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नरेन्द्र मोदी
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पीएम मोदी के विदेश दौरे का खर्च : विदेश मंत्रालय, मेजबान देश और सुरक्षा का पूरा हिसाब

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी छह दिनों के विदेश दौरे पर इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड रवाना हुए हैं। इस बीच लोगों के मन में यह सवाल भी उठता है कि प्रधानमंत्री की विदेश यात्राओं का खर्च कौन उठाता है। आधिकारिक दौरों का मुख्य खर्च विदेश मंत्रालय वहन करता है, जबकि मेजबान देश भी कई व्यवस्थाओं का खर्च उठाता है।

विशेष संवाददाता
07 Jul 2026, 04:12 PM
नई दिल्ली

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 6 दिनों के विदेश दौरे पर रवाना हो गए हैं। इस दौरान वह इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड की यात्रा करेंगे। हर बार की तरह इस बार भी लोगों के मन में सवाल उठ रहा है कि प्रधानमंत्री के विदेश दौरे का खर्च आखिर कौन उठाता है और एक यात्रा पर कितना पैसा खर्च होता है। 

प्रधानमंत्री के आधिकारिक विदेशी दौरों का मुख्य खर्च भारत सरकार का विदेश मंत्रालय उठाता है। मंत्रालय अपने वार्षिक बजट से यात्रा, आधिकारिक कार्यक्रम, सुरक्षा और अन्य जरूरी व्यवस्थाओं के लिए राशि उपलब्ध कराता है। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक परंपराओं के तहत मेजबान देश भी प्रधानमंत्री के ठहरने, स्थानीय परिवहन और कुछ आतिथ्य संबंधी सुविधाओं का खर्च अपने स्तर पर वहन करता है। इससे भारत पर कुल वित्तीय बोझ कुछ कम हो जाता है।

सबसे ज्यादा खर्च किन चीजों पर होता है

प्रधानमंत्री की विदेश यात्रा में सबसे अधिक खर्च विशेष विमान, सुरक्षा व्यवस्था, आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल और संचार प्रणाली पर होता है। प्रधानमंत्री के साथ सुरक्षा एजेंसियों के अधिकारी, विदेश मंत्रालय के अधिकारी और अन्य जरूरी कर्मचारी भी यात्रा करते हैं। देश के प्रधानमंत्री की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होती है। इसी वजह से सुरक्षा से जुड़े इंतजामों पर विशेष ध्यान दिया जाता है।

हर यात्रा का बजट अलग क्यों होता है

किसी भी विदेश यात्रा का खर्च एक जैसा नहीं होता। यह इस बात पर निर्भर करता है कि यात्रा कितने दिनों की है, संबंधित देश भारत से कितनी दूरी पर है और प्रधानमंत्री के साथ कितने अधिकारी जा रहे हैं। यदि एक ही दौरे में कई देशों की यात्रा शामिल हो, तो उसके अनुसार भी बजट तय किया जाता है।

विदेश दौरे क्यों होते हैं जरूरी

प्रधानमंत्री के विदेशी दौरे का उद्देश्य दूसरे देशों के साथ व्यापार, निवेश, रक्षा, तकनीक और रणनीतिक सहयोग को मजबूत करना होता है। इन यात्राओं के दौरान कई महत्वपूर्ण समझौते भी होते हैं, जिनका सीधा लाभ भारत की अर्थव्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय संबंधों को मिलता है।

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