आज के दौर में जहां लोग सड़क पर हादसे का शिकार हुए अपनों को छोड़कर आगे बढ़ जाते हैं, वहीं छत्तीसगढ़ के धमतरी से इंसानियत और अटूट दोस्ती की एक ऐसी कहानी सामने आई है, जिसे सुनकर हर कोई दंग है। यहां एक युवक अपने बीमार और बेसुध दोस्त को हाथ-ठेले पर लादकर इलाज कराने अस्पताल पहुंच गया। जिसने भी जिला अस्पताल परिसर में यह नजारा देखा, उसकी आंखें भर आईं।
क्या है पूरा मामला
मिली जानकारी के मुताबिक, संतोष सोनवानी नाम का एक युवक पेशे से मजदूर है और धमतरी में ही रहकर गुजर-बसर करता है। बीते दिनों वह काम के सिलसिले में निकला था, तभी उसे शराब दुकान के पास उसका दोस्त कुलदीप बेहद गंभीर और बेसुध हालत में जमीन पर पड़ा मिला। कुलदीप की हालत देखकर संतोष घबरा गया। वह उसे तुरंत अस्पताल ले जाना चाहता था, लेकिन मजबूरी यह थी कि संतोष के पास मोबाइल फोन नहीं था, जिससे वह 108 या किसी एम्बुलेंस को कॉल कर पाता।
न एम्बुलेंस का इंतजार किया, न मदद की भीख
मांगी संतोष ने सिस्टम या किसी और के भरोसे बैठने में वक्त बर्बाद नहीं किया। उसने बिना देर किए पास में मौजूद एक हाथ-ठेले का इंतजाम किया। अकेले ही अपने दोस्त कुलदीप को उस ठेले पर लेटाया और चिलचिलाती धूप में ठेला खींचते हुए सीधे जिला अस्पताल की तरफ दौड़ लगा दी।
अस्पताल में हर तरफ हुई सराहना
जब संतोष पसीने से लथपथ होकर ठेला खींचते हुए जिला अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड के सामने पहुंचा, तो वहां मौजूद डॉक्टर, स्टाफ और मरीजों के परिजन हैरान रह गए। जब लोगों को पता चला कि यह युवक अपने दोस्त की जान बचाने के लिए उसे ठेले पर लादकर लाया है, तो अस्पताल परिसर में हर कोई संतोष की तारीफ करने लगा। डॉक्टरों ने तुरंत कुलदीप को वार्ड में भर्ती कर उसका इलाज शुरू कर दिया है। संतोष की इस सूझबूझ और 'शोले' फिल्म के जय-वीरू जैसी पक्की दोस्ती की चर्चा अब पूरे इलाके में हो रही है। यह घटना साबित करती है कि दोस्ती निभाने के लिए महंगे साधनों की नहीं, बल्कि एक साफ और मजबूत दिल की जरूरत होती है।