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डेंगू रोकने के लिए 3.2 करोड़ मच्छर छोड़ेगा अमेरिका
डेंगू रोकने के लिए 3.2 करोड़ मच्छर छोड़ेगा अमेरिका
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मच्छरों से लड़ाई : नया प्रयोग, फ्लोरिडा और कैलिफोर्निया में छोड़े जाएंगे विशेष मच्छर

अमेरिका में डेंगू, चिकनगुनिया और जीका जैसी मच्छर जनित बीमारियों पर नियंत्रण के लिए Google की पैरेंट कंपनी डीबग प्रोजेक्ट ने कैलिफोर्निया और फ्लोरिडा में करीब 3.2 करोड़ विशेष नर मच्छर छोड़ने की योजना बनाई है। इन मच्छरों में वोल्बाकिया नामक बैक्टीरिया होता है, जो बीमारी फैलाने वाली एडीज एजिप्टी मच्छरों की आबादी को कम करने में मदद करता है।

कीर्तिमान नेटवर्क
03 Jun 2026, 10:12 AM
वाशिंगटन
अमेरिका में डेंगू, जीका और चिकनगुनिया जैसी मच्छर जनित बीमारियों के खतरे को कम करने के लिए एक अनोखी योजना पर चर्चा तेज हो गई है। Google से जुड़ा डीबग प्रोजेक्ट अमेरिका के कैलिफोर्निया और फ्लोरिडा में करोड़ों विशेष रूप से तैयार नर मच्छर छोड़ना चाहता है। रिपोर्ट्स के अनुसार, इस प्रोजेक्ट के तहत करीब 3.2 करोड़ मच्छर छोड़ने की अनुमति मांगी गई है। इस प्रस्ताव की समीक्षा अमेरिकी पर्यावरण संरक्षण एजेंसी यानी अमेरिकी पर्यावरण संरक्षण एजेंसी कर रही है।

योजना

इस योजना में एडीज एजिप्टी प्रजाति का मच्छर प्रजाति के नर मच्छरों को छोड़ा जाएगा। यही प्रजाति डेंगू, जीका और चिकनगुनिया जैसी बीमारियां फैलाने के लिए जानी जाती है। इन नर मच्छरों में वोल्बाकिया नामक बैक्टीरिया नाम का प्राकृतिक बैक्टीरिया डाला जाता है। जब ये नर मच्छर जंगली मादा मच्छरों से मिलते हैं, तो उनके अंडे विकसित नहीं हो पाते। इससे धीरे-धीरे बीमारी फैलाने वाले मच्छरों की संख्या घट सकती है।अमेरिकी रोग नियंत्रण और रोकथाम केंद्र के अनुसार, वोल्बाकिया नामक बैक्टीरिया वाले मच्छरों का इस्तेमाल खास तौर पर एडीज एजिप्टी मच्छर की संख्या घटाने के लिए किया जाता है।

ये मच्छर लोगों को काटेंगे

अमेरिकी रोग नियंत्रण और रोकथाम केंद्र के मुताबिक, इस तरह के अभियानों में केवल नर मच्छर छोड़े जाते हैं। नर मच्छर इंसानों को नहीं काटते, क्योंकि खून पीने का काम मादा मच्छर करती है। इसलिए इस योजना का उद्देश्य मच्छरों की संख्या बढ़ाना नहीं, बल्कि बीमारी फैलाने वाली मादा आबादी को कम करना है। अमेरिकी रोग नियंत्रण और रोकथाम केंद्र यह भी बताता है कि वोल्बाकिया नामक बैक्टीरिया  वाले मच्छर जेनेटिकली मॉडिफाइड नहीं होते।

अमेरिकी रोग नियंत्रण और रोकथाम केंद्र

अमेरिकी रोग नियंत्रण और रोकथाम केंद्र का कहना है कि वोल्बाकिया नामक बैक्टीरिया मच्छरों के जरिए लक्षित मच्छर प्रजाति की संख्या घटाई जा सकती है। अमेरिका के टेक्सास और कैलिफोर्निया सहित कई जगहों पर ऐसे प्रयोगों के बाद एडीज एजिप्टी प्रजाति का मच्छर प्रजाति की संख्या में कमी रिपोर्ट की गई है। अमेरिकी रोग नियंत्रण और रोकथाम केंद्र  के अनुसार, यह तरीका सभी तरह के मच्छरों पर काम नहीं करता, इसलिए इसके साथ पारंपरिक मच्छर नियंत्रण उपाय जैसे पानी जमा न होने देना, कीटनाशक प्रबंधन और जनजागरूकता भी जरूरी हैं।

कंपनी का दावा 

डीबग प्रोजेक्ट का कहना है कि यह तरीका पारंपरिक कीटनाशकों का बेहतर विकल्प बन सकता है। कंपनी इस काम में ऑटोमेशन, डेटा एनालिटिक्स और AI आधारित सिस्टम का इस्तेमाल करती है, ताकि बड़ी संख्या में नर मच्छर तैयार किए जा सकें और उन्हें मादा मच्छरों से अलग किया जा सके। रिपोर्ट्स के अनुसार, सिंगापुर जैसे देशों में इसी तरह की तकनीक से मच्छरों की आबादी और डेंगू मामलों में बड़ी कमी देखी गई है।

एक्सपर्ट बंटे हुए हैं

कई वैज्ञानिक इसे मच्छर जनित बीमारियों के खिलाफ एक प्रक्रिया यानी उम्मीद भरा तरीका मान रहे हैं, क्योंकि कई जगहों पर वोल्बाकिया बैक्टीरिया आधारित प्रयोगों के अच्छे नतीजे मिले हैं। विश्व मच्छर कार्यक्रम के अनुसार, वोल्बाकिया नामक बैक्टीरिया बैक्टीरिया एडीज एजिप्टी प्रजाति का मच्छर प्रजाति मच्छरों में डेंगू, जीका, चिकनगुनिया और येलो फीवर जैसे वायरस के फैलाव को कम कर सकता है।  कुछ विशेषज्ञ सावधानी की बात भी कर रहे हैं। उनका कहना है कि ऐसी किसी भी योजना में यह सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है कि गलती से मादा मच्छर न छोड़े जाएं। साथ ही, यह भी देखना होगा कि इस तरीके का असर लंबे समय तक कितना टिकाऊ रहता है। अमेरिकी रोग नियंत्रण और रोकथाम केंद्र  भी कहता है कि यदि वोल्बाकिया  मच्छरों को छोड़ना बंद कर दिया जाए, तो एडीज एजिप्टी प्रजाति का मच्छर प्रजातिकी आबादी धीरे-धीरे फिर सामान्य स्तर पर लौट सकती है।

मंजूरी अभी बाकी

अभी यह योजना अंतिम रूप से लागू नहीं हुई है। डीबग प्रोजेक्ट ने अमेरिकी पर्यावरण संरक्षण एजेंसी  से अनुमति मांगी है और एजेंसी इस पर समीक्षा कर रही है। सार्वजनिक टिप्पणियों की प्रक्रिया भी चल रही है। मंजूरी मिलने के बाद ही कैलिफोर्निया और फ्लोरिडा में चरणबद्ध तरीके से मच्छर छोड़े जा सकेंगे।

 जरूरी है यह कदम

जलवायु परिवर्तन, शहरीकरण और मच्छरों की बढ़ती अनुकूलन क्षमता के कारण दुनिया के कई हिस्सों में मच्छर जनित बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है। डेंगू और चिकनगुनिया जैसी बीमारियां अब उन क्षेत्रों में भी चिंता बढ़ा रही हैं, जहां पहले इनका खतरा सीमित माना जाता था। ऐसे में अमेरिका जैसे देश भी नए जैविक तरीकों की ओर देख रहे हैं। यदि यह योजना सुरक्षित और प्रभावी साबित होती है, तो भविष्य में यह मच्छर नियंत्रण की रणनीति में बड़ा बदलाव ला सकती है। हालांकि, इसके लिए सख्त निगरानी, पारदर्शिता और स्थानीय समुदायों की भागीदारी जरूरी होगी।
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