Tuesday, 21 Jul 2026 भारत
ब्रेकिंग
W 𝕏 f
होम सेहत रेडिएशन थेरेपी : रेडिएशन थेरेपी के बाद क्यों होती…
रेडिएशन फाइब्रोसिस के लक्षण
रेडिएशन फाइब्रोसिस के लक्षण
सेहत

रेडिएशन थेरेपी : रेडिएशन थेरेपी के बाद क्यों होती है शरीर में जकड़न और सूजन? जानें वजह

कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली रेडिएशन थेरेपी कुछ मरीजों में लंबे समय बाद रेडिएशन फाइब्रोसिस की समस्या पैदा कर सकती है। इसमें प्रभावित हिस्से में अकड़न, दर्द, सूजन और हिलने-डुलने में परेशानी जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। समय पर पहचान, नियमित जांच और उचित उपचार से इसके प्रभाव को कम किया जा सकता है।

कीर्तिमान डेस्क
कीर्तिमान डेस्क
21 Jul 2026, 05:34 PM
नई दिल्ली

कैंसर के इलाज में डॉक्टर रेडिएशन थेरेपी का उपयोग करते हैं। इससे कैंसर कोशिकाओं को नियंत्रित करने में मदद मिलती है। हालांकि, कुछ मरीजों में इसके साइड इफेक्ट लंबे समय तक बने रह सकते हैं। इन्हीं में रेडिएशन फाइब्रोसिस भी शामिल है। यह समस्या इलाज खत्म होने के महीनों या वर्षों बाद भी सामने आ सकती है। इसमें प्रभावित हिस्से में अकड़न, दर्द, सूजन और हाथ-पैर हिलाने में परेशानी जैसी दिक्कतें हो सकती हैं।

कैंसर का इलाज मरीज की स्थिति के अनुसार दवाओं, कीमोथेरेपी और रेडिएशन थेरेपी से किया जाता है। इलाज के बाद कई लोग सामान्य जीवन में लौट आते हैं, लेकिन कुछ मरीजों को रेडिएशन के कारण शरीर में बदलाव महसूस हो सकते हैं। इनमें अकड़न, दर्द, हल्की सूजन और असहजता जैसी समस्याएं शामिल हो सकती हैं।

लक्षणों को न करें नजरअंदाज

रेडिएशन थेरेपी के बाद अगर शरीर में लगातार दर्द, जकड़न या सूजन बनी रहती है तो इसे सामान्य रिकवरी मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। यह रेडिएशन फाइब्रोसिस का संकेत हो सकता है। इसमें प्रभावित टिशू में ज्यादा मात्रा में कोलेजन जमा होने लगता है, जिससे त्वचा, मांसपेशियां और अन्य नरम टिशू कठोर होने लगते हैं। रेडिएशन फाइब्रोसिस एक ऐसी स्थिति है जिसमें रेडिएशन से प्रभावित हिस्से के सामान्य टिशू धीरे-धीरे कठोर होकर स्कार टिशू में बदलने लगते हैं। यह समस्या शरीर के किसी भी उस हिस्से में हो सकती है जहां रेडिएशन दिया गया हो। कई मरीजों में इसके लक्षण इलाज खत्म होने के कुछ महीनों बाद दिखाई देते हैं, जबकि कुछ मामलों में यह कई साल बाद भी सामने आ सकती है।

थेरेपी के बाद फाइब्रोसिस क्यों बनता है

रेडिएशन थेरेपी कैंसर कोशिकाओं के डीएनए को नुकसान पहुंचाकर उन्हें खत्म करने का काम करती है। लेकिन इस प्रक्रिया में आसपास के स्वस्थ टिशू भी प्रभावित हो सकते हैं। कुछ मरीजों में लगातार सूजन और फाइब्रोब्लास्ट कोशिकाओं की सक्रियता बढ़ने से ज्यादा कोलेजन बनने लगता है, जिससे टिशू सख्त होने लगते हैं।

प्रभावित हिस्से में बढ़ने लगती है अकड़न

रेडिएशन फाइब्रोसिस का शुरुआती संकेत प्रभावित हिस्से में धीरे-धीरे बढ़ती हुई अकड़न हो सकता है। शुरुआत में यह समस्या सुबह के समय या लंबे समय तक बैठे रहने के बाद महसूस हो सकती है। समय के साथ मांसपेशियों की लचक कम होने लगती है और जकड़न लगातार बनी रह सकती है।

इलाज के बाद भी बना रहे दर्द तो दें ध्यान

अगर रेडिएशन थेरेपी खत्म होने के काफी समय बाद भी दर्द बना रहता है या बढ़ता जाता है, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। फाइब्रोसिस के कारण नसों और मांसपेशियों पर दबाव पड़ सकता है, जिससे दर्द, खिंचाव और असहजता महसूस हो सकती है। कुछ मरीजों में रेडिएशन वाले हिस्से की त्वचा मोटी, सख्त या कम लचीली महसूस हो सकती है। कई बार त्वचा के रंग में भी बदलाव दिखाई दे सकता है। यह बदलाव धीरे-धीरे होते हैं, इसलिए कई लोग इन्हें सामान्य उम्र या इलाज का असर समझ लेते हैं।

हाथ-पैर चलाने में परेशानी क्यों होती है

अगर रेडिएशन कंधे, गर्दन, हाथ, पैर या पेल्विक क्षेत्र में दिया गया है, तो फाइब्रोसिस के कारण जोड़ों की गतिविधि प्रभावित हो सकती है। मरीज को हाथ उठाने, गर्दन घुमाने, चलने या सीढ़ियां चढ़ने में परेशानी हो सकती है। शुरुआती अवस्था में फिजियोथेरेपी और स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज मददगार साबित हो सकती हैं। रेडिएशन फाइब्रोसिस कुछ मरीजों में लिम्फेटिक सिस्टम को प्रभावित कर सकती है। इससे हाथ, पैर या प्रभावित हिस्से में लगातार सूजन, भारीपन और कपड़ों के तंग महसूस होने जैसी समस्याएं हो सकती हैं। ऐसी स्थिति में डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।

किन मरीजों में ज्यादा रहता है खतरा

जिन मरीजों को ज्यादा डोज वाली रेडिएशन थेरेपी दी गई हो, जिनकी सर्जरी के साथ रेडिएशन भी हुआ हो या जिन्हें डायबिटीज और घाव भरने की समस्या हो, उनमें रेडिएशन फाइब्रोसिस का खतरा अधिक हो सकता है। रेडिएशन फाइब्रोसिस के प्रभाव को कम करने के लिए नियमित फॉलो-अप, फिजियोथेरेपी और विशेषज्ञों की सलाह जरूरी होती है। अगर रेडिएशन थेरेपी के बाद लंबे समय तक दर्द, अकड़न या सूजन जैसी समस्या महसूस हो रही है, तो जल्द ही ऑन्कोलॉजिस्ट या फिजिकल मेडिसिन विशेषज्ञ से संपर्क करना चाहिए।

क्या यह खबर उपयोगी लगी?
शेयर करें अपने दोस्तों तक पहुंचाएं
WhatsApp Telegram
हमारे WhatsApp ग्रुप से जुड़ें — ताज़ा खबरें सबसे पहले पाएं!
कीर्तिमान
गाइए और छा जाइए
कलमकार
छत्तीसगढ़
सभी छत्तीसगढ़ ›
रायपुर संभाग
दुर्ग संभाग
बिलासपुर संभाग
सरगुजा संभाग
बस्तर संभाग
भारत
विदेश
राजनीति
मनोरंजन
खेल
तकनीक
कारोबार
शिक्षा सेहत धर्म यात्रा राशिफल डार्क/लाइट मोड डॉ. नीरज गजेंद्र
वीडियो
अभी कोई वीडियो उपलब्ध नहीं है
Clip & Share

अगली खबर के लिए ऊपर और पिछली खबर के लिए नीचे स्वाइप करें

सावधान: संवेदनशील सामग्री
इस अनुभाग में अपराध, हिंसा, दुर्घटना या अन्य संवेदनशील विषयों से संबंधित समाचार हो सकते हैं। क्या आप इसे देखना चाहते हैं?
ताज़ा खबरें सबसे पहले पाएं!
पुश नोटिफिकेशन चालू करें