिनों के अंदर नई E20 सपोर्टेड कार देने में नाकाम रहती है, तो उसे ग्राहक को गाड़ी की पूरी कीमत ब्याज सहित लौटानी होगी। वापस की जाने वाली कुल रकम ₹20,50,494 (करीब 20.50 लाख रुपये) तय की गई है, जिसका ब्रेकअप इस प्रकार है:
मद (Expenses)
कोर्ट द्वारा तय राशि
वाहन की मूल कीमत
₹18,29,000
RTO शुल्क (टैक्स)
₹1,86,850
बीमा प्रीमियम (Insurance)
₹34,644
कुल रिफंड राशि
₹20,50,494
मानसिक प्रताड़ना के लिए अलग से जुर्माना
मानसिक प्रताड़ना और परेशानी के एवज में 1 लाख रुपये का मुआवजा देना होगा।
अदालती कार्रवाई और वाद व्यय के रूप में 10 हजार रुपये अलग से चुकाने होंगे।
यदि कंपनी समय पर इस आदेश का पालन नहीं करती है, तो उसे पूरी राशि पर 7 फीसदी सालाना की दर से ब्याज भी देना पड़ेगा।
ऑटो सेक्टर के लिए क्यों बड़ा है यह फैसला?
मौजूदा समय में भारत सरकार तेजी से E20 (20% एथेनॉल ब्लेंडेड) पेट्रोल को बढ़ावा दे रही है। ऐसे में पुरानी तकनीक या बिना अपडेटेड इंजन वाली गाड़ियों में इस फ्यूल के इस्तेमाल से तकनीकी दिक्कतें आने की शिकायतें अक्सर सोशल मीडिया पर दिख जाती हैं। लेकिन कानूनी तौर पर कंज्यूमर कोर्ट का यह फैसला एक मिसाल बन गया है। अब ऑटोमोबाइल कंपनियों को यह सुनिश्चित करना ही होगा कि उनकी गाड़ियाँ नए ईंधनों के लिए पूरी तरह अनुकूल हों, वरना उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।