फीफा वर्ल्ड कप : मैक्सिको ने रचा इतिहास, 40 साल का सूखा खत्म कर प्री-क्वार्टर फाइनल में बनाई जगह
फीफा वर्ल्ड कप 2026 के राउंड ऑफ 32 मुकाबले में मैक्सिको ने इक्वाडोर को 2-0 से हराकर 40 साल बाद वर्ल्ड कप नॉकआउट चरण में जीत दर्ज की। जूलियन क्विनोनेस और राउल जिमेनेज के गोलों से मिली इस जीत के साथ मैक्सिको ने प्री-क्वार्टर फाइनल में जगह बना ली, जबकि मैच के अंत में इक्वाडोर के पिएरो हिनकापी को रेड कार्ड दिखाया गया।
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कीर्तिमान न्यूज
01 Jul 2026, 01:34 PM
नई दिल्ली
फीफा वर्ल्ड कप 2026 से फुटबॉल प्रेमियों के लिए एक बेहद चौंकाने वाली और ऐतिहासिक खबर सामने आई है। टूर्नामेंट के राउंड ऑफ 32 के करो या मरो (नॉकआउट) मुकाबले में मैक्सिको ने जबरदस्त खेल दिखाते हुए इक्वाडोर को 2-0 से धूल चटा दी है।
इस धमाकेदार जीत के साथ ही मैक्सिको ने वर्ल्ड कप के नॉकआउट स्टेज में पूरे 40 साल बाद अपनी पहली जीत दर्ज की है। जैसे ही रेफरी ने मैच खत्म होने की सीटी बजाई, स्टेडियम में मौजूद हजारों मैक्सिकन फैंस खुशी से झूम उठे और पूरा मैदान जश्न के माहौल में डूब गया।
प्री-क्वार्टर का टिकट फाइनल
इस ऐतिहासिक जीत की बदौलत मैक्सिको ने प्री-क्वार्टर फाइनल का टिकट पक्का कर लिया है। मैच की शुरुआत से ही मैक्सिकन टीम अलग ही तेवर में नजर आ रही थी। उन्होंने पहले हाफ से ही इक्वाडोर के डिफेंस पर लगातार हमले बोलने शुरू कर दिए और बहुत जल्द मैच को पूरी तरह अपने कब्जे में ले लिया। मैक्सिको की आक्रामक रणनीति का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि टीम ने महज 9 मिनट के भीतर दो बैक-टू-बैक गोल दागकर इक्वाडोर को पूरी तरह बैकफुट पर धकेल दिया।
पहला धमाका: मैच के 22वें मिनट में जूलियन क्विनोनेस ने एक शानदार मूव को गोल में तब्दील कर मैक्सिको को 1-0 की बढ़त दिलाई। इस वर्ल्ड कप टूर्नामेंट में क्विनोनेस का यह तीसरा गोल है, जो उनकी बेहतरीन फॉर्म को दर्शाता है।
दूसरा प्रहार: अभी इक्वाडोर इस झटके से उबर भी नहीं पाया था कि 31वें मिनट में स्टार स्ट्राइकर राउल जिमेनेज ने एक कड़क और सटीक शॉट के जरिए गेंद को जाल में उलझा दिया। इस बेहतरीन स्ट्राइक के साथ स्कोर 2-0 हो गया।
जिमेनेज का बड़ा रिकॉर्ड: इस गोल के साथ ही राउल जिमेनेज के इंटरनेशनल करियर के 47 गोल पूरे हो गए हैं। अब वह मैक्सिको के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सबसे ज्यादा गोल
इक्वाडोर को 2-0 दी मातकरने वाले खिलाड़ियों की सर्वकालिक सूची में दूसरे पायदान पर पहुंच गए हैं।
1986 की यादें हुईं ताजा, टूटा 7 वर्ल्ड कप का शाप
मैक्सिको की इस जीत ने फुटबॉल के गलियारों में पुराने पन्ने पलट दिए हैं। दरअसल, साल 1986 में जब मैक्सिको ने खुद वर्ल्ड कप की मेजबानी की थी, तब इसी मैदान पर उन्होंने बुल्गारिया को 2-0 से शिकस्त दी थी। वह वर्ल्ड कप के नॉकआउट दौर में मैक्सिको की आखिरी जीत थी और ठीक 40 साल बाद आज उसी स्कोरलाइन (2-0) के साथ इतिहास खुद को दोहरा रहा है। गौरतलब है कि पिछले लगातार 7 वर्ल्ड कप एडिशन से मैक्सिको की टीम नॉकआउट के पहले ही मैच में हारकर बाहर हो जाती थी।
मैक्सिकों ने रचा इतिहास
इस बार 48 टीमों के नए और कड़े फॉर्मेट की वजह से टीम को प्री-क्वार्टर फाइनल का एक और पड़ाव पार करना होगा, लेकिन सालों पुराने इस 'नॉकआउट के शाप' को तोड़ना मैक्सिकन फुटबॉल के लिए किसी बड़े टर्निंग पॉइंट से कम नहीं है। एक तरफ जहां मैक्सिको इतिहास रच रहा था, वहीं दूसरी तरफ मैच के आखिरी पलों में इक्वाडोर की किस्मत ने भी उनका साथ छोड़ दिया।
खिलाड़ी पर आपत्तिजनक टिप्पणी
मुकाबले के अंतिम समय में इक्वाडोर के डिफेंडर पिएरो हिनकापी अपनी भावनाओं पर काबू नहीं रख पाए। उन्होंने मुंह पर हाथ रखकर विरोधी खिलाड़ी पर कोई आपत्तिजनक टिप्पणी कर दी, जिसे रेफरी ने खेल भावना के विपरीत माना। नतीजतन, रेफरी ने बिना देर किए हिनकापी को सीधे 'रेड कार्ड' दिखाकर मैदान से बाहर का रास्ता नाप दिया। इस वजह से इक्वाडोर को मैच के अंतिम मिनटों में सिर्फ 10 खिलाड़ियों के साथ खेलना पड़ा, जिसने उनकी वापसी की बची-कुची उम्मीदों पर भी पानी फेर दिया।